ShreeKanchanpathShreeKanchanpath
  • होम
  • छत्तीसगढ़
    • रायपुर
    • दुर्ग-भिलाई
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • व्यापार
  • स्पोर्ट्स
  • मनोरंजन
  • हेल्थ
  • E-Paper
Reading: विविधता की शक्ति या एकता का माध्यम- हिंदी – अतुल मलिकराम
Share
Notification Show More
Latest News
राज्योत्सव 2026 : प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों में मुख्य अतिथि निर्धारित, राज्य शासन ने जारी किया आदेश
October 27, 2026
विजेताओं को गोल्ड, सिल्वर और ब्रांज़ मेडल से किया गया सम्मानित
पं. जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज में वार्षिक खेल समारोह ‘एनिग्मा 9.0’ के अंतर्गत पुरस्कार वितरण समारोह आयोजित
October 27, 2026
प्राकृतिक एवं जैविक खेती के साथ संतुलित उर्वरक उपयोग और मृदा संरक्षण पर दिया गया जोर
मिट्टी की सेहत से संवरेगा खेती का भविष्य, ‘खेत बचाओ अभियान’ के तहत किसानों को किया गया जागरूक
October 27, 2026
भारतीय रेलवे देशभर में 1265 स्टेशन मास्टर्स की भर्ती करेगा, ग्रेजुएट कर सकते हैं आवेदन
October 27, 2026
छत्तीसगढ़ में 15 नवंबर से होगी धान खरीदी, साय कैबिनेट में लिया गया निर्णय… इन मुद्दों पर भी बनी सहमति
October 27, 2026
Aa
ShreeKanchanpathShreeKanchanpath
Aa
  • होम
  • छत्तीसगढ़
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • व्यापार
  • स्पोर्ट्स
  • मनोरंजन
  • हेल्थ
  • E-Paper
Search
  • होम
  • छत्तीसगढ़
    • रायपुर
    • दुर्ग-भिलाई
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • व्यापार
  • स्पोर्ट्स
  • मनोरंजन
  • हेल्थ
  • E-Paper
Follow US
© Copyright ShreeKanchanpath 2022 | All Rights Reserved | Made in India by Anurag Tiwari
OtherUncategorized

विविधता की शक्ति या एकता का माध्यम- हिंदी – अतुल मलिकराम

By Om Prakash Verma Published September 16, 2023
Share
विविधता की शक्ति या एकता का माध्यम- हिंदी - अतुल मलिकराम
विविधता की शक्ति या एकता का माध्यम- हिंदी - अतुल मलिकराम
SHARE

-राजनीतिक रणनीतिकार
कुछ दिनों पहले अखबार में हिंदी को लेकर एक आर्टिकल पढ़ा कि हिंदी को राष्ट्रभाषा घोषित कर देना चाहिए। अनायास ही मेरे मुँह से निकला- वाह! यदि ऐसा होना चाहिए, तो जिस भारत की परम्परा विविध सभ्यताओं और भाषाओं वाली है, उसका क्या? किसी विशेष क्षेत्र की भाषा, रीति-रिवाज को अन्य क्षेत्रों की भाषा या रीति-रिवाजों से केंद्र द्वारा अधिक महत्व देना, देश की एकता पर आघात करने जैसा है। भारत अनेकताओं में एकता वाला देश है। हमारे संविधान में कहीं भी राष्ट्रभाषा का जिक्र तक नहीं है। अक्सर लोग ऐसे विचार भावनात्मक या फिर राजनैतिक आधार पर रखते हैं। पर उसके परिणाम के विषय में तनिक भी नहीं सोचते।

राष्ट्रभाषा बनाने से अधिक महत्वपूर्ण है हिंदी भाषियों द्वारा हिंदी का प्रयोग। मैं दावे के साथ कह सकता हूँ कि किसी भी हिंदी भाषी से आप पूछेंगे कि क्रिकेट को हिंदी में क्या बोलते हैं? तो वह ‘गोलगट्टम लकड़ पट्टम दे दनादन प्रतियोगिता’ नहीं बता पाएगा। इतनी हिंदी, हिंदी भाषी को पता होगी? और मोटरसाइकिल को हिंदी में क्या कहेंगे? ‘यंत्र चालक द्वीपथ गामिनी’ और पंप को वायु ठूसक यंत्र, अलमारी, रेल इत्यादि। ऐसे अनेक उदाहरण मिल जाएँगे, जो शब्द हिंदी नहीं हैं, लेकिन हम इन्हें आम बोलचाल में उपयोग करते आ रहे हैं।

ऐसी परिस्थिति में जब हिंदी भाषियों ने हिंदी पढ़ना या लिखना बंद कर दिया है, और इसके बाद आता है समझना, तो समझ तो हम इतने अच्छे से रहे हैं कि बेकार में हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने की माँग करके देश को तोड़ने का कार्य भी बड़ी कुशलता से कर रहे हैं। हम स्वयं तो हिंदी पढ़ेंगे या लिखेंगे नहीं, लेकिन दूसरों को अवश्य पढ़वाएँगे। हिंदी प्रदेशों में कोर्ट कचहरी, बैंक, मेडिकल और इंजीनियरिंग की पढ़ाई, अखबार, सरकारी अनुबंध इत्यादि के काम अंग्रेजी में हो रहे हैं। नौकरी अंग्रेजी से मिल रही है। तो हमारा संघर्ष अंग्रेजी से होना चाहिए भारतीय भाषाओं से नहीं। मराठी, दक्षिणी भाषी या बंगाली को हिंदी का राष्ट्रभाषा बनना कतई स्वीकार्य नहीं होगा और इसकी आवश्यकता भी क्यों है? मेरे हिसाब से तो यह फालतू के मुद्दें हैं, जिन्हें उठाना ही नहीं चाहिए।

2030 के भारत के रूप में अगर हम हिंदी को बढ़ते हुए देखना चाहते हैं, तो हमें हिंदी विशेषज्ञों को बैठाकर आसान और उच्च स्तर के शब्द ईजाद करने होंगे। जब तक हम आसान शब्दकोश नहीं लाएँगे, तब तक हिंदी को विस्तृत नहीं कर पाएँगे। हिंदी को कई भाषाओं के शब्दों को आत्मसात करना होगा और सबसे महत्वपूर्ण बात कि पहले हिंदी राज्यों में ठीक से हिंदी का प्रयोग हो। हमारे अपने जीवन में हिन्दी का प्रयोग हो, फिर राष्ट्रभाषा क्या, विश्वभाषा की सोचिए।
-ये लेखक के अपने विचार हैं

You Might Also Like

राज्योत्सव 2026 : प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों में मुख्य अतिथि निर्धारित, राज्य शासन ने जारी किया आदेश

भारतीय रेलवे देशभर में 1265 स्टेशन मास्टर्स की भर्ती करेगा, ग्रेजुएट कर सकते हैं आवेदन

छत्तीसगढ़ में 15 नवंबर से होगी धान खरीदी, साय कैबिनेट में लिया गया निर्णय… इन मुद्दों पर भी बनी सहमति

अभिषेक और वैभव के तूफान में उड़ा न्यूजीलैंड, वर्ल्ड रिकार्ड साझेदारी से जीता भारत

आईसीआईसीआई लाइफ गारंटीशुदा इंडेक्स्ड पेंशन प्लान हुआ लॉन्च, आजीवन गारंटीशुदा आय के साथ मिलेगा इंडेक्स से जुड़ी वृद्धि का लाभ

Om Prakash Verma September 16, 2023
Share this Article
Facebook Twitter Whatsapp Whatsapp Copy Link
Share
Previous Article राष्ट्रीय पोषण सप्ताह: वेदांता एल्यूमिनियम की पहल 'रन फॉर जीरो हंगर', पोषण के महत्व के प्रति चलाया अभियान राष्ट्रीय पोषण सप्ताह: वेदांता एल्यूमिनियम की पहल ‘रन फॉर जीरो हंगर’, पोषण के महत्व के प्रति चलाया अभियान
Next Article एंड पिक्चर्स पर आज रात होने जा रहे फिल्म ‘सर्कस’ के प्रीमियर को लेकर जॉनी लीवर ने कही यह बात एंड पिक्चर्स पर आज रात होने जा रहे फिल्म ‘सर्कस’ के प्रीमियर को लेकर जॉनी लीवर ने कही यह बात

Ro.No.-14097/18

× Popup Image

Ro. No.-14093/1

[youtube-feed feed=1]


Advertisement

Advertisement


Logo

छत्तीसगढ़ प्रदेश का एक विश्वसनीय न्यूज पोर्टल है, जिसकी स्थापना देश एवं प्रदेश के प्रमुख विषयों और खबरों को सही तथ्यों के साथ आमजनों तक पहुंचाने के उद्देश्य से की गई है। इसके साथ ही हम महत्वपूर्ण खबरों को अपने पाठकों तक सबसे पहले पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

क्विक लिंक्स

  • होम
  • E-Paper
  • Crime
  • Durg-Bhilai
  • Education

Follow Us

हमारे बारे में

एडिटर : राजेश अग्रवाल
पता : शॉप नं.-12, आकाशगंगा, सुपेला, भिलाई, दुर्ग, छत्तीसगढ़ – 490023
मोबाइल : 9303289950
ई-मेल : shreekanchanpath2010@gmail.com

© Copyright ShreeKanchanpath 2022 | All Rights Reserved | Made in India by Anurag Tiwari

Removed from reading list

Undo
Welcome Back!

Sign in to your account

Lost your password?