– दीपक रंजन दास
भारत में ऐसी कई परम्पराएं हैं जो कौतुहल जगाती हैं। कुण्डली का दोष मिटाने के लिए जहां मनुष्यों का विवाह पेड़ों से, पशुओं से कराया जाता है वहीं बारिश के लिए भी जीव जन्तुओं की शादी करवाई जाती है। भीषण गर्मी ने इस बार लोगों का हाल बेहाल कर रखा है। ऐसे में सभी लोग अपने-अपने स्तर पर प्रयास कर रहे हैं। इंदौर के मूसाखेड़ी स्थित राधाकृष्ण धर्मशाला में एक विवाह संस्कार संपन्न कराया गया। यहां कुत्ता टाइगर और कुतिया लूसी का ब्याह धूमधाम से कराया गया। जल को साक्षी मानकर पुरोहित रोहित शास्त्री ने विवाह संपन्न करवाया। इस विवाह का निमंत्रण पत्र बादल और बारिश के देवता इंद्र को भी दिया गया। यह एक टोटका है। माना जाता है कि कुत्तों का विवाह करवाने से इंद्रदेव प्रसन्न होते हैं और बारिश होती है। वैसे छत्तीसगढ़ में भी बारिश के लिए मेंढक मेंढकी का विवाह करवाने का चलन रहा है। इसी तरह का एक विवाह उत्तर प्रदेश के हमीरपुर में सम्पन्न हुआ। भरुआ सुमेरपुर में कुत्ते कल्लू और कुतिया भूरी की शादी धूमधाम से कराई गई। मनासर बाबा शिवमंदिर के महंत स्वामी द्वारका दास महाराज (वर पक्ष) और परछछ गांव के बजरंगबली मंदिर के महंत स्वामी अर्जुन दास महाराज (कन्या पक्ष) समधी बन गए। दूल्हा-दुल्हन को बाकायदा सोने-चांदी के जेवरों से सजाया गया और पूरे गांव को दावत दी गई। अब जब बारिश के लिए इतने आसान और मजेदार टोटके हासिल हैं तो पर्यावरण बचाने के लिए कौन सिर खपाए। जंगल काटो, खदान खोदो, बिजली बनाओ और खूब एसी चलाओ। पर्यावरण बिगड़ता है तो बिगड़ता रहे। अपने पास टोटका है न। मेंढकों की, कुत्तों की शादिया करवाओ, इंद्रदेवता प्रसन्न हो जाएंगे तो बारिश होगी। अगर इंद्र देवता नाराज हुए तो कितने भी जंगल खड़े कर लो, सूखा पड़कर रहेगा।





