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Gustakhi Maaf: राहुल को राहत के बाद राजनीति

By Om Prakash Verma
Published: August 6, 2023
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gustakhi Maaf: जब दुर्गवासी पी गए लाश वाला पानी
gustakhi Maaf: जब दुर्गवासी पी गए लाश वाला पानी
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-दीपक रंजन दास
राहुल गांधी को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिल गई है। शीर्ष अदालत ने राहुल के कन्विक्शन पर स्टे लगाया है, अर्थात दोषसिद्धि पर सवाल खड़े कर दिये हैं। अदालत ने यह भी कहा है कि गांधी को अधिकतम सजा क्यों दी गई, इसे भी सजा में स्पष्ट नहीं किया गया है। इस मामले में जो कुछ कहना होगा, अदालत ही कहेगी पर सेशन और हाईकोर्ट के फैसले के बाद आई सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के कई मायने हैं। अंग्रेजों के जमाने से ही एक सरकारी परिपाटी चली आ रही है लोगों को उनकी जाति से संबोधित करने की। पुलिस भी अपराधियों को दीपक बंगाली, राजू उडिय़ा, वेंकट तेलुगू कहती और लिखती रही है। देश में कई जातियां आपराधिक जातियों के रूप में चिन्हित हैं। वर्ण व्यवस्था के कट्टर समर्थक तो नहीं होते पर एक आम धारणा है कि कुछ वर्णों के लोग दूसरों से ज्यादा सयाने होते हैं। कोई पूजा-पाठ और प्राचीन ग्रंथों पर अथॉरिटी है तो कोई लिखने-पढऩे और हिसाब किताब में प्रवीण होता है। किसी को अपनी मूंछों पर घमंड है तो किसी को अपनी हीनता पर पूरा यकीन। यह और बात है कि बच्चे सभी वर्णं के फेल होते हैं। शीर्ष पदों पर पहुंचने वालों में भी सभी वर्णों के लोग होते हैं। सवाल यह उठता है कि जब पूरा देश इसी सोच को लेकर चल रहा है तो राहुल के बयान को इतना सीरियसली क्यों ले लिया गया। दरअसल, राहुल की पहचान एक ढीठ नेता की बन चुकी है। भाजपा पिछले एक दशक से भी ज्यादा समय से राहुल गांधी को नेस्तनाबूद करने में लगी हुई है। राहुल के बयानों को तोड़ा मरोड़ा जाता रहा, उसे मंदबुद्धि साबित करने की कोशिश की गई, ‘पप्पूÓ नामकरण कर दिया गया। राहुल के साथ ही उसकी बहन प्रियंका को भी ‘पिंकीÓ नाम दे दिया गया। इतना सबकुछ करने के बाद भी राहुल को हतोत्साहित करना संभव नहीं हुआ। मोदी मामले में उनका दोषी ठहराया जाना उचित था, इसमें कोई दो राय नहीं हो सकती। पर यह सजा इतनी क्यों दी गई कि इसका असर आठ साल तक उनके राजनीतिक निर्वासन का कारण बन गया? यही वह सवाल है जो सुप्रीम कोर्ट ने पूछा है। मोदी उपनाम का मामला तो ‘उड़ता भाला पकडऩेÓ जैसा है। किसी के कहने भर से अगर पूरी जाति का अपमान हो जाता हो, तो देश की बहुत बड़ी आबादी को इस तरह के केस तमाम नेताओं, पुलिस और प्रशासन के खिलाफ करना चाहिए। ऐसा अपराध हम अल्पसंख्यकों के खिलाफ दशकों से कर रहे हैं। दरअसल, यह कोशिश थी राहुल को सक्रिय राजनीति से दूर रखने की। इससे विपक्ष के उन मंसूबों पर भी पानी फिर जाता जिसके बारे में लालू प्रसाद यादव ने कहा था कि ‘आप दूल्हा बनो, हम सब बाराती बन जाएंगे।Ó मान लिया गया कि जब दूल्हा बैन हो जाएगा तो बारात अपने आप बिखर जाएगी। पर संविधान आड़े आ गया।

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