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शहीद गैंदसिंह की श्रद्धांजलि सभा में शामिल हुए सीएम साय, बोले- छत्तीसगढ़ की धरती जनजातीय शौर्य और बलिदान की साक्षी

By Mohan Rao Published January 22, 2026
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शहीद गैंदसिंह के नाम पर चौक, मूर्ति स्थापना और सामाजिक केंद्रों की घोषणा

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय बुधवार को अखिल भारतीय हल्बा-हल्बी आदिवासी समाज के तत्वावधान में साइंस कॉलेज ग्राउंड रायपुर में आयोजित शहीद शिरोमणि गैंदसिंह के 201वें शहादत दिवस एवं श्रद्धांजलि सभा कार्यक्रम में शामिल हुए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने महान जनजातीय नायक एवं स्वतंत्रता संग्राम के अग्रदूत शहीद गैंदसिंह का पुण्य स्मरण करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री साय ने शहीद गैंदसिंह के सम्मान में नया रायपुर में चौक के नामकरण एवं मूर्ति स्थापना, चंगोराभाटा स्थित समाज के सामुदायिक भवन के जीर्णोद्धार, तथा बालोद जिले के देवरी, कांकेर जिले के मरकाटोला, दानीटोला, नगरी, डोंगरगांव एवं बस्तर जिले के भानपुरी तथा करूटोला में हल्बा समाज के सामाजिक केंद्रों के निर्माण हेतु प्रत्येक स्थान के लिए 10-10 लाख रुपये प्रदान किए जाने की घोषणा की। इसके साथ ही ग्राम कितूर में रंगमंच निर्माण तथा चपका बस्तर में श्रीराम मंदिर के जीर्णोद्धार की भी घोषणा मुख्यमंत्री द्वारा की गई।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि जनजातीय समाज का इतिहास अत्यंत गौरवशाली और समृद्ध रहा है। उन्होंने कहा कि देश में स्वतंत्रता संग्राम की शुरुआत भले ही वर्ष 1857 से मानी जाती है, किंतु उससे बहुत पहले ही छत्तीसगढ़ की धरती पर जनजातीय क्रांतियों की गूंज सुनाई देने लगी थी। महान क्रांतिकारी शहीद गैंदसिंह अंग्रेजी हुकूमत से संघर्ष करते हुए वर्ष 1825 में शहीद हुए, और उस कालखंड में भी आदिवासी समाज ने आजादी की लड़ाई में अग्रणी भूमिका निभाई।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में एक-दो नहीं बल्कि कुल 14 जनजातीय क्रांतियां हुईं, जिन्होंने अंग्रेजों की सत्ता की नींव हिला दी। यह धरती शहीद वीर नारायण सिंह, शहीद गैंदसिंह और वीर गुण्डाधुर जैसे महान जननायकों की भूमि रही है। उन्होंने कहा कि दुर्भाग्यवश इन वीरों और जनजातीय नायकों को लंबे समय तक इतिहास के पन्नों में उचित स्थान नहीं मिला। देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने जनजातीय नायकों के योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान दिलाने का कार्य किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में हुई 14 जनजातीय क्रांतियों पर आधारित ट्राइबल म्यूजियम नया रायपुर में निर्मित किया गया है, जिसका लोकार्पण स्वयं प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा किया गया। इस संग्रहालय में इन सभी क्रांतियों का सचित्र विवरण एवं गहन जानकारी प्रस्तुत की गई है। उन्होंने नागरिकों से आग्रह किया कि सभी लोग इस म्यूजियम का अवश्य अवलोकन करें, ताकि छत्तीसगढ़ की बलिदानी धरती में जनजातीय नायकों के योगदान को भली-भांति समझा जा सके।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आज देश के सर्वोच्च पद पर जनजातीय समाज की बेटी राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू आसीन हैं और छत्तीसगढ़ प्रदेश का नेतृत्व भी जनजातीय समाज के बेटे के हाथों में है। उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी ने जनजातीय समाज के सर्वांगीण विकास के लिए ऐतिहासिक निर्णय लिए। उनके नेतृत्व में जनजातीय कार्य मंत्रालय का गठन किया गया, जो आज हजारों करोड़ रुपये के बजट के साथ जनजातीय समाज के विकास को नई दिशा दे रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा की जयंती 15 नवंबर को ‘जनजातीय गौरव दिवस’ के रूप में मनाने का निर्णय ऐतिहासिक है। धरती आबा ग्राम उत्कर्ष योजना एवं प्रधानमंत्री जनमन योजना के माध्यम से जनजातीय समाज के कल्याण की नई इबारत लिखी जा रही है। जनजातीय बहुल क्षेत्रों में सड़क, बिजली, पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने का कार्य राज्य सरकार द्वारा प्राथमिकता से किया जा रहा है। इन योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान भी प्राप्त हुआ है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि हमारे पुरखों ने शिक्षा को विकास का मूलमंत्र बताया है। शिक्षा के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ ने उल्लेखनीय प्रगति की है और आज प्रदेश में आईआईएम, आईआईटी और एम्स जैसे राष्ट्रीय स्तर के संस्थान संचालित हो रहे हैं। उन्होंने समाज के प्रबुद्धजनों से शिक्षा को बढ़ावा देने, शासन की योजनाओं की जानकारी समाज तक पहुंचाने तथा युवाओं को अपने अधिकारों और लक्ष्यों के प्रति जागरूक करने का आग्रह किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर अंचल में नक्सलवाद लंबे समय तक विकास में सबसे बड़ी बाधा रहा है, किंतु डबल इंजन सरकार के संकल्प और हमारे सुरक्षा बलों के अदम्य साहस से इस बाधा को दूर किया जा रहा है। वर्षों से विकास से वंचित इस अंचल में अब विकास की नई धारा प्रवाहित हो रही है।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री श्री टंकराम वर्मा ने कहा कि शहीद गैंदसिंह छत्तीसगढ़ के पहले वीर शहीद जननायक थे, जिन्होंने वर्ष 1824-25 में अंग्रेजी हुकूमत के विरुद्ध संघर्ष का बिगुल फूंका। उन्होंने अंग्रेजों द्वारा संसाधनों की लूट और आदिवासियों के शोषण के खिलाफ साहसिक संघर्ष किया। उन्होंने कहा कि देश के स्वतंत्रता संग्राम में छत्तीसगढ़ के जनजातीय नायकों का योगदान अतुलनीय रहा है। कार्यक्रम में अखिल भारतीय हल्बा-हल्बी आदिवासी समाज के केंद्रीय अध्यक्ष डॉ. देवेंद्र माहला, महामंत्री गिरवर सिंह ठाकुर, महेश गागड़ा सहित समाज के अनेक गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

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