रांची (एजेंसी)। कोरोना संक्रमण के लगातार बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य प्रणाली की हकीकत को उजागर कर दिया है। झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता मंगलवार को राजधानी रांची के सदर अस्पताल का हाल जानने पहुंचे थे, लेकिन यहां उन्हें उनकी व्यवस्था के चलते ही शर्मसार होना पड़ा।
जिस वक्त मंत्री जी, अस्पताल के अंदर मरीजों का हाल ले रहे थे, तब पूरा महकमा उनकी खुशामद में लगा रहा। उसी दौरान अस्पताल के बाहर एक मरीज ने इलाज के अभाव में अपनी बेटी के सामने दम तोड़ दिया। जब स्वास्थ्य मंत्री अस्पताल के बाहर निकले, तो अपने पिता को खोने के गम में रोती बिलखती बेटी ने मंत्री जी की बोलती बंद कर दी, उन्हें जमकर खरी खोटी सुनाई।
बेटी बोली- मंत्री जी मैं डॉक्टर-डॉक्टर चिल्लाती रह गई, कोई नहीं आया..
30 वर्षीय एक बेटी बड़ी ही उम्मीद से अपने बीमार पिता को इलाज के लिए अस्पताल लेकर आई थी, लेकिन स्वास्थ्य मंत्री के दौरे के चलते उसे अस्पताल में घुसने ही नहीं दिया गया। इसके चलते पिता ने बिना इलाज के ही दम तोड़ दिया। मंत्री जी जब अस्पताल से बाहर निकले, तब अस्पताल के बाहर पिता का शव लिए खड़ी बेटी ने मंत्री बन्ना गुप्ता के सामने चिल्लाते हुए बताया। मंत्री जी यहीं (अस्पताल परिसर में) डॉक्टर… डॉक्टर चिल्लाती रह गई। कोई डॉक्टर नहीं आया। अब आप क्या करेंगे। मेरे पिता को वापस ला देंगे। आप तो खाली वोट लेने आएंगे। लोग उसे समझाते रहे कि घर जाओ, लेकिन वो चिल्लाते रही।
हजारीबाग से रांची इलाज के लिए लेकर आई थी
पवन गुप्ता की तबीयत बिगडऩे पर उनकी बेटी उन्हें हजारीबाग से रांची लाए थी। वह अस्पताल दर अस्पताल भटकते रही, लेकिन कहीं बेड नहीं मिला। आखिर में वह अपने पिता को लेकर सदर अस्पताल पहुंची। यहां अंदर मंत्री निरीक्षण कर रहे थे, बाहर वे तड़प रहे थे। आखिर में पवन गुप्ता ने अस्पताल के बाहर ही दम तोड़ दिया।
भाजपा बोली- सरकार की लापरवाही से बेटी ने खोया अपना पिता
राज्य में भारतीय जनता पार्टी ने इस घटना पर कहा कि सरकार की लापरवाही से बेटी ने अपने पिता को खो दिया। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश ने कहा कि सरकार की लापरवाही के कारण इस बेटी ने अपने पिता को खो दिया है। उन्होंने पूछा है कि आखिर कब अपनी जिम्मेदारियों को समझेंगे मुख्यमंत्री जी?
सरकार ने दिए जांच के आदेश
स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता ने घटना की जांच कर 48 घंटे के अंदर जांच रिपोर्ट सिविल सर्जन रांची से मांगी हैं। उन्होंने पूछा है कि किन परिस्थितियों में किसकी लापरवाही के कारण मरीज की मौत हुई है। मंत्री ने कहा कि कोरोना काल में झारखंड की जनता की सेहत की उन्हें चिंता है। इसलिए अपनी सेहत की परवाह किए बिना कोरोना मरीजों से मिलने कोरोना वार्ड में गए थे।




