भिलाई (श्रीकंचनपथ न्यूज़)। भाजपा कोर ग्रुप की कल रायपुर में हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया है कि जो जिलाध्यक्ष टिकट की दावेदारी करते हैं, उन्हें अपने पद से इस्तीफा देना होगा। इतना ही नहीं, इस्तीफे के बाद भी इस बात की कोई गारंटी नहीं होगी कि पार्टी उन्हें टिकट दे ही देगी। दुर्ग जिले के दोनों संगठनों भिलाई और दुर्ग के जिलाध्यक्षों को विधानसभा चुनाव में टिकट का दावेदार बताया जा रहा है। ऐसे में संभावना यही बन रही है कि दोनों जिलाध्यक्ष अपने पद से इस्तीफा दे सकते हैं।
भिलाई जिला भाजपा के अध्यक्ष बृजेश बिचपुरिया ने हालांकि स्पष्ट नहीं किया है, किन्तु जानकारों के मुताबिक, वे वैशाली नगर क्षेत्र से टिकट के प्रमुख दावेदारों में हैं। वरिष्ठ व अनुभवी नेता होने की वजह से पार्टी ने उन्हें जिलाध्यक्ष बनाया था। गुटबाजी के चलते उन पर सभी गुटों के साथ समन्वय की बड़ी जिम्मेदारी थी। इस बार क्षेत्र से स्थानीय को ही टिकट देने की वकालत की जा रही है, ऐसे में बिचपुरिया की दावेदारी और भी ज्यादा पुख्ता होती है। अब तक पार्टी ने यहां से सरोज पाण्डेय, जागेश्वर साहू व (स्व.) विद्यारतन भसीन को प्रत्याशी बनाया था। स्व. भसीन को छोड़कर बाकी दोनों प्रत्याशी बाहरी थे। यही वजह है कि इस बार पार्टी के भीतर स्थानीय को टिकट देने की मांग जोर पकड़ रही है।
दूसरी ओर दुर्ग जिला भाजपाध्यक्ष के अध्यक्ष जितेन्द्र वर्मा को भी टिकट का प्रमुख दावेदार बताया जा रहा है। हालांकि वे अब तक पाटन क्षेत्र से टिकट की मांग करते रहे हैं, लेकिन जिलाध्यक्ष बनाए जाने के बाद वे बोरिया-बिस्तर लेकर दुर्ग शिफ्ट हो गए थे। दुर्ग भाजपा भी गुटबाजी से परेशान रही है। वर्मा को पाटन से लाकर दुर्ग का जिलाध्यक्ष बनाया गया तो उनसे भी यही अपेक्षा की गई थी कि दुर्ग जिले में गुटबाजी पर अंकुश लगेगा। जानकारों के मुताबिक, जितेन्द्र वर्मा अब पाटन की बजाए दुर्ग से दावेदारी करने का मन बना चुके हैं। इसकी वजह यह है कि पाटन, मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का क्षेत्र है और मुख्यमंत्री के सामने चुनाव लडऩा अपना राजनीतिक भविष्य खत्म करने के समान है। ऐसे में हेमचंद यादव के निधन के बाद रिक्त हुई दुर्ग सीट पर जितेन्द्र वर्मा की दावेदारी से नए समीकरण बन सकते हैं। दुर्ग पिछड़ा वर्ग बाहुल्य इलाका है, जहां से विगत दो चुनाव से कांग्रेस के सीनियर नेता अरूण वोरा विधायक निर्वाचित होते रहे हैं। हालांकि इससे पहले लगातार तीन बार भाजपा के (स्व.) हेमचंद यादव चुनाव जीते थे। उनके निधन के पश्चात पार्टी ने दुर्ग निगम की महापौर चंद्रिका चंद्राकर को टिकट दिया था, जिन्हें अरूण वोरा के मुकाबले अपेक्षाकृत कमजोर प्रत्याशी माना गया था।
प्रदेश में आधा दर्जन जिलाध्यक्ष दावेदार
बताया जा रहा है कि छत्तीसगढ़ में भाजपा के आधा दर्जन से ज्यादा जिलाध्यक्ष विधानसभा टिकट के दावेदार हैं। संभावना जताई जा रही है कि ये सभी जल्द ही इस्तीफा दे सकते हैं। पार्टी भी चाहती है कि टिकट के दावेदार क्षेत्र में सक्रिय रहें, ताकि टिकट वितरण के बाद किसी तरह की कठिनाई न आए। भाजपा की कोर कमेटी की बैठक में राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष और चुनाव प्रभारी ओम माथुर ने मिलकर यह फार्मूला तय किया है। हालांकि राजस्थान में भी ऐसा ही फार्मूला पहले ही लागू किया जा चुका है। बैठक में भाजपा ने पूरे छत्तीसगढ़ में भाजपा के पक्ष में माहौल बनाने के लिए यात्राएं निकालने का निर्णय भी लिया है। एक यात्रा बस्तर से तो दूसरी सरगुजा से शुरू होगी। ये दोनों यात्राएं एक साथ शुरू होंगी और 15 दिन में सभी 90 विधानसभाओं का भ्रमण करेगी। अभी इसका संभावित नाम विजय संकल्प यात्रा बताया जा रहा है। यात्राएं 1 सितम्बर से 15 सितम्बर तक चलेगी, जिसमें बड़े से लेकर स्थानीय स्तर के तमाम नेता शामिल होंगे।
मनभेद दूर करने की कवायद
बैठक में बीएल संतोष और ओम माथुर ने यह भी कहा कि नेताओं को क्षेत्रीय संगठन महामंत्री और संगठन महामंत्री को सुझाव नियमित रूप से देते रहना है, चाहे उनसे कोई पूछे या न पूछे। अगर उन्हें किसी कार्यक्रम में नहीं बुलाया जाता है और वे उससे संबंधित कुछ बात रखना चाहते हैं तो जरूर बताएं। इसके अलावा जिलों में भी अगर मनमुटाव है तो प्रमुख नेता वहां जाकर दोनों पक्षों को बुलाएं। मिलकर बात करें और समझाकर मनमुटाव दूर करें। संदेश दें कि मिलकर काम करना है। ओम माथुर ने अगले दो महीने में होने वाले सभी कार्यक्रमों की समीक्षा भी की। अगस्त में चल रहे नए वोटर्स को जोडऩे का अभियान और विधानसभा में कलेक्टर को ज्ञापन देने वाले कार्यक्रम पर बात हुई। इसके साथ ही सितंबर में होने वाले कार्यक्रमों की योजना भी बनाई गई।




