भिलाई। खुर्सीपार पुलिस एवं एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए ऑनलाइन जुआ-सट्टा संचालन हेतु उपयोग किए जा रहे म्युल अकाउंट नेटवर्क का भंडाफोड़ किया गया। गरीब एवं आर्थिक रूप से कमजोर व्यक्तियों को लालच देकर उनके नाम से बैंक खाते खुलवाकर अवैध वित्तीय लेन-देन एवं ऑनलाइन सट्टा संचालन किया जा रहा था। आरोपियों के कब्जे से 81 एटीएम कार्ड, 62 बैंक पासबुक, 05 चेकबुक, 13 मोबाइल फोन, 11 सिम कार्ड, लैपटॉप एवं हार्ड डिस्क जप्त कर लगभग 2.50 लाख रुपये की सामग्री बरामद की गई।
दुर्ग पुलिस द्वारा जिले में जुआ, सट्टा, साइबर अपराध एवं अवैध वित्तीय गतिविधियों के विरुद्ध लगातार अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में 21 जून 2026 को थाना खुर्सीपार में पदस्थ सहायक उप निरीक्षक तुलसी बिझेकर को विश्वसनीय मुखबिर से सूचना प्राप्त हुई कि आईटीआई खेल मैदान खुर्सीपार स्थित बिजली पोल के पास तीन युवक लैपटॉप एवं मोबाइल फोन के माध्यम से ऑनलाइन जुआ-सट्टा का संचालन कर रहे हैं तथा उनके पास भारी मात्रा में बैंक पासबुक, एटीएम कार्ड एवं अन्य बैंकिंग दस्तावेज मौजूद हैं।
सूचना की गंभीरता को देखते हुए थाना प्रभारी खुर्सीपार को अवगत कराया गया, जिसके पश्चात तत्काल पुलिस टीम गठित कर स्वतंत्र गवाहों को साथ लेकर मौके पर दबिश दी गई। पुलिस टीम के पहुंचने पर संदिग्ध व्यक्तियों ने भागने का प्रयास किया, जिन्हें घेराबंदी कर पकड़ा गया। मौके पर आरोपियों से पूछताछ करने पर उनके कब्जे से विभिन्न बैंकों की पासबुक, एटीएम कार्ड, चेकबुक, मोबाइल फोन, सिम कार्ड, लैपटॉप एवं हार्ड डिस्क बरामद किए गए। पकड़े गए आरोपियों में अजय मिश्रा (23) वर्ष, निवासी सेक्टर-01, भिलाई, दीपक कुमार, (32) निवासी ग्राम नगदोई, जिला नालंदा, बिहार तथा करण कुमार सिंह (26) निवासी बालाजी नगर, खुर्सीपार, भिलाई शामिल हैं।

पूछताछ के दौरान आरोपियों द्वारा ऑनलाइन जुआ-सट्टा संचालन एवं अवैध वित्तीय लेन-देन में संलिप्त होना स्वीकार किया गया। जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी ऑनलाइन सट्टा संचालन के लिए “अन्ना रेड्डी” ऑनलाइन बेटिंग एप्लीकेशन का उपयोग करते थे। आईपीएल सीजन के दौरान आरोपियों द्वारा रांची (झारखंड) में रहकर ऑनलाइन सट्टा संचालन एवं उससे संबंधित वित्तीय गतिविधियों का संचालन किया जाना प्रारंभिक जांच में पाया गया है। मौके पर बरामद सामग्री का पंचनामा तैयार किया गया। जप्त सामग्री पर वैधानिक कार्यवाही पूर्ण कर आरोपियों एवं सामग्री को थाना लाया गया, जहां विधिवत जप्ती एवं अन्य कानूनी कार्यवाही की गई।
प्रकरण में आरोपियों के विरुद्ध थाना खुर्सीपार में अपराध क्रमांक 236/2026 धारा 318(2), 318(3), 318(4), 319 भारतीय न्याय संहिता (BNS) तथा छत्तीसगढ़ जुआ (प्रतिषेध) अधिनियम 2022 की धारा 5, 6 एवं 7 के अंतर्गत अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया है। गिरफ्तार आरोपियों को न्यायालय में प्रस्तुत कर न्यायिक रिमांड पर भेजा गया है। विवेचना के दौरान यह तथ्य सामने आया कि आरोपी आर्थिक रूप से कमजोर एवं जरूरतमंद व्यक्तियों को पैसों का प्रलोभन देकर उनके नाम से विभिन्न बैंकों में खाते खुलवाते थे। खाता खुलने के पश्चात संबंधित व्यक्तियों से पासबुक, एटीएम कार्ड, चेकबुक एवं मोबाइल सिम अपने कब्जे में रख लेते थे। साइबर अपराध एवं अवैध वित्तीय लेन-देन में ऐसे खातों को सामान्यतः “म्युल अकाउंट” कहा जाता है।
आरोपी इन खातों का उपयोग “अन्ना रेड्डी” ऑनलाइन बेटिंग एप्लीकेशन के माध्यम से संचालित ऑनलाइन जुआ-सट्टा से प्राप्त धनराशि को विभिन्न खातों में ट्रांसफर करने, अवैध लेन-देन को छिपाने तथा रकम की निकासी करने के लिए करते थे। इसके लिए अलग-अलग मोबाइल नंबर, सिम कार्ड, बैंक खाते एवं डिजिटल उपकरणों का उपयोग किया जाता था ताकि वास्तविक वित्तीय प्रवाह एवं संचालकों की पहचान छिपाई जा सके। प्रारंभिक जांच में यह भी ज्ञात हुआ है कि आईपीएल सीजन के दौरान आरोपियों द्वारा रांची (झारखंड) से नेटवर्क संचालित किया गया था तथा विभिन्न व्यक्तियों के बैंक खातों का उपयोग ऑनलाइन सट्टे से प्राप्त धनराशि के लेन-देन के लिए किया जा रहा था। बरामद डिजिटल उपकरणों, बैंक खातों एवं वित्तीय ट्रांजेक्शनों का तकनीकी एवं वित्तीय विश्लेषण जारी है।
उक्त कार्यवाही में थाना खुर्सीपार पुलिस एवं एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट की सराहनीय भूमिका रही। विशेष रूप से सउनि तुलसी बिझेकर, प्रधान आरक्षक बल्लूराम सपहा, पेट्रोलिंग स्टाफ एवं साइबर टीम के अधिकारियों/कर्मचारियों द्वारा सूचना संकलन, तकनीकी विश्लेषण, घेराबंदी एवं त्वरित कार्रवाई कर आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। दुर्ग पुलिस आम नागरिकों से अपील करती है कि किसी भी व्यक्ति को अपने बैंक खाते, एटीएम कार्ड, पासबुक, चेकबुक, मोबाइल सिम अथवा बैंकिंग दस्तावेज उपयोग हेतु उपलब्ध न कराएं। ऐसे दस्तावेज साइबर अपराध, ऑनलाइन जुआ-सट्टा, वित्तीय धोखाधड़ी एवं मनी लॉन्ड्रिंग जैसी गतिविधियों में प्रयुक्त हो सकते हैं। किसी भी संदिग्ध वित्तीय गतिविधि अथवा साइबर अपराध की सूचना तत्काल निकटतम पुलिस थाना अथवा साइबर हेल्पलाइन 1930 पर दें।




