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Health

बच्चों को किस उम्र से देना चाहिए फ्रूट जूस

By @dmin
Published: June 27, 2020
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बड़ों ही नहीं बल्कि बच्चों के लिए भी फल और सब्जियां बहुत फायदेमंद होती हैं लेकिन आपको ये पता होना चाहिए कि छोटे बच्चों को किस उम्र से फ्रूट जूस देना शुरू करना चाहिए। जूस सेहत के लिए अच्छे माने जाते हैं लेकिन बच्चों के लिए ये कितने फायदेमंद होते हैं, ये जानना जरूरी है। तो चलिए जानते हैं कि बच्चों को किस उम्र से जूस दे सकते हैं और उन्हें किस फल एवं सब्जी का जूस देना ज्यादा फायदेमंद रहता है।

Contents
  • क्या शिशु को जूस दे सकते हैं?
  • जूस पीने के फायदे
  • बच्चों को कब दे सकते हैं जूस?
  • बच्चे को जूस देने के टिप्स

क्या शिशु को जूस दे सकते हैं?

आमतौर पर एक साल से कम उम्र के बच्चों को जूस नहीं देना चाहिए क्योंकि इससे उन्हें कोई लाभ नहीं मिलता और उनके दांतों में कीड़े लग सकते हैं। वहीं एक साल से अधिक उम्र के बच्चों को जूस से उतना ही फायदा मिलता है जितना कि वयस्कों को होता है। आप सेब, अंगूर, खरबूजा, गाजर, संतरा, टमाटर, नींबू, आडू, आम, बैरी, लीची, चुकंदर का जूस बच्चों को दे सकते हैं।

जूस पीने के फायदे

माइक्रोन्यूट्रिएंट्स:- फल और सब्जियां माइक्रोन्यूट्रिएंट्स का बेहतर स्रोत हैं जैसे कि विटामिन और मिनरल। ये मल्टीविटामिन और मिनरल शिशु के विकास में मदद करते हैं।
रक्त संचार:- माना जाता है कि फल और सब्जियों के रस से हृदय स्वस्थ रहता है। इनमें कई पॉलीफेनोल, विटामिन और खनिज पदार्थ होते हैं।
प्रीबायोटिक:- फल और सब्जियों के रस में बायाएक्टिव यौगिक जैसे कि पॉलीफेनोल, फाइबर और नाइट्रेट होता है। ये यौगिक प्रीबायोटिक की तरह काम करते हैं। इससे पाचन तंत्र दुरस्त रहता है।

बच्चों को कब दे सकते हैं जूस?

अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स के अनुसार, 12 महीने से कम उम्र के बच्चों को जूस नहीं देना चाहिए क्योंकि इससे उन्हें कोई लाभ नहीं मिलता है। एक साल की उम्र के बाद बच्चों को नियंत्रित मात्रा में जूस दे सकते हैं लेकिन फिर भी साबुत अनाज उनके लिए बेहतर विकल्प होते हैं। बच्चों को प्रतिदिन 60 से 120 मि.ली से अधिक जूस नहीं देना चाहिए। एफडीए के अनुसार बच्चों को जूस उबालकर देना चाहिए क्योंकि इससे उनमें मौजूद बैक्टीरिया खत्म हो जाता है।

बच्चे को जूस देने के टिप्स

बच्चों को जूस बोतल की बजाय चम्मच या कप से दें।
उन्हें ताजा जूस दें जिसमें कोई स्वीटनर या पाउडर मिला न हो। ये पचाने में आसान होते हैं।
ठोस आहार की जगह जूस नहीं ले सकते हैं।
बच्चों के लिए फ्रूट जूस की बजाय सब्जी का रस देना शुरू करें क्योंकि फलों का रस ज्यादा मीठा होता है।
रात के समय बच्चों को फ्रूट जूस न दें क्योंकि इसकी वजह से पेट फूलने, गैस और अपच हो सकती है।

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