भिलाई (श्रीकंचनपथ न्यूज़)। ओबीसी के बाद छत्तीसगढ़ में दूसरी सबसे बड़ी कम्युनिटी सतनामी समाज को साधने की कोशिशें तेज हो गई है। ऐन चुनाव से पहले दोनों ही प्रमुख राजनीतिक दल सतनामी समाज को अपने-अपने तरीके से संदेश देने में जुटे हैं। अब तक इस समाज को साधने बाबा गुरु घासीदास की जयंती हर साल मनाई जाती रही हैं। इस बार सियासी दल मिनी माता की पुण्यतिथि को चुनाव से पहले इवेंट का रूप देने में लगे हैं। दरअसल, चुनाव में सतनामी समाज को साधने की कवायद दोनों राजनीतिक दल करते हैं। बाबा गुरु घासीदास की जयंती 18 दिसंबर को है। इसलिए चुनाव के ठीक पहले समाज को एक बड़ा संदेश देना है कि उनका दल सतनामी समाज के हितों की चिंता करता है। मिनी माता की जयंती मनाकर इस मैसेज को समाज के लोगों तक पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।
राज्य के आदिवासी इलाकों को छोड़ दें तो मैदानी इलाकों में दूसरी सबसे बड़ी कम्युनिटी सतनामी समाज है। रायपुर संभाग, दुर्ग और बिलासपुर संभाग में सतनामी समाज का बड़ा प्रभाव चुनाव में देखने को मिलता है। सरगुजा और बस्तर संभाग में सतनामी समाज कुछ खास प्रभाव नहीं डाल पाता है, क्योंकि बस्तर और सरगुजा संभाग आदिवासी बाहुल्य है। वहीं, प्रदेश में 10 विधानसभा सीटें ऐसी हैं जो कि एससी कम्युनिटी के लोगों के लिए आरक्षित है। पिछले विधानसभा चुनाव में सतनामी समाज ने एकजुट होकर कांग्रेस के पक्ष में वोट किया था, जिसका नतीजा साल 2018 के चुनाव में साफ देखने को मिला।
वहीं, 10 विधानसभा सीटों में से वर्तमान में 7 कांग्रेस के पास है, दो बीजेपी और एक बसपा के पास है। इनमें से एससी वर्ग की दो सीटें सरायपाली और सारंगढ़ में कांग्रेस प्रत्याशियों ने 50-50 हजार के बड़े अंतराल से जीत दर्ज की थी। अब साल के आखिरी में छत्तीसगढ़ में विधानसभा के चुनाव होने हैं। इस चुनाव में सतनामी वर्ग को साधने कांग्रेस और भाजपा दोनों ही मिनी माता की जयंती के उपलक्ष्य में कार्यक्रम करने जा रहे हैं। सत्तारूढ़ कांग्रेस मिनीमाता की पुण्यतिथि पर जांजगीर में बड़ा आयोजन करने जा रही है, जिसमें पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के शामिल होने की संभावना है। आयोजन 11 अगस्त को होगा।
दरसअल, प्रदेश में तीन बार भाजपा की सरकार बनी, तब एससी वर्ग के लिए आरक्षित दस में से सात-आठ सीटें भाजपा के पाले में थी। पिछले चुनाव में एससी वर्ग के आरक्षण में कटौती से नाराजगी का असर देखने को मिला और भाजपा सिर्फ दो सीट ही जीत पाई। इसमें रमन सरकार में मंत्री रहे पुन्नूलाल मोहिले मुंगेली और पूर्व मंत्री केएम बांधी मस्तुरी से जीत पाए। कांग्रेस ने सत्ता में आने के बाद एससी वर्ग के आरक्षण में एक फीसद की बढोत्तरी का दांव खेला। विधानसभा में कांग्रेस ने जो आरक्षण संशोधन विधेयक पास कराया, उसमें एससी वर्ग के लिए 12 की जगह 13 फीसद आरक्षण दिया गया। हालांकि यह विधेयक राजभवन में अभी तक लंबित है। भूपेश सरकार में एससी वर्ग से दो मंत्री डॉ. शिव डहरिया और गुरु रुद्रकुमार को जगह मिली। मिनीमाता गुरु रुद्र की दादी हैं। अब उनके नाम पर कांग्रेस एससी वोटरों को अपने पाले में करने की कोशिश कर रही है।
जांजगीर में शक्ति-प्रदर्शन के मायने
जांजगीर-चांपा में मल्लिकार्जुन खरगे की सभा इसलिए कराई जा रही है, क्योंकि यहां की एससी वर्ग की सीट कांग्रेस के खाते में नहीं है। यहां भाजपा और बसपा उम्मीदवार की जीत हुई। यही नहीं, मस्तुरी में तो कांग्रेस तीसरे स्थान पर खिसक गई थी। पिछले विधानसभा चुनाव में मस्तुरी में भाजपा 14 हजार वोट और मुंगेली में आठ हजार से ज्यादा वोट से जीती थी। पामगढ़ में बसपा की इंदू बंजारे को जीत मिली। इंदू ने कांग्रेस के गोरेलाल बर्मन को 3061 वोट से हराया था। रमन सरकार में मंत्री रहे दयालदास बघेल को पिछले चुनाव में अपनी सीट गंवानी पड़ी थी। एससी वर्ग की दो सीट सारंगढ़ और सराईपाली में कांग्रेस प्रत्याशी ने 50 हजार से ज्यादा वोट से जीत दर्ज की थी। पिछला रिकार्ड दोहराने के लिए कांग्रेस जुगत कर रही हैं। वहीं, भाजपा ने भी पहली बार एससी मोर्चा की राष्ट्रीय बैठक राजधानी रायपुर में की है।
ये हैं अजा आरक्षित सीटें
छत्तीसगढ़ की जिन 10 सीटों को अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित किया गया है, उनमें सारंगढ़, सराईपाली, आरंग, अहिवारा, नवागढ़, डोंगरगढ़, बिलाईगढ़ के अलावा मस्तुरी, मुंगेली व पामगंढ़ शामिल है। इनमें से मस्तुरी में भाजपा के केएम बांधी व मुंगेली क्षेत्र से पुन्नूलाल मोहिले ने पिछले चुनाव में जीत दर्ज की थी। इनके अलावा बसपा प्रत्याशी के रूप में पामगढ़ से इंदू बंजारे ने विजयी ध्वज फहराया था। बाकी की 7 सीटों पर कांग्रेस विजयी रही थी। अब पार्टी अपने पिछले प्रदर्शन को फिर से दोहराने की जुगत में है।




