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ISRO EOS-03 : इसरो का EOS-3 सैटेलाइट लॉन्चिंग मिशन फेल, आखिरी समय में क्रायोजेनिक इंजन ने बिगाड़ा खेल

By @dmin Published August 12, 2021
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ISRO EOS-03: ISRO's EOS-3 satellite launching mission failed
ISRO EOS-03: ISRO's EOS-3 satellite launching mission failed
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श्रीहरिकोटा (एजेंसी)। आजादी के जश्‍न की तैयारियों के बीच भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने अंतरिक्ष में भारत का निगबहान तैनात करने को श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से आज सुबह 5 बजकर 43 मिनट पर जीएसएलवी-एफ 10 के जरिए धरती पर निगरानी रखने वाले उपग्रह ईओएस-03 का प्रक्षेपण किया। मगर क्रायोजेनिक इंजन में आई तकनीकी खराबी की वजह से यह मिशन सफल नहीं हो पाया। इसरो अध्यक्ष के सिवन ने कहा कि प्रक्षेपण के क्रायोजेनिक चरण में देखी गई तकनीकी दिक्कतों के कारण इसरो का GSLV-F10/EOS-03 मिशन पूरी तरह से पूरा नहीं हो सका। इसके सफल प्रक्षेपण से भारत को काफी फायदा मिलने वाला था। जीएसएलवी-एफ 10 रॉकेट के जरिए भू्-अवलोकन उपग्रह ईओएस-03 के प्रक्षेपण के लिए 26 घंटे की उल्टी गिनती श्रीहरिकोटा में बुधवार को शुरू हुई थी।

स्पेसप्लाइट नाऊ के मुताबिक, इसरो EOS-03 उपग्रह को कक्षा में स्थापित करने में विफल रहा है। इसरो ने पुष्टि की है कि जीएसएलवी एमके. 2 लॉन्च आज क्रायोजेनिक चरण में देखी गई खराबी के कारण विफल रहा। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2017 के बाद से किसी भारतीय अंतरिक्ष प्रक्षेपण में यह पहली विफलता है। इससे पहले इसरो के लगातार 14 मिशन सफल हुए हैं। फरवरी में ब्राजील के भू-अवलोकन उपग्रह एमेजोनिया-1 और 18 अन्य छोटे उपग्रहों के प्रक्षेपण के बाद 2021 में इसरो का यह दूसरा प्रक्षेपण था।

दरअसल, इसरो ने आज सुबह सुबह 5.43 बजे सफलतापूर्वक लॉन्चिंग की थी। तय समय के अनुसार सारे स्टेज पूरे होते चले गए। मगर आखिरी में EOS-3 के अलग होने से पहले क्रायोजेनिक इंजन में कुछ तकनीकी खराबी आ गई, जिसकी वजह से इसरो को आंकड़ें मिलने बंद हो गए। इसके बाद इसरो प्रमुख ने ऐलान किया कि यह मिशन आंशिक तौर पर विफल हो गया।

यह प्रक्षेपण मूल रूप से इस साल अप्रैल या मई में ही होना था, लेकिन कोविड-19 महामारी की दूसरी लहर के चलते इसे टाल दिया गया था। बता दें कि ‘जीएसएलवी-एफ 10/ईओएस-03 अभियान के लिए उल्टी गिनती बुधवार तड़के तीन बज कर 43 मिनट पर सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र में शुरू हो गई थी। यह अवलोकन उपग्रह देश और इसकी सीमाओं की तस्वीरें वास्तविक समय पर उपलब्ध कराएगा और प्राकृतिक आपदाओं की शीघ्र निगरानी भी कर सकेगा।

यह प्रक्षेपण बृहस्पतिवार को सुबह 5 बज कर 43 मिनट पर चेन्नई से करीब 100 किमी दूर श्रीहरिकोटा के दूसरे लॉंच पैड (प्रक्षेपण स्थल) से हुआ। इस अभियान का उद्देश्य नियमित अंतराल पर बड़े क्षेत्र की वास्तविक समय पर तस्वीरें उपलब्ध कराना, प्राकृतिक आपदाओं की त्वरित निगरानी करना और कृषि, वनीकरण, जल संसाधनों तथा आपदा चेतावनी प्रदान करना, चक्रवात की निगरानी करना, बादल फटने आदि के बारे में जानकारी प्राप्त करना था। यह उपग्रह 10 साल तक सेवा देगा। इसके बारे में कहा जा रहा है कि ईओएस-03 उपग्रह एक दिन में पूरे देश की चार-पांच बार तस्वीर लेगा, जो मौसम और पर्यावरण परिवर्तन से संबंधित प्रमुख डेटा भेजेगा। इतना ही नहीं, यह EOS-03 उपग्रह भारतीय उपमहाद्वीप में बाढ़ और चक्रवात जैसी प्राकृतिक आपदाओं की लगभग रीयल टाइम निगरानी में सक्षम होगा क्योंकि यह प्रमुख पर्यावरणीय और मौसम परिवर्तनों से गुजरता है।

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