भिलाई। श्री त्रिवेणी जैन तीर्थ जैन भवन में दिगंबर समाज का दशलक्षण पर्व शुरू हुआ। श्री 1008 आदिनाथ भगवान , श्री शांतिनाथ भगवान, श्री पाश्र्वनाथ भगवान और ,भगवान महावीर स्वामी के मंगल अभिषेक और पूजन साथ ब्रह्मचारी संजय ने मंगल पूजन कराए। पहले दिन उत्तम क्षमाधर्म की पूजा हुई।उन्होंने कहा कि क्रोध का अभाव होना ही क्षमा है। हमें यह जानना है कि क्षमा का अर्थ क्या है? क्षमा क्यों मांगी जाती है?, क्षमा किससे मांगी जाती है? क्षमा करने से क्या फल होता है?सभी धर्मों में एक उत्तम शब्द भी लगाया जाता है। उत्तम क्षमा आदि जो 10 धर्म होते हैं, उनमें उत्तम गति प्राप्ति के कारण यह उपयोग करते हैं। धर्म उसकी रक्षा करता है। उन्होंने कहा कि क्षमा मांगने से बढ़कर क्षमा करना होता है।

भोजन का असर व्यवहार पर
उन्होंने बताया क क्रोध क्यों आता है? तामसिक भोजन से मन बहल होता हैं और उत्तेजना लाने वाले गरिष्ठ आहार से भी क्रोध आता है अत: हमें ऐसे भोजन का भी त्याग करना चाहिए। उन्होंने बताया क मौन धारण करने से अच्छे से अच्छे शत्रु और जब हम शुद्ध भाव रखेंगे, क्रोध का शमन करेंगे तो अपने आप ही सरल सहज बन जाएंगे।क्रोध रूपी शत्रु का नाश करके क्षमा रुपी मित्र को अपनाने का मार्ग बताया।
एकदूसरे से क्षमा मांगकर मनाया पर्युषण महापर्व
श्री त्रिवेणी जैन तीर्थ के श्री श्वेतांबर जैन मंदिर में पर्युषण महापर्व मनाया गया। इस मौके पर महावीर बेगानी ,महेंद्र जैन, राजेश मारुति निर्मल कोचर आदि भक्तों के साथ महिलाओं ने श्री जी के मंगल अभिषेक पूजन भक्ति भाव के साथ किए और दोपहर में सकल श्वेतांबर जैन समाज भिलाई सेक्टर 6 ने जैन भवन में संवत्सरी प्रतिक्रमण करते हुए एक दूसरे से क्षमा याचना की। इस अवसर पर दान बल पोरवाल गौतम चंद टाटिया महावीर बेगानी बाबूलाल सेठिया ,निर्मल चंद कोचर शांतिलाल टाटिया प्रकाश गोलछा शैलेश भाई साह,मूलचंद बाफना ,हुकुमचंद ओसवाल , संतोष बाफना ,वीरेंद्र भूरा भंवरलाल पोरवाल , नानू भाई पुखराज जैन राजेश मारुति ज्ञानचंद जैन भावेश भाई सा, नवीन बोथरा आनंद कोचक आदि मौजूद थे।
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