ShreeKanchanpathShreeKanchanpathShreeKanchanpath
  • होम
  • छत्तीसगढ़
    • रायपुर
    • दुर्ग-भिलाई
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • व्यापार
  • स्पोर्ट्स
  • मनोरंजन
  • हेल्थ
  • E-Paper
Reading: अबूझमाड़ की पारंपरिक स्वास्थ्य और भोजन परंपरा पर विदेशों से भी हो रहा शोध
Share
Notification Show More
Font ResizerAa
ShreeKanchanpathShreeKanchanpath
Font ResizerAa
  • होम
  • छत्तीसगढ़
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • व्यापार
  • स्पोर्ट्स
  • मनोरंजन
  • हेल्थ
  • E-Paper
Search
  • होम
  • छत्तीसगढ़
    • रायपुर
    • दुर्ग-भिलाई
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • व्यापार
  • स्पोर्ट्स
  • मनोरंजन
  • हेल्थ
  • E-Paper
Follow US
© Copyright ShreeKanchanpath 2022 | All Rights Reserved | Made in India by Anurag Tiwari
Breaking NewsCG GovermentChhattisgarhFeaturedRaipur

अबूझमाड़ की पारंपरिक स्वास्थ्य और भोजन परंपरा पर विदेशों से भी हो रहा शोध

By Poonam Patel
Published: August 17, 2026
Share
वैद्य सम्मेलन में पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण और वनौषधियों के संवर्धन पर जोर
वैद्य सम्मेलन में पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण और वनौषधियों के संवर्धन पर जोर
SHARE

रायपुर। छत्तीसगढ़ में पारंपरिक स्वास्थ्य परंपरा और वनौषधीय ज्ञान को संरक्षित करने के लिए छत्तीसगढ़ आदिवासी स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है। यह संस्था स्थानीय वैद्यों के प्रमाणीकरण, जड़ी-बूटियों के वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण और सतत कटाई को बढ़ावा देती है।

औषधि पादप बोर्ड द्वारा स्वास्थ्य परंपरा वैद्यों को प्रोत्साहन

छत्तीसगढ़ की समृद्ध पारंपरिक स्वास्थ्य परंपरा और वनौषधीय ज्ञान को संरक्षित करने के लिए राज्य सरकार लगातार प्रयास कर रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की संवेदनशील पहल और वन मंत्री केदार कश्यप के निर्देशानुसार छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड द्वारा वैद्यों को प्रोत्साहित करने के साथ उनके पारंपरिक ज्ञान को संरक्षित और आगे बढ़ाने का कार्य किया जा रहा है। इसी क्रम में विगत 14 अगस्त को नारायणपुर वनमंडल कार्यालय सभागार में जिला स्तरीय वैद्य सम्मेलन आयोजित किया गया।

वैद्यों ने साझा किया पारंपरिक उपचार का ज्ञान

बोर्ड के अध्यक्ष विकास मरकाम ने दीप प्रज्ज्वलित कर सम्मेलन का शुभारंभ किया। वनमंडल अधिकारी वेंकटेश एम. जी. ने पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका स्वागत किया। सम्मेलन में वैद्य रतन रंजन धर, कज्जाराम गोटा, रूपसिंह, सुखदेव, सोमनाथ, फूलसिंह, अमृतलाल और हरिचंद सहित अन्य वैद्यों ने पारंपरिक जड़ी-बूटियों और उपचार पद्धतियों से जुड़े अपने अनुभव साझा किए। वैद्यों ने नारायणपुर में वनौषधियों के संरक्षण और लोगों में जागरूकता बढ़ाने के लिए हर्बल गार्डन विकसित करने की मांग रखी।

वैद्यों के लिए कई योजनाएं संचालित

बोर्ड के कंसल्टेंट अमित गुप्ता ने वैद्यों के हित में संचालित योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आर्थिक रूप से कमजोर वैद्य समूहों को जड़ी-बूटियों को उच्च गुणवत्ता के साथ पीसने के लिए निःशुल्क पल्वराइजर मशीन उपलब्ध कराई जा रही है। हीलर हर्बल गार्डन योजना के तहत वैद्य अपनी बाड़ी में सामान्य रूप से उपयोग होने वाली वनौषधियों का छोटा उद्यान विकसित कर सकते हैं। इसके लिए बोर्ड आर्थिक और तकनीकी सहयोग प्रदान करता है।

वैद्यों की पारंपरिक उपचार पद्धतियों के प्रमाणीकरण

वैद्यों के गांव में संचालित स्कूलों में स्कूल हर्बल गार्डन विकसित करने और उसके रखरखाव के लिए भी तकनीकी एवं आर्थिक सहायता दी जा रही है। इसके अलावा वैद्यों की पारंपरिक उपचार पद्धतियों के प्रमाणीकरण की प्रक्रिया फब्प् के माध्यम से संचालित की जा रही है, जिससे पारंपरिक चिकित्सा ज्ञान को व्यवस्थित रूप से संरक्षित और प्रमाणित करने में मदद मिलेगी।

3 हजार हेक्टेयर में वनौषधियों का रोपण

वनमंडल अधिकारी वेंकटेश एम. जी. ने सम्मेलन के आयोजन के लिए बोर्ड का आभार व्यक्त किया। उन्होंने वैद्यों की मांग पर नारायणपुर में हर्बल गार्डन विकसित करने का आश्वासन दिया। उन्होंने बताया कि नारायणपुर वनमंडल में वनौषधियों के संरक्षण और संवर्धन के लिए लगभग 3 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में रोपण किया जा रहा है। वनौषधियों की रिपॉजिटरी तैयार करने के साथ वैद्यों के पारंपरिक ज्ञान का दस्तावेजीकरण भी किया जाएगा।

दुर्लभ वनौषधियों के संरक्षण में वैद्यों की महत्वपूर्ण भूमिका

बोर्ड अध्यक्ष विकास मरकाम ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और वन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में वैद्यों के उत्थान और पारंपरिक स्वास्थ्य ज्ञान के संरक्षण के लिए निरंतर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने वैद्यों से वनौषधियों के संरक्षण और संवर्धन में सक्रिय सहयोग का आह्वान किया। उन्होंने बताया कि रसना जड़ी, जो विलुप्ति की कगार पर है, नारायणपुर के छोटे डोंगर और बेनूर क्षेत्र के जंगलों में पाई जाती है। इसी तरह लगभग विलुप्तप्राय दहीमन भी नारायणपुर के जंगलों में उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि ऐसी दुर्लभ वनौषधियों का संरक्षण सरकार और वैद्यों की साझा जिम्मेदारी है। बोर्ड द्वारा विलुप्तप्राय 50 दुर्लभ वनौषधियों की पहचान कर उनके संरक्षण और संवर्धन का कार्य किया जा रहा है।

अबूझमाड़ की परंपरा पर विदेशों से भी हो रहा शोध

मरकाम ने कहा कि आज अबूझमाड़ की पारंपरिक स्वास्थ्य और भोजन परंपरा पर शोध करने के लिए विदेशों से भी अनुसंधानकर्ता आ रहे हैं। यह छत्तीसगढ़ की समृद्ध पारंपरिक ज्ञान परंपरा की वैश्विक पहचान को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि इस पारंपरिक ज्ञान और वनौषधीय विरासत को सहेजने की बड़ी जिम्मेदारी स्थानीय वैद्यों की भी है।

वैद्यों की समस्याओं के समाधान के निर्देश

सम्मेलन में विकास मरकाम ने वैद्यों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं। उन्होंने छोटी-छोटी समस्याओं का स्थानीय स्तर पर समाधान सुनिश्चित करने के लिए वनमंडल अधिकारी वेंकटेश एम. जी. को आवश्यक निर्देश दिए। कार्यक्रम के अंत में बोर्ड अध्यक्ष विकास मरकाम ने सम्मेलन में शामिल सभी वैद्यों को सहभागिता प्रमाण-पत्र प्रदान किए।

नारायणपुर जिले के 25 वैद्यों सहित लगभग 60 से 70 प्रतिभागियों ने लिया हिस्सा

सम्मेलन में नारायणपुर जिले के 25 वैद्यों सहित लगभग 60 से 70 प्रतिभागियों ने हिस्सा । इस अवसर पर उपवनमंडल अधिकारी हीरे सिंह उइके, प्रीति यादव, राजेश कश्यप, परिक्षेत्र अधिकारी इंद्र कुमार यादव, भोगनाथ नायक, वर्षा कश्यप, भूषण सिंह ठाकुर सहित नारायणपुर वनमंडल एवं बोर्ड के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।

Asia Cup 2023 : रोमांचक मैच में श्रीलंका ने पाकिस्तान को दो विकेट से हराया, 17 को भारत से होगा फाइनल
अच्छी पहल: इस अस्पताल में स्टॉफ के बच्चों के लिए संचालित होगा झूलाघर… प्लेइंग जोन भी बनाया जाएगा
छत्तीसगढ़ में घरेलू एलपीजी गैस एवं डीजल-पेट्रोल का पर्याप्त स्टॉक, आपूर्ति व्यवस्था पर सतत निगरानी के निर्देश
कोरोना अलर्ट: सऊदी अरब ने भारत-अमेरिका सहित 20 देशों से आने वाली उड़ानों पर लगाया प्रतिबंध
नवरात्रि स्पेशल: आज होती है मां कात्यायनी की पूजा, मनचाहे वर की कामना पूरी करती है मां, इसलिए है ब्रज की अधिष्ठात्री देवी
Share This Article
Facebook Whatsapp Whatsapp Copy Link
Share
Previous Article महासमुंद के वैद्य फूड में पुलिस व खाद्य विभाग की दबिश, 200 किलो एनालॉग पनीर जब्त
Next Article दुर्ग में पुलिस की राडार पर ऑटो व ई-रिक्शा, क्यूआर से कवर होंगे सभी… जानिए इसके फायदे

Ro.No.-13954/19

× Popup Image

[youtube-feed feed=1]


Advertisement

Advertisement


Logo

छत्तीसगढ़ प्रदेश का एक विश्वसनीय न्यूज पोर्टल है, जिसकी स्थापना देश एवं प्रदेश के प्रमुख विषयों और खबरों को सही तथ्यों के साथ आमजनों तक पहुंचाने के उद्देश्य से की गई है। इसके साथ ही हम महत्वपूर्ण खबरों को अपने पाठकों तक सबसे पहले पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

क्विक लिंक्स

  • होम
  • E-Paper
  • Crime
  • Durg-Bhilai
  • Education

Follow Us

हमारे बारे में

एडिटर : राजेश अग्रवाल
पता : शॉप नं.-12, आकाशगंगा, सुपेला, भिलाई, दुर्ग, छत्तीसगढ़ – 490023
मोबाइल : 9303289950
ई-मेल : shreekanchanpath2010@gmail.com

© Copyright ShreeKanchanpath 2022 | All Rights Reserved | Made in India by Anurag Tiwari
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?