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गिद्धों के संरक्षण की पहल : छत्तीसगढ़ पहुंचे बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी और बर्ड काउंट इंडिया के विशेषज्ञ, बताया कैसे होगा सरंक्षण

By Mohan Rao Published November 17, 2024
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गिद्ध : डेमो पिक
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रायपुर। गिद्धों के संरक्षण को छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा विशेष पहल की जा रही है। तेजी से कम होती इस प्रजाति को कैसे बचाया जाए इसके लिए नवा रायपुर स्थित अरण्य भवन में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। छत्तीसगढ़ वन विभाग द्वारा आयोजित  इस कार्यक्रम में कार्यशाला में बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी और बर्ड काउंट इंडिया जैसे प्रतिष्ठित संगठनों के विशेषज्ञों के साथ शोधकर्ता, छात्र, और वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।

कार्यशाला में गिद्ध संरक्षण के विभिन्न पहलुओं पर गहन चर्चा की गई। कार्यशाला में बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी और बर्ड काउंट इंडिया जैसे प्रतिष्ठित संगठनों के विशेषज्ञों ने गिद्धों की वर्तमान स्थिति, उनकी संख्या में गिरावट के कारण और उनके लिए सकारात्मक वातावरण बनाने के उपायों पर चर्चा की। शोधकर्ताओं और छात्रों ने गिद्ध संरक्षण के महत्व और उससे संबंधित चुनौतियों पर विचार-विमर्श किया।

नवा रायपुर स्थित अरण्य भवन में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन

गिद्ध संरक्षण के प्रयासों को प्रोत्साहन
कार्यक्रम में न केवल गिद्ध संरक्षण के प्रयासों को प्रोत्साहन दिया, बल्कि सभी प्रतिभागियों को इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित भी किया। शोधकर्ताओं ने छत्तीसगढ़ में गिद्धों की गणना से जुड़े आंकड़े प्रस्तुत किए। इंद्रावती टाइगर रिजर्व और अचानकमार टाइगर रिजर्व के प्रयासों को विशेष रूप से सराहा गया, जहां गिद्ध संरक्षण के लिए वल्चर रेस्टोरेंट और वल्चर सेफ जोन जैसी पहल की जा रही हैं। वन विभाग, पशु चिकित्सा विभाग और ड्रग कंट्रोल विभाग के साथ समन्वय स्थापित करेगा।

गिद्धों के प्रति लोगों को करेंगे जागरुक
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) प्रेम कुमार ने कहा कि गिद्ध संरक्षण के लिए छत्तीसगढ़ वन विभाग नागरिकों की भावनाओं को गिद्धों से जोड़ने का प्रयास करेगा, जिससे वे इनके संरक्षण के प्रति संवेदनशील बनें। बारनवापारा वन्यजीव अभयारण्य में व्हाईट रम्पड वल्चर को पुनः बसाने के प्रयास किए जाएंगे। इसी तरह वन विभाग, पशु चिकित्सा विभाग और ड्रग कंट्रोल विभाग के साथ समन्वय स्थापित करेगा, ताकि पालतू जानवरों के उपचार के दौरान उपयोग किए जाने वाले घातक दवाईयों पर प्रतिबंध लगाया जा सके।

स्कूलों और कॉलेजों में भी होंगे जागरूकता कार्यक्रम
इसी तरह स्कूलों और कॉलेजों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिससे छात्रों को प्रकृति और गिद्ध संरक्षण के प्रति संवेदनशील बनाया जा सके। संरक्षण के प्रयासों को सुदृढ़ करने के लिए वन विभाग एनजीओ, शोधकर्ताओं और अन्य संबंधित संगठनों के साथ समन्वय करेगा। गिद्धों के आवास और उनकी गतिविधियों को समझने के लिए एक निगरानी प्रणाली विकसित की जाएगी और उनका जियोटैगिंग किया जाएगा।

कार्यशाला में यह रहे उपस्थित
इस कार्यशाला में वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, जिनमें सेवानिवृत्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक आर. के. सिंह, सहायक प्रधान मुख्य वन संरक्षक, योजना एवं विकास अरुण कुमार, सीसीएफ वाइल्डलाइफ एवं फील्ड डायरेक्टर, उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व सातोविषा समझदार, संचालक, जंगल सफारी रायपुर धम्मशील गणवीर, उप निदेशक, अचानकमार टाइगर रिजर्व यूआर गणेश, उप निदेशक, इंद्रावती टाइगर रिजर्व संदीप बालगा और डीएफओ, कवर्धा शशि कुमार उपस्थित रहे। पैनल चर्चा में शोधार्थी डॉ. विभू प्रकाश, वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया डॉ. सुरेश कुमार, क्रिस्टोफर बाउडेन, डॉ. काजवीन उमरीगर शेखर कोलिपाका और दिलशेर खान ने अपने अनुभव साझा किए और गिद्ध संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दिए।

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