रायपुर। जनगणना 2027 के प्रथम चरण के तहत छत्तीसगढ़ में “मकानसूचीकरण एवं मकानों की गणना” का फील्ड कार्य 1 मई से प्रारंभ होगा। इससे पहले राज्य में 137941 परिवार स्व-गणना (Self Enumeration) प्रक्रिया पूरी कर चुके हैं, जो डिजिटल जनगणना की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। भारत सरकार द्वारा संचालित जनगणना 2027 को एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय अभियान के रूप में देखा जा रहा है, जो केवल आंकड़ों का संकलन नहीं बल्कि भविष्य की विकास योजनाओं की ठोस आधारशिला तैयार करेगा। छत्तीसगढ़ राज्य में इस अभियान का प्रथम चरण “मकानसूचीकरण एवं मकानों की गणना” 1 मई 2026 से 30 मई 2026 तक संचालित किया जाएगा। *राज्य जनगणना कार्यालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार*, इस चरण में व्यापक स्तर पर घर-घर सर्वेक्षण किया जाएगा।

उल्लेखनीय है कि भारत में जनगणना की शुरुआत वर्ष 1872 में हुई थी और इसका 150 वर्षों से अधिक का समृद्ध इतिहास रहा है। आगामी जनगणना देश की 16वीं तथा स्वतंत्रता के बाद की 8वीं जनगणना होगी। इस बार की जनगणना विशेष रूप से उल्लेखनीय है, क्योंकि इसमें पहली बार आंकड़ों का संकलन डिजिटल माध्यमों के जरिए किया जा रहा है, जिससे प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, तेज और विश्वसनीय बनेगी। राज्य में 16 अप्रैल से 30 अप्रैल 2026 के बीच स्व-गणना पोर्टल के माध्यम से नागरिकों को स्वयं जानकारी दर्ज करने की सुविधा उपलब्ध कराई गई थी। निर्धारित अवधि के अंत तक कुल 137941 परिवारों ने इस सुविधा का लाभ उठाया। *राज्य जनगणना कार्यालय से प्राप्त सूचना के अनुसार*, जिन परिवारों ने स्व-गणना पूरी कर ली है, उन्हें प्राप्त 11 अंकों की स्व-गणना पहचान संख्या (Self Enumeration Identification Number) प्रगणक को सत्यापन हेतु उपलब्ध करानी होगी।
1 मई से प्रारंभ होने वाले फील्ड कार्य के दौरान प्रगणक घर-घर जाकर लगभग 33 प्रश्नों के माध्यम से मकानों की स्थिति, उपलब्ध सुविधाओं एवं परिसंपत्तियों से संबंधित जानकारी एकत्र करेंगे। यह संपूर्ण प्रक्रिया मोबाइल एप के माध्यम से संपादित की जाएगी, जिससे त्रुटियों में कमी आएगी और आंकड़ों की गुणवत्ता सुनिश्चित होगी। जनगणना के दौरान एकत्रित सभी व्यक्तिगत जानकारियां जनगणना अधिनियम, 1948 तथा जनगणना नियमावली, 1990 के प्रावधानों के तहत पूर्णतः गोपनीय रखी जाएंगी। इनका उपयोग किसी भी प्रकार के कर निर्धारण, पुलिस जांच या न्यायिक साक्ष्य के रूप में नहीं किया जा सकेगा और न ही सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत इनकी जानकारी प्राप्त की जा सकेगी।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि प्रगणक किसी भी नागरिक से वन टाइम पासवर्ड (One Time Password) की मांग नहीं करेंगे और न ही कोई लिंक साझा करेंगे। केवल फोटोयुक्त अधिकृत पहचान-पत्र वाले कर्मचारियों को ही जानकारी दी जानी चाहिए। शहरी क्षेत्रों, गेटेड कॉलोनियों और अपार्टमेंट परिसरों में निर्बाध प्रवेश सुनिश्चित करने के लिए जिला कलेक्टरों और नगर निगम आयुक्तों को आवश्यक निर्देश जारी किए गए हैं। किसी भी प्रकार की बाधा उत्पन्न करने पर संबंधितों के विरुद्ध जनगणना अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी।
राज्य में इस कार्य के लिए लगभग 62,500 अधिकारियों और कर्मचारियों की तैनाती की गई है, जिनमें 47 प्रमुख जनगणना अधिकारी, 250 जिला स्तरीय अधिकारी, 472 चार्ज अधिकारी, 1,160 मास्टर ट्रेनर एवं फील्ड ट्रेनर, 51,300 प्रगणक और 9,000 पर्यवेक्षक शामिल हैं। यह कार्य 33 जिलों, 195 नगरीय निकायों, 252 तहसीलों और 19,978 ग्रामों में संचालित किया जाएगा। जनगणना से संबंधित जानकारी के लिए आम नागरिकों हेतु टोल फ्री नंबर 1855 भी स्थापित किया गया है।
राज्य जनगणना निदेशक *कार्तिकेय गोयल* ने नागरिकों से अपील करते हुए कहा, “जनगणना एक राष्ट्रीय दायित्व है। नागरिकों द्वारा दी गई सही और पूर्ण जानकारी ही भविष्य में शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, रोजगार एवं आधारभूत सुविधाओं से संबंधित योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाने में सहायक होगी। सभी नागरिक प्रगणकों को सहयोग करें और सही जानकारी प्रदान करें।”




