भिलाई (श्रीकंचनपथ न्यूज़)। संसद के दोनों सदनों से महिला आरक्षण बिल पारित होने के बाद राजनीतिक दल अब महिलाओं को लुभाने की कोशिशों में जुट गए हैं। छत्तीसगढ़ में अगले दो महीने के भीतर विधानसभा के चुनाव होने हैं, ऐसे में दोनों ही दलों कांग्रेस व भाजपा की कोशिश है कि ज्यादा से ज्यादा महिलाओं को टिकट देकर आधी आबादी को अपने पाले में किया जाए। भाजपा की ओर से अब तक कोई स्पष्ट संकेत तो नहीं मिले हैं, लेकिन कांग्रेस ने जरूर अपने पत्ते खोल दिए हैं। कांग्रेस पार्टी ने तय किया है कि प्रत्येक संसदीय क्षेत्र से कम से कम दो महिलाओं को टिकट दिया जाए। छत्तीसगढ़ में कुल 11 संसदीय सीटें हैं। ऐसे में कांग्रेस की ओर से कम से कम 22 महिलाएं इस बार चुनाव मैदान में भाग्य आजमातीं दिख सकती हैं।

2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने छत्तीसगढ़ में कुल 13 महिलाओं को टिकट दी थी। इनमें से 10 महिलाओं ने जीत हासिल की। वहीं भाजपा ने कुल 14 महिलाओं को टिकट दी थी, जिसमें से महज एक को ही जीत नसीब हो पाई थी। हाल ही में सीएम भूपेश बघेल के निवास पर प्रदेश चुनाव समिति की बैठक हुई थी। इसी बैठक में महिला शक्ति को ज्यादा से ज्यादा टिकट देने पर चर्चा हुई। बैठक में सीएम भूपेश बघेल के अलावा प्रदेश प्रभारी कुमारी सैलजा, डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज व विधानसभा अध्यक्ष चरणदास महंत आदि लोग मौजूद थे। बैठक के बाद कांग्रेस की प्रदेश प्रभारी कुमारी सैलजा ने स्पष्ट किया कि छत्तीसगढ़ के 11 संसदीय क्षेत्र से प्रत्येक में 2-2 महिलाओं को टिकट देने की कोशिश की जाएगी। उन्होंने बताया कि इस पर लगातार मंथन चल रहा है। दरअसल, संसद में महिला आरक्षण विधेयक पारित होने के बाद दोनों पार्टियों की रणनीति लगातार बदलती हुई दिख रही है।
दुर्ग संसदीय क्षेत्र में 9 विधानसभा क्षेत्र
दुर्ग को छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े संसदीय क्षेत्र के रूप में जाना जाता है। दुर्ग जिले में जहां कुल 6 विधानसभा सीटें हैं, वहीं दुर्ग संसदीय क्षेत्र में कुल 9 विधानसभा क्षेत्र आते हैं। इनमें पाटन, दुर्ग ग्रामीण, दुर्ग शहर, भिलाई नगर, वैशाली नगर, अहिवारा, साजा, बेमेतरा व नवागढ़ शामिल हैं। इनमें से साजा, बेमेतरा व नवागढ़ बेमेतरा जिलांतर्गत आते हैं। हालांकि ये तीनों क्षेत्र दुर्ग संसदीय क्षेत्र का हिस्सा हैं। पिछले विधानसभा चुनाव के नतीजों की बात करें तो वैशाली नगर को छोड़कर बाकी के सभी 8 विधानसभा क्षेत्रों में कांग्रेस ने जीत दर्ज की थी। हालांकि वर्तमान में वैशाली नगर सीट इसलिए रिक्त है, क्योंकि यहां के भाजपा विधायक विद्यारतन भसीन का कुछ समय पूर्व निधन हो गया था। वैशाली नगर इकलौती सीट थी, जहां विगत चुनाव में भाजपा ने जीत दर्ज की थी। इस सीट को भाजपा माइडेंड माना जाता है। इस बार कांग्रेस ने इस सीट को फतह करने के लिए काफी मेहनत की है। चुनाव के नतीजे ही तय करेंगे कि मेहनत भरपूर की गई या कहीं कोई कमी रह गई?
किस सीट पर कितनी संभावना?
संसदीय क्षेत्र की कुल 9 सीटों की बात करें तो महिलाओं के लिए 2 सीटें निकालना कांग्रेस के लिए टेढ़ी खीर साबित होने वाला है। ऐसा इसलिए क्योंकि कुल 9 में से 8 सीटों पर पहले ही पुरूष विधायकों का कब्जा है। इकलौती वैशाली नगर की सीट है, जहां से कांग्रेस महिला प्रत्याशी दे सकती है। इस बात की संभावना काफी पहले से ही जाहिर की जा रही थी कि कांग्रेस इस बार वैशाली नगर में किसी महिला को आजमा सकती है। ऐसे में यह लगभग तय है कि वैशाली नगर की सीट महिला कोटे की भेंट चढ़ जाएगी। लेकिन दूसरी सीट कौन सी होगी, इसे लेकर संशय है। पाटन क्षेत्र से स्वयं सीएम भूपेश बघेल विधायक हैं, वहीं दुर्ग ग्रामीण सीट से गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू, दुर्ग शहर से अरूण वोरा, भिलाई नगर से देवेन्द्र यादव, साजा से रविन्द्र चौबे, बेमेतरा से आशीष छाबड़ा की टिकट सौ फीसद तय बताई जा रही है। अहिवारा के विधायक व केबिनेटमंत्री रूद्र कुमार गुरू नवागढ़ से टिकट चाह रहे हैं। यदि पार्टी उन्हें नवागढ़ से टिकट देती है तो नवागढ़ के कांग्रेस विधायक गुरूदयाल सिंह बंजारे के लिए दिक्कत हो जाएगी। वैसे भी नवागढ़ में रूद्र गुरू का विरोध किया जा रहा है। यदि पार्टी रूद्र गुरू को नवागढ़ से टिकट देती है तो अहिवारा क्षेत्र के लिए नया प्रत्याशी ढूंढना होगा। संभव है कि यहां महिला प्रत्याशी के लिए संभावना बने। लेकिन अहिवारा जिले की इकलौती एससी आरक्षित सीट है और कांग्रेस के पास कोई बड़ा महिला चेहरा भी नहीं है।
कांग्रेस में फंसे हैं कई पेंच
भाजपा ने पिछले महीने जब अपने 21 प्रत्याशियों की पहली सूची जारी की तो कांग्रेस में भी प्रत्याशियों की घोषणा को लेकर हड़बड़ी देखने को मिली, लेकिन दर्जनों बैठकें होने के बाद भी कांग्रेस अब तक अपने प्रत्याशियों के नाम फायनल नहीं कर पाई है। इसके पीछे कई तरह के पेंच बताए जा रहे हैं। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस ने प्रदेश स्तर पर अपने हिसाब से प्रत्याशियों के सिंगल, डबल नाम तय कर लिए थे, लेकिन स्क्रीनिंग कमेटी के अध्यक्ष अजय माकन की अगुवाई में जब बैठक हुई तो इन तमाम नामों पर फिर से पुनर्विचार करने की नौबत आ गई। दरअसल, अजय माकन दिल्ली से प्रत्याशियों की फेहरिश्त लेकर रायपुर आए थे। उनके पास जो नाम थे, वह प्रदेश स्तर पर तय किए गए नामों से अलग थे। ऐसे में माकन ने कई कड़े सवाल किए, जिनका जवाब प्रदेश के नेताओं के पास नहीं था। इसीलिए पहली सूची जारी करने को लेकर ही काफी विलम्ब हो गया। बताया जाता है कि अब भी कांग्रेस की मंशा है कि भाजपा की सभी सीटों पर प्रत्याशी घोषित करने के बाद उसी के हिसाब से अपने प्रत्याशी तय किए जाएं।




