भिलाई (श्रीकंचनपथ न्यूज़)। चुनावी मुहाने पर खड़े छत्तीसगढ़ में चुनावी तैयारियां जोर मारने लगी है। दोनों ही प्रमुख दलों कांग्रेस व भाजपा ने मुद्दों के चयन के लिए टीम बना ली है और यह टीम चुनाव से पहले अपने-अपने घोषणा-पत्र तैयार करने में भी जुट गई है। सत्तारूढ़ दल कांग्रेस जहां विकास को आधार बनाने जा रही है और जनता पर राहतों की बारिश करने की तैयारी में है, तो दूसरी ओर भाजपा कानून-व्यवस्था व भ्रष्टाचार के मुद्दे को प्रमुखता से उठाने के मूड में है। कांग्रेस का विकास कितना कारगर होगा, यह तो वक्त ही बताएगा, किन्तु भाजपा जिन मुद्दों को लेकर जनता के बीच जाने को तैयार है, उसे लेकर जनता में कोई दिलचस्पी नहीं दिख रही है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि भाजपा जिन मुद्दों को ब्रह्मास्त्र समझ रही है, कहीं वह फुस्सी बम तो नहीं है?
भाजपा संगठन में पूरी तरह से बदलाव के बाद भी पार्टी विधानसभा चुनाव के लिए मजबूत नजर नहीं आ रही है। दूसरी तरफ कांग्रेस लगातार भाजपा के मुद्दों पर सीधा अटैक कर रही है। पीएम आवास योजना के नाम पर भाजपा पिछले दो साल से कांग्रेस सरकार को घेर रही थी, लेकिन सीएम भूपेश बघेल ने चुनाव से ठीक पहले गरीबों को राज्य सरकार के पैसे से पक्का मकान देने का वादा कर दिया। सॉफ्ट हिंदुत्व के साथ कांग्रेस शुरू से ही आगे बढ़ रही है। भगवान राम के ननिहाल को संवारने की कोशिश की रही है। यहां तक कि धान खरीदी के मामले में भी चुनाव के ठीक पहले सीएम ने प्रति एकड़ 20 क्विंटल धान खरीदी की घोषणा कर सबसे बड़े वोट बैंक को साधने की कोशिश की है। दरअसल, छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस जितनी मजबूत दिखाई दे रही है उतनी भाजपा नहीं दिख रही। कांग्रेस ने पिछले एक महीने में आंतरिक गुटबाजी को शांत करने के लिए टीएस सिंहदेव को डिप्टी सीएम बनाया, दीपक बैज को प्रदेश अध्यक्ष और मोहन मरकाम को प्रेमसाय सिंह टेकाम की जगह कैबिनेट मंत्री बनाया। पार्टी अब सामूहिक नेतृत्व में विधानसभा चुनाव जीतने के लिए आगे बढ़ रही है।
छापों से खलबली
छत्तीसगढ़ में भाजपा लगातार मुद्दों की तलाश में भटक रही है। इस बीच अब छत्तीसगढ़ में ईडी और आयकर विभाग की एंट्री से खलबली मची हुई है। ईडी ने पिछले 8 महीने में 500 करोड़ का कोयला व 2 हजार करोड़ के कथित शराब घोटाले का खुलासा किया है। इसमें कई आईएएस अफसर और कांग्रेस नेताओं को सेंट्रल एजेंसी घेरे में ले रही है। वहीं पीएम मोदी भी 7 जुलाई को रायपुर की आमसभा में भ्रष्टाचार के मामले में कार्रवाई की गारंटी देकर गए है। मोदी छत्तीसगढ़ में भी डबल इंजन की सरकार बनाने का दावा कर चुके है। फिलहाल भाजपा और कांग्रेस के दावों में कितना दम है ये चुनाव परिणाम के बाद ही समझ आएगा। लेकिन इस बीच गृहमंत्री अमित शाह के छत्तीसगढ़ दौरे के राजनीतिक मायनों को समझना भी जरूरी है। वे एक महीने में तीन बार छत्तीसगढ़ का दौरा कर चुके हैं। यह संकेत है कि हाईकमान की नजरों में छत्तीसगढ़ में भाजपा के हालात सामान्य नहीं है।
चार साल में बदले तीन अध्यक्ष
भाजपा लगातार हर मोर्चे में कांग्रेस से मात खा रही है, इसलिए हाईकमान ने छत्तीसगढ़ की कमान खुद संभाली है। वैसे, भाजपा मुद्दों की तलाश में लगातार भटकती हुई नजर आती है। हालांकि पिछले 6 महीने में पार्टी में सक्रियता देखने को मिली है। भाजपा ने बेरोजगारी, शराबबंदी, पीएम आवास योजना और पीएससी घोटाले पर बड़े स्तर में प्रदर्शन किया है, लेकिन भाजपा की चुनौती संगठन के नेतृत्व के मामले में बढ़ रही है। क्योंकि 4 साल में 3 प्रदेश अध्यक्ष बदले जा चुके है। अब कमान सांसद अरुण साव को दी गई है। इसके बाद भी मुश्किलें कम होने का नाम ही नहीं ले रही है। भाजपा युवा नेताओं की नई टीम को चुनावी मैदान में उतार रही है तो इससे पार्टी के पुराने यानी 15 साल तक सत्ता सुख भोगने वाले नेताओं की पूछ-परख कम हो गई है। माना जा रहा है कि हाईकमान ऐसे नेताओं को सुनियोजित तरीके से साइड लगा रहा है।
पीएम के दौरे में दिखा असर
7 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रायपुर दौरे में कई नेताओं को तवज्जो नहीं मिली। मंच पर पूर्व केबिनेट मंत्री राजेश मूणत को जगह नहीं मिली तो वे कलाकारों के लिए बनाए गए मंच में अकेले बैठकर पीएम मोदी को सुनते देखे गए। इसका वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हुआ तो मूणत ने किसी भी तरह की नाराजगी से इंकार कर दिया। लेकिन भाजपा के राजनीतिक कार्यक्रमों में ये साफ दिखाई पड़ रहा है कि पार्टी के पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर, प्रेमप्रकाश पांडेय, अमर अग्रवाल, पुन्नूलाल मोहले, रामसेवक पैकरा, रमशीला साहू, दयालदास बघेल और भैयालाल राजवाड़े जैसे सीनियर नेता पार्टी के कार्यक्रमों से दूर नजर आ रहे है। हालांकि इन नेताओं ने सार्वजनिक रूप से कभी नाराजगी जाहिर नहीं की है।
पार लगाने का जिम्मा शाह पर
इसी साल 1 मई को भाजपा के सीनियर आदिवासी नेता नंदकुमार साय ने पार्टी में उपेक्षा का आरोप लगाते हुए कांग्रेस पार्टी ज्वाइन कर ली। कांग्रेस ने भी मौके का फायदा उठाकर नंदकुमार साय को कैबिनेट मंत्री का दर्जा देकर सत्ता में बड़ी जिम्मेदारी दे दी। अब माना जा रहा है कि छत्तीसगढ़ में भाजपा की डूबती नैया को पार करने की जिम्मेदारी अमित शाह को दी गई है। छत्तीसगढ़ की चुनावी रणनीतियों की अमित शाह खुद निगरानी कर रहे है, लेकिन भाजपा के लिए सत्ता में वापसी आसान नहीं है, क्योंकि कांग्रेस का छत्तीसगढिय़ावाद भाजपा के सामने एक बड़ी चुनौती है। इधर, शाह के लगातार दौरों को लेकर कांग्रेस सवाल उठा रही है। कांग्रेस संचार विभाग के प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि छत्तीसगढ़ भाजपा चुनाव लडऩे के लिए सक्षम नहीं है. इसलिए अमित शाह को यहां की कमान संभालनी पड़ी है। वहीं भाजपा नेता संजय श्रीवास्तव ने कहा कि पार्टी राज्य में चुनाव जीतने के लिए पूरी तरह से तैयार है। हमारी शक्ति बूथ स्तर पर बढ़ रही है। एक महीने में 4 बड़े नेताओं का दौरा हुआ है। आने वाले समय में और भी राष्ट्रीय नेता छत्तीसगढ़ आने वाले है। इससे कांग्रेस घबरा गई है।




