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अमृत 2.0 “कैच द रेन” अभियान के तहत शहरी जल संरक्षण में राष्ट्रीय मॉडल बनकर उभरा कोरबा

By Mohan Rao Published July 23, 2026
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इसरो मैपिंग, शैलो एक्विफर मैनेजमेंट और एनटीपीसी के साथ 111 करोड़ की ऐतिहासिक अपशिष्ट जल साझेदारी से छत्तीसगढ़ के औद्योगिक हब में भूजल का ऐतिहासिक पुनरुद्धार

कोरबा। आवास और शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA) की प्रमुख पहल “कैच द रेन – वेयर इट फॉल्स, व्हेन इट फॉल्स” (अमृत 2.0) के तहत जल संरक्षण, भूजल पुनर्भरण और जल निकायों के कायाकल्प में छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले ने एक विशिष्ट राष्ट्रीय पहचान बनाई है। हसदेव नदी के तट पर स्थित होने और अपने कोयला खनन व थर्मल पावर इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए पूरे देश में प्रसिद्ध होने के बावजूद, कोरबा ऐतिहासिक रूप से शुष्क मौसम के दौरान गंभीर मौसमी जल संकट से जूझता रहा है। इन चुनौतियों को पहचानते हुए, छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में आवास और शहरी कार्य मंत्रालय की इस फ्लैगशिप पहल (अमृत 2.0) को लागू किया गया।

कोरबा की सफलता का मुख्य आधार उच्च-सटीकता वाले भू-स्थानिक विज्ञान (Geospatial Science) पर इसकी निर्भरता है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र (NRSC) ने 10 ऐसे अति-संवेदनशील स्थलों की पहचान करने के लिए व्यापक फील्ड अध्ययन और सैटेलाइट मैपिंग की, जहाँ जल स्तर काफी नीचे चला गया था और बारिश के मौसम में पानी नालियों से बहकर व्यर्थ ही नदी में चला जाता था। भूजल स्तर को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से, मैपिंग के बाद इन 10 स्थानों को विशेष रूप से डिजाइन की गई शैलो एक्विफर मैनेजमेंट (SAM) प्रणालियों से लैस किया गया, जिसमें दो महत्वपूर्ण घटक शामिल हैं:

मल्टी-स्टेज डिसिल्टेशन यूनिट्स: इसमें लगे बजरी और रेत के क्षैतिज फिल्टर सतही बहाव के पानी को रोककर भारी गाद, मलबे और शहरी प्रदूषकों को भूजल में प्रवेश करने से पहले ही छान लेते हैं। डायरेक्ट इंजेक्शन रीचार्ज वेल्स: उच्च क्षमता वाले ये रीचार्ज शाफ्ट साफ और छने हुए वर्षा जल को सीधे भूमिगत जलभृतों (Aquifers) तक पहुँचाते हैं, जिससे जल स्तर में सुधार होता है और उच्च घनत्व वाले शहरी क्षेत्रों में अचानक आने वाली बाढ़ (फ्लैश फ्लडिंग) को रोका जा सकता है।

अभियान पर टिप्पणी करते हुए जिला कलेक्टर  कुणाल दुदावत ने कहा, “कैच द रेन अभियान और ‘जल संचय – जन भागीदारी’ मिशन के तहत पूरे जिले में जल संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। हमने इस वर्ष 20,000 जल संरक्षण संरचनाएं तैयार करने का लक्ष्य रखा है, और इस पर युद्ध स्तर पर कार्य जारी है। सभी सरकारी और निजी परिसरों में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग को अनिवार्य कर दिया गया है। VB-G-RaM-G और स्वच्छ भारत मिशन जैसी प्रमुख फ्लैगशिप योजनाओं का अभिसरण करके, हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि हमारे भूजल और कृषि भविष्य को सुरक्षित करने के लिए वर्षा जल की हर एक बूंद को सहेजा जाए।”

“इन 10 शैलो एक्विफर मैनेजमेंट (SAM) संरचनाओं की स्थापना से कोरबा के भूजल स्तर पर तत्काल और उल्लेखनीय प्रभाव पड़ा है। जहाँ पहले जल स्तर में नाटकीय गिरावट आई थी और पानी केवल 600 मीटर की गहराई पर उपलब्ध था, वहीं आवास और शहरी कार्य मंत्रालय के ‘कैच द रेन’ (अमृत 2.0) पहल के तहत SAM के आने से भूजल स्तर में भारी उछाल आया है। प्रमुख क्षेत्रों में भूजल अब केवल 150 मीटर की गहराई पर सुलभ है—जो शहरी जल सुरक्षा में एक क्रांतिकारी बदलाव है।” नगर निगम कोरबा के आयुक्त श्री आशुतोष पांडेय ने यह जानकारी दी।

शुरुआती SAM संरचनाओं की तत्काल सफलता को देखते हुए, कोरबा नगर निगम ने एक आक्रामक विस्तार योजना शुरू की है। छत वर्षा जल संचयन (रूफटॉप रेन वॉटर हार्वेस्टिंग): सार्वजनिक, सरकारी और सामुदायिक भवनों में 109 रेन वॉटर हार्वेस्टिंग प्लांट बनाने का काम तेजी से चल रहा है। बंद पड़े बोरवेलों का पुनरुद्धार: नगर निगम शहर भर में 95 छोड़े गए और बंद पड़े बोरवेलों को पुनर्जीवित करने के लिए SAM तंत्र का विस्तार कर रहा है, जिससे शहरी दायित्वों को सक्रिय रीचार्ज शाफ्ट में बदला जा रहा है। भूजल पुनर्भरण के अलावा, कोरबा शहर से गुजरने वाले 11 अत्यधिक प्रदूषित नालों के समग्र उपचार के माध्यम से हसदेव नदी के पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा के लिए एक टिकाऊ सर्कुलर इकोनॉमी मॉडल पेश कर रहा है।

एनटीपीसी से 111 करोड़ की फंडिंग से नगर निगम द्वितीयक (सेकेंडरी) और तृतीयक (टर्शियरी) अपशिष्ट जल उपचार सुविधाओं को लागू कर रहा है, जिसके 2027 तक पूरा होने की संभावना है। एक बार चालू होने के बाद, उपचारित उच्च गुणवत्ता वाले पुनर्चक्रित जल को औद्योगिक प्रसंस्करण और कूलिंग के लिए 7.50 रुपए प्रति लीटर की दर से एनटीपीसी को वापस बेचा जाएगा—जिससे स्थानीय नदियों से ताजे पानी की खपत समाप्त होगी और शहर के लिए एक स्थायी राजस्व उत्पन्न होगा।

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