भिलाई। नवरात्रि के अवसर पर दुनिया की सबसे छोटी मां दुर्गा की मूर्ति का निर्माण छत्तीसगढ़ के सुप्रसिद्ध मूर्तिकार डॉ. अंकुश देवांगन ने किया है। संगमरमर पत्थर को तराशकर बनाए गए इस कलाकृति का आकार मात्र आधे सेन्टीमीटर या चने के दाने के बराबर है। उंगली के छोटे से नाखून पर प्रदर्शित मां की यह मूर्ति सिंह पर विराजमान है, जिसके आठो हाथों में खड्ग, तलवार, त्रिशूल, गदा और विभिन्न आयुध विद्यमान हैं।
ज्ञात हो कि समकालीन भारतीय कलाजगत के सशक्त स्तंभ अंकुश देवांगन ने अपने सूक्ष्मकला की शुरुआत 1985 से की थी। वहीं 1989 में चीन के तियानमेन चौक में प्रजातंत्र की मांग कर रहे हजारों छात्रों के नरसंहार के बाद उन्होंने माओवादी क्षेत्रों में हिंसा छोड़ो कला से नाता जोड़ो आंदोलन शुरू किया। जो विगत 36 वर्षों से जारी है। पौराणिक आख्यानों में दर्ज कला आनंदम ददाति से प्रेरणा लेकर उन्होंने सृजनात्मक विचारों से हिंसात्मक विचारों के नाश का प्रयास किया है। जो सदैव कारगर साबित हुआ है। परिणामस्वरूप उन्होंने बच्चों को कला के प्रति आकर्षित करने के लिए इन सूक्ष्मकलाओं का निर्माण किया। ताकि बच्चे सृजनशील, शिक्षित, सक्षम बन सकें और माओवादी विचारधारा में न जाएं। जिसका व्यापक प्रभाव पड़ा और हजारों बच्चे पढ़ लिखकर अपना जीवन संवारने में सफल हुए हैं।
अंकुश देवांगन ने हर धर्म के देवी देवताओं, महापुरुषों और ऐतिहासिक इमारतों की सूक्ष्मतम तस्वीरें उन्होंने बनाई है। 2003 में उन्हें इन सूक्ष्मकलाओं के लिए प्रतिष्ठित लिम्का बुक ऑफ द रिकॉर्ड का नेशनल अवार्ड भी मिल चुका है। वे राज्य के प्रथम कलाकार हैं जो ललित कला अकादमी, नई दिल्ली में एक्जीक्यूटिव बोर्ड मेंबर हैं। वे सूक्ष्म कलाकृतियों का निर्माण निरंतर करते रहते हैं और इसके माध्यम से सामाजिक सरोकारों के संदेश भी देते हैं। भारत में तेजी से बढ़ते जल प्रदूषण को रोकने के लिए उन्होंने इस कलाकृति के माध्यम से संदेश दिया है कि छोटी प्रतिमाओं का ही निर्माण करना चाहिए। ताकि जल कम से कम प्रदूषित हो। वर्तमान में वे भिलाई इस्पात संयंत्र के मेडिकल विभाग में कार्यरत हैं।




