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सुकमा के गोंडिगुड़ा में नया मोबाइल टॉवर शुरू, 4 हजार से अधिक ग्रामीणों को मिलेगा नेटवर्क का लाभ

By Mohan Rao Published August 24, 2026
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मुख्यमंत्री साय की संवेदनशील पहल और वन मंत्री कश्यप के निर्देशों से वनांचल में पहुंच रही डिजिटल सुविधा

सुकमा। जिले के दूरस्थ वनांचलों में अब विकास की नई तस्वीर दिखाई दे रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की संवेदनशील पहल और वन एवं जिले के प्रभारी मंत्री केदार कश्यप के निर्देशानुसार ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल कनेक्टिविटी को मजबूत करने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसी का परिणाम है कि गोंडिगुड़ा जैसे दूरस्थ गांव में अब मोबाइल नेटवर्क की सुविधा उपलब्ध हो गई है।

गोंडिगुड़ा सहित सुन्नापेंटा, दूंगाबाबू और टेटरई जैसे अंदरूनी गांवों में मोबाइल नेटवर्क बहाल होने से 4 हजार से अधिक ग्रामीणों को लाभ मिलेगा। वर्षों से मोबाइल नेटवर्क के अभाव में ग्रामीणों को जरूरी फोन करने के लिए दूर जाना पड़ता था। अब वे गांव में ही अपने परिवार और परिचितों से आसानी से संपर्क कर सकेंगे।

मोबाइल नेटवर्क से आसान हुआ रोजमर्रा का जीवन

मोबाइल कनेक्टिविटी मिलने से ग्रामीणों को केवल फोन करने की सुविधा ही नहीं मिली है, बल्कि उनके लिए शिक्षा, रोजगार और सरकारी सेवाओं के नए रास्ते भी खुले हैं। विद्यार्थी अब ऑनलाइन कक्षाओं और डिजिटल अध्ययन सामग्री का लाभ ले सकेंगे। ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं और जनकल्याणकारी सेवाओं की जानकारी भी समय पर मिल सकेगी। डिजिटल बैंकिंग और डीबीटी के माध्यम से मिलने वाली सहायता राशि से जुड़ी सेवाओं तक पहुंच भी आसान होगी। आपात स्थिति में स्वास्थ्य विभाग, एंबुलेंस और प्रशासन से संपर्क करना भी अब पहले की तुलना में आसान हो गया है। मोबाइल इंटरनेट की सुविधा से गांव के युवा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए ऑनलाइन अध्ययन कर सकेंगे। वहीं स्थानीय वनोपज, हस्तशिल्प और अन्य उत्पादों से जुड़े ग्रामीण डिजिटल माध्यमों के जरिए अपने उत्पादों को बड़े बाजार तक पहुंचाने के नए अवसर तलाश सकेंगे।

4G सैचुरेशन परियोजना से मजबूत हो रही कनेक्टिविटी

ई-डिस्ट्रिक्ट मैनेजर मो. शाहिद ने बताया कि बीएसएनएल की 4G सैचुरेशन परियोजना के तहत बस्तर संभाग के 195 दुर्गम स्थानों पर नए मोबाइल टॉवर सक्रिय किए गए हैं। इससे वनांचल के ग्रामीण क्षेत्रों में तेज इंटरनेट और बेहतर कॉलिंग की सुविधा उपलब्ध हो रही है। सुकमा के इन दूरस्थ गांवों में मोबाइल की बजती घंटी अब केवल संपर्क का माध्यम नहीं है, बल्कि यह बेहतर शिक्षा, रोजगार, सरकारी सेवाओं और सुरक्षा से जुड़ने का नया माध्यम बन रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की संवेदनशील पहल और वन एवं जिले के प्रभारी मंत्री केदार कश्यप के निर्देशानुसार किए जा रहे प्रयासों से विकास की यह सुविधा अब वनांचल के अंतिम छोर तक पहुंच रही है।

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