ShreeKanchanpathShreeKanchanpath
  • होम
  • छत्तीसगढ़
    • रायपुर
    • दुर्ग-भिलाई
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • व्यापार
  • स्पोर्ट्स
  • मनोरंजन
  • हेल्थ
  • E-Paper
Reading: छत्तीसगढ़ की जनजातियों पर शोध और अनुसंधान की राह खुली, GGCU व TRKC के बीच हुआ एमओयू
Share
Notification Show More
Latest News
जूडो सिखाता है साहस, आत्मसंयम और अनुशासन का पाठ: राज्यपाल डेका
October 9, 2026
अतिक्रमण के खिलाफ एनएचएआई की सख्त कार्रवाई, तेलीबांधा में अवैध एंट्री बंद
October 9, 2026
प्रमुख सचिव बोरा ने किया आईटीएमएस वार रूम का निरीक्षण, बेहतर प्रबंधन के लिए कार्ययोजना बनाने का निर्देश
October 9, 2026
राज्यसभा चुनाव : यूपी की10 सीटों पर बिना वोटिंग जीत, भाजपा के 8 और सपा के दो उम्मीदवार निर्वाचित
October 9, 2026
युवा शक्ति की सक्रिय भागीदारी से ही होगा विकसित छत्तीसगढ़ का निर्माण : मुख्यमंत्री साय
October 9, 2026
Aa
ShreeKanchanpathShreeKanchanpath
Aa
  • होम
  • छत्तीसगढ़
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • व्यापार
  • स्पोर्ट्स
  • मनोरंजन
  • हेल्थ
  • E-Paper
Search
  • होम
  • छत्तीसगढ़
    • रायपुर
    • दुर्ग-भिलाई
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • व्यापार
  • स्पोर्ट्स
  • मनोरंजन
  • हेल्थ
  • E-Paper
Follow US
© Copyright ShreeKanchanpath 2022 | All Rights Reserved | Made in India by Anurag Tiwari
Breaking NewsCG GovermentChhattisgarhEducationFeaturedRaipur

छत्तीसगढ़ की जनजातियों पर शोध और अनुसंधान की राह खुली, GGCU व TRKC के बीच हुआ एमओयू

By Mohan Rao Published August 20, 2025
Share
गुरू घासीदास केन्द्रीय विश्वविद्यालय और टी.आर.के.सी. के बीच हुआ एमओयू
SHARE

रायपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर और सरगुजा क्षेत्र में निवास करने वाली जनजातियों पर विशेष शोध और अनुसंधान की राह खुल गई है। राज्य की जनजातियों की गौरवशाली परंपरा, उनकी संस्कृति और उनके आर्थिक-समाजिक ताने-बाने को लेकर अब विद्यार्थी उच्च स्तरीय शोध कर पाएंगे। राज्य के गुरू घासीदास केन्द्रीय विश्वविद्यालय (GGCU) और ट्रायबल रिसर्च एण्ड नॉलेज सेंटर (TRKC) नई दिल्ली के बीच इसके लिए महत्वपूर्ण एमओयू हुआ है।

टीआरकेसी विभिन्न विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में भारतीय जनजातियों के बारे में शोध कार्याें के लिए महत्वपूर्ण संस्था है। विश्वविद्यालय के ओर से इस एमओयू पर कुलसचिव प्रो. अभय एस रणदिवे और टीआरकेसी की ओर से छतीसगढ़ प्रभारी राजीव शर्मा ने हस्ताक्षर किए। इस एमओयू के तहत् संस्था द्वारा अगले तीन वर्षों तक छत्तीसगढ़ में निवासरत जनजातियों पर शोध कार्य किए जाएंगे। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कूलपति प्रो. आलोक कुमार चक्रवाल, सौराष्ट्र विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. नीलांबरी दवे, वनवासी कल्याण आश्रम के अखिल भारतीय युवा कार्यप्रमुख श्री वैभव सुरंगे सहित अनेक प्राध्यापक, शोधार्थी, विद्यार्थी आदि मौजूद रहे।

जनजातीय विषयों पर शोध को बढ़ावा देने वाली महत्वपूर्ण संस्था
एमओयू के बारे में टीआरकेसी के राज्य प्रभारी राजीव शर्मा ने बताया कि टीआरकेसी देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में जनजातीय विषयों पर शोध कार्यों को बढ़ावा देने की महत्वपूर्ण संस्था है। गुरू घासीदास केन्द्रीय विश्वविद्यालय बिलासपुर से एमओयू के बाद छत्तीसगढ़ की विभिन्न जनजातीयों पर रिसर्च तेज होगी। उन्होंने बताया कि राज्य की पुरातन और गौरवशाली जनजातीय के कई अनछुए पहलुओं और उनकी सभ्यता और संस्कृति के बारे में इन शोधों से आम नागरिकों को भी महत्वपूर्ण जानकारियां मिलेंगी। इन शोध कार्यों से सरगुजा और बस्तर के क्षेत्रों की विभिन्न जनजातियों के आदिकालीन सामाजिक संगठन, उनके अर्थशास्त्र, सुशासन, ग्रामीण उद्यमिता, सतत् विकास और नवाचार के बारे में भी लोगों को जानकारियां मिलेंगी। श्री शर्मा ने बताया कि इससे खुद जनजातीय युवा अपने गौरवशाली अतीत और उसकी व्यवस्थाओं के बारे में जान पाएंगे।

जनजातीयों पर संयुक्त अनुसंधान परियोजनाएं शुरू होंगी
विश्वविद्यालय के कुलसचिव ने बताया कि संपादित एमओयू के बाद जनजातीयों पर संयुक्त अनुसंधान परियोजनाएं शुरू होंगी। क्षेत्राधारित केस स्टडी और युवाओं, प्रशासकों, जनजातीय हितधारकों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम, नेतृत्व विकास कार्यशालाएं और प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम भी आयोजित होंगे। युवाओं के लिए सामाजिक प्रभाव आधारित र्स्टाटअप और नवाचारों पर मार्गदर्शन तथा परामर्श सत्र रखे जाएंगे। विशेषज्ञों और प्राघ्यापकों की भागीदारी से जनजातीय वर्ग में जागरूकता अभियान भी चलाए जाएंगे। जनजातीय पर आधारित संगोष्ठीयों, व्याख्यानों, सम्मेलनों, गोलमेज चर्चाओं तथा सार्वजनिक संवादों का भी आयोजन होगा। उन्होंने बताया कि रिसर्च वर्क से मिले परिणामों को पुस्तकालयों, अनुसंधान प्रकाशनों तथा डेटाबेस के द्वारा विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों पर उपलब्ध कराया जाएगा। इससे राज्य के जनजातीय समुदाय के बारे में अधिक से अधिक जानकारी लोगों तक पहुंच सकेगी। स्वयं जनजातीय समुदायों को भी अपने गौरवशाली अतीत के बारे में पता चलेगा और भविष्य में यह रिसर्च वर्क जनजातीयों के विषयों को शैक्षणिक पाठ्यक्रमों में शामिल करने का जरिया बनेंगे।

You Might Also Like

जूडो सिखाता है साहस, आत्मसंयम और अनुशासन का पाठ: राज्यपाल डेका

अतिक्रमण के खिलाफ एनएचएआई की सख्त कार्रवाई, तेलीबांधा में अवैध एंट्री बंद

प्रमुख सचिव बोरा ने किया आईटीएमएस वार रूम का निरीक्षण, बेहतर प्रबंधन के लिए कार्ययोजना बनाने का निर्देश

राज्यसभा चुनाव : यूपी की10 सीटों पर बिना वोटिंग जीत, भाजपा के 8 और सपा के दो उम्मीदवार निर्वाचित

युवा शक्ति की सक्रिय भागीदारी से ही होगा विकसित छत्तीसगढ़ का निर्माण : मुख्यमंत्री साय

Mohan Rao August 20, 2025
Share this Article
Facebook Twitter Whatsapp Whatsapp Copy Link
Share
Previous Article Breaking News : नए मंत्रियों को मिले विभाग, गजेन्द्र को स्कूल शिक्षा तो गुरु खुशवंत को अनुसूचित जाति विकास… देखें सूची
Next Article संसद में पेश हुए तीन अहम बिल : प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या मंत्री 30 दिन जेल में रहे तो छोड़ना होगा पद, विपक्ष का हंगामा

Ro.No.-14097/18

× Popup Image

Ro. No.-14093/1

[youtube-feed feed=1]


Advertisement

Advertisement


Logo

छत्तीसगढ़ प्रदेश का एक विश्वसनीय न्यूज पोर्टल है, जिसकी स्थापना देश एवं प्रदेश के प्रमुख विषयों और खबरों को सही तथ्यों के साथ आमजनों तक पहुंचाने के उद्देश्य से की गई है। इसके साथ ही हम महत्वपूर्ण खबरों को अपने पाठकों तक सबसे पहले पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

क्विक लिंक्स

  • होम
  • E-Paper
  • Crime
  • Durg-Bhilai
  • Education

Follow Us

हमारे बारे में

एडिटर : राजेश अग्रवाल
पता : शॉप नं.-12, आकाशगंगा, सुपेला, भिलाई, दुर्ग, छत्तीसगढ़ – 490023
मोबाइल : 9303289950
ई-मेल : shreekanchanpath2010@gmail.com

© Copyright ShreeKanchanpath 2022 | All Rights Reserved | Made in India by Anurag Tiwari

Removed from reading list

Undo
Welcome Back!

Sign in to your account

Lost your password?