भिलाई (श्रीकंचनपथ न्यूज़)। बिना कार्यकर्ताओं को विश्वास में लिए सीधे दिल्ली से प्रत्याशी घोषित करने को लेकर भाजपा में आंतरिक बवाल मच गया है। अब तक पार्टी द्वारा घोषित 21 सीटों में से कई सीटों पर कार्यकर्ताओं ने खुलकर नाराजगी जाहिर की है, इससे भाजपा आलाकमान के कान खड़े हो गए हैं। पता चला है कि पार्टी में उठने वाले बवंडर को थामने के लिए ही प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में पर्यवेक्षक भेजने का निर्णय लिया गया। बताते हैं कि अब भाजपा ने सीधे प्रत्याशी घोषित करने से तौबा कर ली है। निर्णय लिया गया है कि पर्यवेक्षकों द्वारा दी गई रिपोर्ट को भी अब पार्टी महत्वपूर्ण मानेगी। छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के बाद ऐसा पहली बार हुआ जब भाजपा आलाकमान ने कार्यकर्ताओं की रायशुमारी के बिना सिर्फ सर्वे की रिपोर्टों के आधार पर प्रत्याशियों की पहली सूची जारी की थी। पार्टी के ही भीतर इस पहली सूची को अविश्वास की नजरों से देखा जा रहा है।

भाजपा द्वारा 21 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी करने के बाद कुछ विधानसभा क्षेत्रों से अंतरकलह सामने आई है। इसे खत्म करने के लिए चुनाव प्रभारी ओम माथुर ने एक नया फार्मूला निकाला है। हर सीट पर दावेदारों से पूछा जा रहा है कि अगर आपको टिकट नहीं दी जाती है तो आप किसे ठीक मानते हैं। वो जिस भी नाम को बता रहे हैं उसे शार्टलिस्ट किया जा रहा है। सूत्रों की मानें तो पांचों सर्वे में भी अगर वह नाम है तो उसे टिकट मिलने की संभावना सबसे अधिक होगी। ऐसे में कोई भी उस उम्मीदवार का विरोध नहीं कर पाएगा। जो भी पदाधिकारी उस उम्मीदवार का नाम नहीं दे रहे हैं, उन्हें भी चिन्हित किया जा रहा है। बाद में उनसे वजह भी पूछी जाएगी कि आपने उम्मीदवार को बेहतर क्यों नहीं माना। चुनाव प्रभारी ओम माथुर छत्तीसगढ़ दौरे पर हैं। तीन दिन पहले उन्होंने पर्यवेक्षकों को हर सीट पर जाने को कहा और विधानसभा क्षेत्र में पदाधिकारियों की बैठक लेकर उम्मीदवारों के नाम लाने की जिम्मेदारी दी है। आनन-फानन में सरगुजा संभाग की 9 सीटों को छोड़कर 60 सीटों के लिए 38 पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की गई। शनिवार को 60 सीटों पर पर्यपेक्षक पहुंचे। उन्होंने सबसे चर्चा कर उस विधानसभा में तीन-तीन नाम का पैनल बनाया है। बाकी बचे नामों को भी शार्टलिस्ट किया गया है। इसके अलावा सरगुजा संभाग की 9 सीटों पर ओम माथुर, नितिन नबीन ने खुद वन टू वन किया।
छत्तीसगढ़ में पहली बार ऐसा हुआ है कि हर विधानसभा सीट पर पर्यवेक्षकों की बैठक में तीनों सत्र के संगठन पदाधिकारियों को बुलाया गया है। पहले केवल वर्तमान पदाधिकारियों को बुलाकर ही बैठक की जाती थी। बताया जा रहा है कि एक-एक बैठक में 70-80 पदाधिकारी पहुंच रहे हैं। मंडल, जिले के पदाधिकारियों के अलावा पार्षद और विधानसभा कोर कमेटी भी उपस्थित रह रही है। रविवार को पर्यवेक्षकों ने अपनी रिपोर्ट ओम माथुर को सौंप दी है। सोमवार को माथुर ने सभी पर्यवेक्षकों के साथ बैठक कर 69 सीटों पर मंथन किया। बताया जा रहा है दूसरी सूची के लिए पैनल भी तैयार है। पर्यवेक्षकों के सुझाव के बाद इसमें परिवर्तन हो सकता है।
किसी की नहीं चल रही
भाजपा में इस बार किसी भी क्षत्रप की नहीं चल रही है। पांच तरह के सर्वे किये गए हैं। हर सर्वे एजेंसी से तीन-तीन नामों का पैनल मांगा गया है। संभाग प्रभारियों से भी हर विधानसभा के तीन प्रबल उम्मीदवारों के नाम मांगे गए हैं। अब पर्यवेक्षकों से भी तीन नाम मांग जाएंगे। जो नाम कॉमन होगा उसके बारे में अलग से खुफिया एजेंसियों से जांच करवाई जाएगी। अगर वह जिताऊ कैंडिडेट होगा तो उसे टिकट दी जाएगी। सूची में एक नाम कॉमन मिलता है, लेकिन पर्यवेक्षकों के पैनल में वह नाम नहीं होगा तो उस सीट पर दोबारा सर्वे करवाया जाएगा।




