मेरठ (एजेंसी)। कोयले की कमी से बिजली उत्पादन में आई कमी का असर पश्चिमांचल में भी दिखाई देना शुरू हो गया है। पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (पीवीवीएनएल) में बिजली की मांग और उपलब्धता में आई करीब दस फीसदी की कमी के चलते ग्रामीण क्षेत्र में बिजली कटौती शुरू हो गई है। इसका सबसे ज्यादा असर सहारनपुर और मुरादाबाद जोन में देखा जा रहा है। नलकूपों की बिजली आपूर्ति को भी झटका लग रहा है। मेरठ, गाजियाबाद और नोएडा अभी कटौती के संकट से बाहर हैं। लेकिन हालात सामान्य नहीं हुए तो यहां भी कटौती शुरू हो जाएगी।

पीवीवीएनएल के करीब 70 लाख बिजली उपभोक्ताओं की बिजली की मांग 6500 से 7000 मेगावाट तक है, लेकिन इन दिनों प्रदेश में चल रहे बिजली संकट के चलते उपलब्धता में करीब दस फीसदी तक की कमी आ गई है। इस कमी का असर कंपनी के अंतर्गत आने वाले 14 जनपदों में से सात जनपदों पर पडऩा शुरू हो गया है। बिजली की कमी के चलते ग्रामीण क्षेत्रों के 18 घंटे के शेड्यूल से दो से तीन घंटे कटौती की जा रही है।?
इन जिलों में शुरू हुई रोस्टिंग
बिजली संकट के चलते कंपनी के सात जनपदों सहारनपुर, मुरादाबाद, संभल, रामपुर, अमरोहा और बिजनौर में दो से तीन घंटे की रोस्टिंग शुरू हो गई है। इन जिलों के गांवों को 18 घंटे की बजाय 15 से 16 घंटे ही बिजली दी जा रही है। इसके अलावा नलकूपों को 10 घंटे तक ही बिजली दी जा रही है।
सहारनपुर और मुरादाबाद मंडल में सबसे ज्यादा चोरी
पश्चिमांचल के सहारनपुर और मुरादाबाद जोन में सर्वाधिक बिजली चोरी होती है। बिजली चोरी रोकने के लिए भी सहारनपुर, मुरादाबाद, अमरोहा, रामपुर, संभल और बिजनौर आदि की बिजली काटी जा रही है। जितनी ज्यादा बिजली आपूर्ति होती है उतनी ही बिजली चोरी से कंपनी को राजस्व की चपत लगती है। कम बिजली आपूर्ति से बिजली चोरी का मीटर भी कम घूमता है।




