रायपुर। छत्तीसगढ़ की बेटियों को आत्मनिर्भर, आत्मविश्वासी और आत्मरक्षा में सक्षम बनाने की दिशा में छत्तीसगढ़ योग आयोग एक महत्वपूर्ण पहल करने जा रहा है। आयोग का उद्देश्य प्रदेश के शहरी क्षेत्रों के साथ-साथ बस्तर जैसे सुदूर और आदिवासी अंचलों तक पहुंचकर महिलाओं, युवतियों और विशेषकर छोटी बच्चियों को आत्मरक्षा का प्रशिक्षण उपलब्ध कराना है। इस पहल के माध्यम से बेटियों को ताइक्वांडो, कराटे और आत्मरक्षा की विभिन्न तकनीकों का प्रशिक्षण देकर उन्हें शारीरिक एवं मानसिक रूप से सशक्त बनाने का प्रयास किया जाएगा।
इसी क्रम में छत्तीसगढ़ योग आयोग के अध्यक्ष संजय अग्रवाल आज रायपुर स्थित रावतपुरा यूनिवर्सिटी पहुंचे, जहां उन्होंने बीएड के छात्र-छात्राओं को संबोधित किया। अपने संबोधन में उन्होंने जीवन में आने वाली चुनौतियों, परीक्षाओं और कठिन परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि जीवन में परिणाम और परीक्षाएं आती रहेंगी, लेकिन हमें कभी रुकना नहीं चाहिए। असफलताओं से निराश होने के बजाय उनसे सीख लेकर निरंतर आगे बढ़ते रहना ही सफलता का वास्तविक मंत्र है। उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों से घबराने के बजाय आत्मविश्वास, साहस और दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ उनका सामना करना चाहिए।
बेटियों को केवल शिक्षित नहीं, आत्मरक्षा में भी सक्षम बनाने का लक्ष्य
संजय अग्रवाल ने कहा कि आज के समय में बेटियों का सशक्तिकरण केवल शिक्षा और अवसरों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन्हें अपनी सुरक्षा के प्रति जागरूक और आत्मरक्षा के कौशल में भी दक्ष बनाना आवश्यक है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए योग आयोग प्रदेशव्यापी स्तर पर एक विशेष प्रशिक्षण पहल की दिशा में कार्य कर रहा है।

उन्होंने बताया कि इस पहल के अंतर्गत बस्तर सहित प्रदेश के ऐसे ग्रामीण, आदिवासी और दूरस्थ क्षेत्रों को प्राथमिकता देने का प्रयास किया जाएगा, जहां बच्चियों और युवतियों को इस तरह के प्रशिक्षण की सुविधाएं आसानी से उपलब्ध नहीं हो पाती हैं। ताइक्वांडो, कराटे और आत्मरक्षा की अन्य विधाओं के माध्यम से उन्हें विपरीत परिस्थितियों में स्वयं की सुरक्षा करने के लिए तैयार किया जाएगा। इस कार्य को आगे बढ़ाने में चंचल, हर्षा साहू और विधि साहू के माध्यम से प्रशिक्षण संबंधी गतिविधियों को दिशा दी जाएगी।
हर बेटी में विकसित हो साहस और आत्मविश्वास
संजय अग्रवाल ने कहा कि हमारा प्रयास है कि छत्तीसगढ़ के किसी भी गांव, कस्बे या दूरस्थ अंचल में रहने वाली बेटी आत्मरक्षा के प्रशिक्षण से वंचित न रहे। विशेषकर आदिवासी अंचलों और ग्रामीण क्षेत्रों की बच्चियों तक यह पहल पहुंचे, ताकि वे बचपन से ही आत्मविश्वास, अनुशासन और साहस के साथ आगे बढ़ सकें। उन्होंने कहा कि आत्मरक्षा का प्रशिक्षण केवल शारीरिक ताकत बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति के भीतर निर्णय लेने की क्षमता, मानसिक मजबूती, अनुशासन और आत्मविश्वास भी विकसित करता है। जब बेटियां स्वयं को सक्षम महसूस करेंगी, तभी वे बिना भय के शिक्षा, खेल, रोजगार और जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में आगे बढ़ सकेंगी।
योग के साथ आत्मबल और आत्मरक्षा को भी मिलेगा प्रोत्साहन
उन्होंने कहा कि योग केवल शरीर को स्वस्थ रखने या मानसिक शांति प्राप्त करने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति के भीतर आत्मबल, सकारात्मकता और आत्मविश्वास विकसित करने की शक्ति भी रखता है। योग आयोग का प्रयास है कि योग और शारीरिक प्रशिक्षण के माध्यम से समाज में स्वस्थ, जागरूक और सशक्त पीढ़ी का निर्माण हो। बेटियों को आत्मरक्षा के कौशल से जोड़ना इसी व्यापक सोच का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
इस अवसर पर रावतपुरा यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने भी इस पहल की सराहना करते हुए छत्तीसगढ़ योग आयोग के साथ मिलकर इस दिशा में बेहतर कार्य करने और आवश्यक सहयोग प्रदान करने की बात कही। संजय अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ की हर बेटी को ऐसा आत्मविश्वास मिलना चाहिए कि वह किसी भी परिस्थिति में खुद को कमजोर न समझे। हमारा संकल्प है कि बस्तर के सुदूर गांवों से लेकर प्रदेश के प्रत्येक कोने तक बेटियों को आत्मरक्षा के कौशल से जोड़कर उन्हें निर्भीक, सक्षम और आत्मनिर्भर बनाया जाए, ताकि वे पूरे आत्मविश्वास के साथ अपने सपनों की उड़ान भर सकें |





