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बाघों के शिकारियों की आएगी शामत, चार राज्यों ने मिलकर बनाया समूह, रोकेंगे अवैध शिकार

By Mohan Rao
Published: October 3, 2024
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बाघों के शिकारियों की आएगी शामत, चार राज्यों ने मिलकर बनाया समूह, रोकेंगे अवैध शिकार
बाघों के शिकारियों की आएगी शामत, चार राज्यों ने मिलकर बनाया समूह, रोकेंगे अवैध शिकार
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रायपुर। बाघों या अन्य जंगली जानकरों का शिकार करने वालों की अब खैर नहीं। छत्तीसगढ़ समेत चार राज्यों ने मिलकर समूह बनाया है और यह फैसला किया है कि जंगली जानवरों के साथ ही शिकारियों पर भी कड़ी नजर रखी जाएगी। इसके अलावा जंगल में बाघों पर कैमरों के जरिए नजर रखी जाएगी। टाइगर रिजर्व क्षेत्र के उन इलाकों में लगातार गश्त होगी, जहां बाघों का आना-जाना लगा रहता है। इधर, राज्य के टाइगर रिजर्व अचानकमार में तीन बाघों को लाने की भी तैयारियां है। प्रारम्भ में इन बाघों को संरक्षण में रखा जाएगा और बाद में जंगल में छोड़ दिया जाएगा। इसके लिए वन विभाग तैयारियों में जुटा हुआ है।

बाघों को अवैध शिकार से बचाने राज्य सरकार ने बड़ी तैयारी की है। अब बाघों पर रोजाना कैमरे से निगरानी रखी जाएगी तथा टाइगर रिजर्व में रोजाना गश्त भी की जाएगी। छत्तीसगढ़ समेत आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और महाराष्ट्र ने मिलकर अवैध शिकार से निपटने एक समन्वय समूह बनाया है। जंगली जानवरों को शिकारियों से बचाने संबंधी चर्चा के लिए बीजापुर जिले में इस वर्ष मई और जून में वन विभाग के अधिकारियों ने कार्यशाला आयोजित की थी। वहीं चारों राज्यों के अधिकारियों के बीच चर्चा के लिए एक वाट्सअप ग्रुप भी बनाया गया है। छत्तीसगढ़ में वर्तमान में अचानकमार, उदंती सीतानदी और इंद्रावती तीन टाइगर रिजर्व है। इंद्रावती टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या अभी पांच से छह है। अवैध शिकार को रोकने के लिए बनाई गई टीम प्लानिंग कर रही है। इसके तहत टाइगर रिजर्व क्षेत्र में समय पर रिपोर्टिंग के साथ ही अधिकारियों के साथ संचार स्थापित करने के लिए नेटवर्किंग बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।

वन्य अपराधों का आदान-प्रदान

इसके साथ ही जोखिम कारकों की पहचान और राज्यों में होने वाले अपराधों को राज्यों के बीच आदान-प्रदान भी किया जाएगा। सीसीएफ आरसी दुग्गा ने कहा कि राज्यों के बीच बनी टीम में समन्वय स्थापित किया जा रहा है। इस प्रकार राज्यों की टीम द्वारा मिलकर किए जा रहे प्रयास से काफी फायदा होगा। बाघों की सुरक्षा के लिए दो कार्यशालाएं भी आयोजित की जा चुकी है। बनाई गई रणनीति के मुताबिक, सभी राज्य अपने-अपने क्षेत्र के टाइगर रिजर्व में रोजाना गश्त करेंगे। जहां जहां बाघ का आना जाना है, वहां कैमरे से बाघों को ट्रैप करेंगे। जंगली जानवर की लाश या टुकड़ा मिलता है तो पता लगाएंगे कि बाघ ने कब और कैसे शिकार किया। अपने इलाकों के बाघों के मल की डीएनए जांच देहरादुन में करवाएंगे।

ताडोबा से आएंगे तीन नए मेहमान

अचानकमार टाइगर रिजर्व में जल्दी ही मध्यप्रदेश के कान्हा और महाराष्ट्र के ताडो़बा से तीन बाघों को लाया जाएगा। राज्य सरकार के निर्देश पर वन विभाग के अधिकारी इसकी तैयारियों में जुटे हुए हैं। इन बाघों को लाने के बाद मध्यप्रदेश के कूनों में रखे गए चीतों की तर्ज पर रखने के बाद जंगलों में छोडऩे की योजना बनाई गई है। साथ ही उनकी सुरक्षा के लिए स्पेशल टीम और ट्रैप कैमरे की मदद ली जाएगी। वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि राष्ट्रीय पशु बाघ को लाने के पहले उन्हें छोड़े जाने वाले स्थल का चिन्हाकन किया गया है। विशेषज्ञ और फील्ड में तैनात अमले द्वारा एटीआर से दक्षिण और पश्चिम क्षेत्र में छोडऩे का प्रस्ताव दिया गया है। इस पर विचार करने के बाद बाघों को जंगलों में छोडा़ जाएगा। ताकि पहले से विचरण कर रहे 10 बाघों के बीच संघर्ष की स्थिति निर्मित न हो।

ट्रैप कैमरे लगाए गए

बाघों को छोड़े जाने वाले संभावित क्षेत्रों में ट्रैप कैमरे लगाए जा रहे हैं। वहीं, शिकार से बचाने के लिए एंटी पोचिंग और स्पेशल टीम को लगातार गश्त करने और निगरानी के लिए प्रशिक्षण दिया गया है। उनके लिए भोजन की व्यवस्था करने के लिए पहले ही बारनवापारा, जंगल सफारी और अन्य अभ्यारण्य से शाकाहारी वन्य प्रणियों को छोड़ा गया है। फिल्ड डायरेक्टर एटीआर, मनोज कुमार पांडेय के मुताबिक, राज्य सरकार के निर्देश पर जल्द ही एटीआर में मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र से 3 बाघों को लाया जाएगा। साथ ही उनके संरक्षण संवर्धन पर विशेष ध्यान देने विभागीय अमला निगरानी करेगा।

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