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Gustakhi Maaf: कबाड़ियों पर भी करें थोड़ी मेहरबानी

By Om Prakash Verma
Published: April 20, 2024
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gustakhi Maaf: जब दुर्गवासी पी गए लाश वाला पानी
gustakhi Maaf: जब दुर्गवासी पी गए लाश वाला पानी
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-दीपक रंजन दास
कबाड़ का धंधा देखने-सुनने में भले ही घटिया दर्जे का प्रतीत होता हो परन्तु इससे न तो इसका महत्व कम हो जाता है और न ही इसकी कमाई पर कोई फर्क पड़ता है। एक रिपोर्ट के मुताबिक अकेले भारत में प्रतिवर्ष 27.7 करोड़ टन से अधिक कबाड़ निकलता है। आम तौर पर कबाड़ को या तो फेंक दिया जाता है या फिर कहीं पर छोड़ कर भुला दिया जाता है। शहर की हर दूसरी डेंटिंग-पेंटिंग की दुकान के आसपास गाडिय़ों का ऐसा कबाड़ सालों से पड़े हुए देखा जा सकता है। गाडिय़ों के कबाड़ का 99 प्रतिशत हिस्सा रीसाइक्लेबल होता है। इसके अलावा इसके कई पुर्जे बतौर स्पेयर पाट्र्स काम आ जाते हैं। यह एक विशाल व्यापार है जिसमें कभी-कभी कबाड़ की मुंहमांगी कीमत भी मिल जाती है। इसका एक ही साइड इफेक्ट है पुलिस। पुलिस कभी भी कबाडिय़ों के यहां छापेमारी कर सकती है। कबाड़ का माल जब्त हो सकता है और उसे छोटे कबाड़ी से बड़े कबाड़ी के कब्जे में जाना पड़ सकता है। वैसे देश में सर्वाधिक कबाड़ पैदा करने का रिकार्ड भी पुलिस का ही है। पुलिस की मजबूरी है कि अपराध या दुर्घटना में शामिल वाहनों एवं अन्य सामग्रियों को जप्त कर वह मालखाने में रखे। छोटा-मोटा सामान तो मालखाने में रखा जा सकता है पर गाडिय़ां उन थानों में खड़ी कर दी जाती हैं जहां थाना परिसर बड़ा हो। कुछ थानों की छतों पर जब्त साइकिलों के अंबार लगे होते हैं। पुलिस वाले हंसी-ठिठोली में यहां तक कह देते हैं कि छत पर कबाड़ पड़ा हो तो थाना ठंडा रहता है। गाडिय़ां यहां खड़े-खड़े सड़ जाती हैं। टायर गल जाते हैं, पहिए जमीन में धंस जाते हैं। इंजन बैठ जाता है, बॉडी सड़ जाती है। जब तक केस का निपटारा होता है गाडिय़ां इस हालत में नहीं होतीं कि उन्हें पहचाना भी जा सके। पिछले कई सालों से देश स्वच्छता मोड में है। पर स्वच्छता का मतलब केवल गली मोहल्लों की सफाई या जल स्रोतों की सुरक्षा नहीं है। स्वच्छता का मतलब यह भी है कि कबाड़ इक_ा न हो। प्रतिवर्ष देश में लाखों वाहन बिकते हैं। लगभग इतनी ही संख्या में गाडिय़ां कबाड़ भी होती हैं। पर इस कबाड़ का करना क्या है, इसकी चर्चा कहीं नहीं होती। पिछले साल रायपुर के ग्राम धनेली में प्रदेश का पहला रजिस्टर्ड व्हीकल स्क्रैपिंग सेंटर प्रारंभ किया गया। मेटल कार्पोरेशन ऑफ इंडिया द्वारा संचालित यह उद्यम प्राथमिकता सूची में होगा। यह भी तय किया गया कि पुराने वाहन को यहां कबाड़ में बेचने वालों को नए वाहन की खरीदी में 25 प्रतिशत तक कर रियायत दी जाएगी। इसमें यह व्यवस्था भी की गई कि मासिक, त्रैमासिक टैक्स पटाने वाले वाहनों पर यदि टैक्स बकाया हो तो एक साल तक का टैक्स माफ कर दिया जाएगा। पर यह व्यवस्था ऊंट के मुंह में जीरा है। आवश्यकता है कबाडिय़ों को इससे जोड़ कर कलेक्शन सेंटर बनाने की।

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