आशा भोसले महान गायिका। 20 भाषाओं में 11 हजार से ज्यादा गाने गा चुकीं आशा ताई आज 90 साल की हो गई हैं। स्वर कोकिला लता मंगेशकर की छोटी बहन, पंचम दा के नाम से फेमस म्यूजिक माइस्ट्रो आर.डी. बर्मन की पत्नी आशा जी केवल गायिका भर नहीं हैं। बॉलीवुड में अपने 6 दशक के संगीत भरे सफर के साथ आशा ताई अब स्वाद के सफर पर भी हैं। जी हां, इन दिनों वे गायिकी को अल्प विराम देकर अपने रेस्टोरेंट के बिजनेस को आगे बढ़ा रही हैं। दुनियाभर में उनके दर्जनभर से ज्यादा रेस्टोरेंट हैं। पहला दुबई में खुला था- आशाज रेस्टोरेंट। अब कई बड़े रेस्टोरेंट दुबई, कुवैत, मैनचेस्टर के अलावा और भी कई देशों में है। इस चेन के लिए खुद आशा ताई ने कुछ रेसिपीज ईजाद की हैं। संगीत के सुरों से रसोई के स्वाद तक के इस सफर में आशा ताई की नेटवर्थ करीब 80 करोड़ रुपए हैं। आज उम्र के 90वें पड़ाव पर भी वे उसी ऊर्जा के साथ इस काम को ना सिर्फ देख रही हैं, बल्कि खुद भी अपने रेस्टोरेंट के किचन में खाना पकाती नजर आती हैं।

कैसे हुई रेस्टोरेंट्स की शुरुआत?
गाने की सफर की शुरुआत तो मैंने 1943 से ही शुरू कर दी थी और आज मैं 90 साल की हो चुकी हूं। मेरी पूरी लाइफ इसी प्लेबैक सिंगिंग में ही निकल गई। इसी दौरान बच्चों को भी बड़ा किया और उनकी शादियां भी कीं। जब मेरे बच्चे छोटे थे तो घर में आकर बोलते थे कि उन आंटी के घर का कबाब बहुत अच्छा था या चिकन अच्छा था। तो फिर मुझे ऐसा लगा कि वो बाहर ना खाएं तो ही अच्छा है और मैं खुद उनके लिए बनाऊं। इसलिए फिर मैंने कुकिंग की तरफ ध्यान दिया। इसके बाद मेरे बेटे ने कहा कि आई अपनी डिशेज पर आप किताब लिखिए। मैंने कहा कि किताबें बहुत औरतों ने लिखी हैं इसलिए मैंने किताब लिखने से मना कर दिया। मेरा बेटा चाहता था कि मेरी खाने की रेसिपी दूसरों तक पहुंचें इसलिए उसने रेस्टोरेंट खोलने का सुझाव रखा और यहीं से रेस्टोरेंट्स की शुरुआत हुई।
खाना बनाना किससे सीखा है?
मैंने कुकिंग मजरूह सुल्तानपुरी की बेगम के अलावा कई लोगों से सीखी। बहुत सारी मैगजीन से मैं खानों की रेसिपी लिख लेती थी। जिस होटल में जाती थी, वहां भी शेफ से पूछती थी कि आपने इस डिश को कैसे बनाया और मुझे जानकर शेफ भी मजे से डिशेज की रेसिपी बताते थे। ऐसे कर-कर के मैंने बहुत सारी रेसिपी सीखी है।
सबसे पहला रेस्टोरेंट कहां खोला?
पहला रेस्टोरेंट हमारा दुबई में खुला था और भगवान की दया से कोरोना काल में भी रेस्टोरेंट सही ढंग से चला था और अभी भी चल रहा है। मेरे रेस्टोरेंट्स की बहुत सारे देश में बहुत सारी फ्रेंचाइजी भी है। मैंने वहां के कुक को खाना भी बनाना सिखाया है। मेरे रेस्टोरेंट्स में बहुत सारे कुक लखनऊ और पंजाब से हैं।
गाने की रिकॉर्डिंग के समय खाने से जुड़ा कोई किस्सा?
गानों की रिकॉर्डिंग के समय पंचम मेरे से आकर कहते थे कि आशा आज घर जाकर झींगा बनाया जाएगा तो कभी कहते थे कि ये डिश बनाया जाएगा। तो मैं उनसे कहती थी कि पहले गाने की रिकॉर्डिंग पूरी कर लें, फिर घर जाकर डिनर की प्लानिंग करेंगे। पंचम खाना भी बहुत अच्छा बनाते थे और बहुत सारी डिशेज मैंने उन्हीं से सीखी है। कबाब मैंने उन्हीं से बनाना सीखा है। बंगाल की भी बहुत सारी डिशेज मैंने उन्हीं से सीखी है। घर में मेरे और पंचम के बीच में कॉम्पिटिशन भी होता था कि दोनों में कौन अच्छा खाना बना लेता है।
खाना बनाते समय कोई गाना सीखा हो?
मुझे खाना बनाते समय मेरा कोई भी गाना याद नहीं आता था। उस समय मैं दूसरों के ही गाने गाती थी। मैं उस समय हेमंत कुमार, किशोर दा और दीदी के गाने ही गाती थी।
रेस्टोरेंट के लिए खुद किसी डिश को ईजाद किया हो?
रेस्टोरेंट के लिए मैंने फिश बिरयानी बनाई थी। इसके अलावा मैंने मूंग की दाल अलग तरह से बनाई थी, जिसको सब लोग बहुत ही पसंद करते हैं। पुरानी डिशेज को मेरा बेटा आनंद दोबारा मुझे बनाने के लिए कहता है। जब मैं डिश को दोबारा बनाती हूं, तो वो लोग मेरे डिश की रिकॉर्डिंग कर उसे सेव कर लेते हैं।




