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गौठानों में भी बकरी प्रजनन केंद्र, दुर्ग के कुर्मीगुंडरा गौठान में किया गया नवाचार

By Om Prakash Verma Published February 20, 2023
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गौठानों में भी बकरी प्रजनन केंद्र, दुर्ग के कुर्मीगुंडरा गौठान में किया गया नवाचार
गौठानों में भी बकरी प्रजनन केंद्र, दुर्ग के कुर्मीगुंडरा गौठान में किया गया नवाचार
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बकरीपालन को बढ़ावा देने के लिए उच्च नस्ल की बकरियां बकरीपालकों को उपलब्ध कराने स्थानीय रूप से आरंभ किया गया केंद्र
कामधेनु विश्वविद्यालय के उपकेंद्र के रूप में काम करेगा केंद्र
अभी दूसरे राज्यों से बकरीपालक मंगवा रहे बकरियां इस नवाचार से ट्रांसर्पोटेशन का बचेगा खर्च
रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने खेती के साथ ही पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए नस्लसंवर्धन के लिए विशेष पहल करने के निर्देश अधिकारियों को दिये थे। इसके लिए बहुत जरूरी था कि स्थानीय स्तर पर उच्च नस्ल के मवेशी पशुपालकों को उपलब्ध हो सकें। जिला प्रशासन दुर्ग ने इसके लिए बहुत कारगर तरीके से काम किया है। पहले मुर्गीपालन के लिए किसानों को मुर्गियां उपलब्ध कराने बड़ी संख्या में हैचरी यूनिट स्थापित की गई और अब उच्च नस्ल की बकरियां उपलब्ध कराने उस्मानाबादी बकरियों का प्रजनन केंद्र स्थापित किया गया है। यह प्रजनन केंद्र कामधेनु विश्वविद्यालय के उपकेंद्र के रूप में काम करेगा। आज इसके लिए 25 बकरियों और 2 बकरों की एक यूनिट की पहली खेप दी गई। आज कामधेनु विश्वविद्यालय के उस्मानाबादी बकरी सीड सेंटर के समक्ष कुलपति डा. एनपी दक्षिणकर ने यह यूनिट उपसंचालक पशुधन विकास विभाग डा. राजीव देवरस को सौंपी।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की मंशानुरूप उच्च नस्ल के पशुपालन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से दुर्ग जिले के कलेक्टर श्री पुष्पेंद्र कुमार मीणा के निर्देश पर यह कार्य आरंभ किया गया है। उस्मानाबादी बकरियां दुर्ग जिले के वातावरण के लिए अनुकूलित हैं बकरीपालन के क्षेत्र में किसानों के ज्यादा रुचि नहीं लेने का कारण यह था कि यहां उच्च नस्ल की बकरियां उपलब्ध नहीं। बाहर से मंगवाना होता है और लाने का ही व्यय काफी हो जाता है। अब गौठान से ही पशुपालक यह उच्च नस्ल की बकरियां ले जा सकेंगे। इससे बकरीपालन को लेकर बढिय़ा वातावरण जिले में बनेगा।

47 प्रतिशत तक है ट्विन रेट- इस संबंध में जानकारी देते हुए कुलपति डा. दक्षिणकर ने बताया कि उस्मानाबादी प्रजाति की बकरियों की ट्विनिंग रेट अर्थात दो बच्चे देने की क्षमता लगभग 47 प्रतिशत तक होती है। डा. दक्षिणकर ने बताया कि इस क्षेत्र का क्लाइमेट भी इनके अनुकूल हैं। इनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता काफी अच्छी होती है। बेहतर तरीके से पालन हो तो इनकी ग्रोथ काफी तेज होती है। उल्लेखनीय है कि एनसीबीआई (नेशनल सेंटर फार बायोटेक्नालाजी इनफार्मेशन) की एक रिपोर्ट देखें तो सामान्यत: बकरियों में एक बच्चे जन्म देने की दर 61.96 प्रतिशत, दो बच्चे जन्म देने की दर 37.03 प्रतिशत और तीन बच्चे जन्म देने की दर 1.01 प्रतिशत होती है। इस लिहाज से उस्मानाबादी बकरियां गुणात्मक वृद्धि के दृष्टिकोण से काफी बकरीपालकों के लिए काफी उपयोगी साबित होती हैं।

सरगुजा के लिए ब्लैक बंगाल और दुर्ग के लिए उस्मानाबादी उपयुक्त- बकरीपालन से जुड़े विशेषज्ञों ने बताया कि छत्तीसगढ़ में भी अलग-अलग जिलों में अलग-अलग तरह की प्रजाति उपयुक्त होती हैं। उदाहरण के लिए सरगुजा की बात करें तो यहां ब्लैक बंगाल काफी उपयुक्त है। इसी तरह दुर्ग जिले के वातावरण के लिए उस्मानाबादी काफी उपयुक्त है।

दो कारक जिनके चलते इस पहल से बड़ी संभावनाएं- देश भर में हुए सर्वेक्षण में पाया गया कि बकरियों की संख्या में 25 फीसदी का इजाफा हुआ है। बकरीपालन में लगे लोगों की आय में हुई वृद्धि से यह हो पाया है और अनेक लोग ऐसे हैं जो इसे वृहत उद्यम के रूप में भी अपना रहे हैं। कुर्मीगुंडरा में जहां गौठान समिति यह काम करेगी वहां पर इससे आय में वृद्धि की बड़ी संभावनाएं होंगी। इसके साथ ही इन बकरियों की वजह से स्थानीय बकरियों में भी नस्ल वृद्धि की अच्छी संभावनाएं पैदा होंगी।

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