जांजगीर (एजेंसी)। छत्तीसगढ़ की 14 रियासतों में से एक सक्ती राजपरिवार में पूर्व मंत्री तथा सक्ती राजा सुरेंद्र बहादुर सिंह और उनकी पत्नी गीता राणा सिंह के बीच संपत्ति पर अधिकार और दत्तक पुत्र को लेकर विवाद अब महल से बाहर आ गया है। रानी 30 साल पहले नेपाल चली गई थीं और हाल ही में लौटकर महल में रहने लगी हैं। उन्होंने खुला बयान जारी कर आरोप लगाया है कि उनके पति (राजा) के नौकर संपत्ति का दुरुपयोग कर रहे हैं। सुरेंद्र बहादुर ने जांजगीर एसपी को लिखित शिकायत दी है। इसमें कहा है कि रानी मेरी जानकारी और इजाजत के बगैर महल में रहने लगी हैं। मेरे बेटे तथा कर्मचारियों से दुव्र्यवहार कर रही हैं। वे विक्षिप्त लगती हैं, मैं उन्हें महल में रखना नहीं चाहता। राजा ने आरोप लगाया कि रानी 31 साल बाद नेपाल से आकर महल पर कब्जा करने की कोशिश में हैं। सुरेंद्र बहादुर ने एसपी को भेजे पत्र में यह भी कहा कि उनके साथ कोई अप्रिय घटना हो सकती है।
राजा को सता रहा किसी अप्रिय घटना का डर
राजा ने अपनी शिकायत में कहा, ‘ वे मेरे पुत्र एवं कर्मचारियों के विरुद्ध झूठी एवं मनगढ़ंत शिकायतें कर रही हैं। वे मानसिक रूप से विक्षिप्त हैं। मैंने कई बार उनको समझाने की कोशिश की कि वे इस प्रकार की हरकतें न करें। इससे महल एवं हमारे आत्मसम्मान को ठेस पहुंच रही है। इनकी हरकतों से तंग आ गया हूं। मेरी उम्र 79 वर्ष है, शुगर एवं ब्लड प्रेशर का मरीज हूं। अगर वे सक्ती में रहना चाहती हैं तो अपना इंतजाम कहीं और कर लें। मैं उन्हें अपने महल में नहीं रखना चाहता क्योंकि मेरे साथ किसी प्रकार की अप्रिय घटना हो सकती है।
रानी बोलीं- राजा जिसे बेटा बता रहे हैं, वह हमारा बेटा नहीं
रानी गीता का कहना है कि बुढ़ापे के कारण राजा सुरेंद्र बहादुर की याददाश्त कमजोर हो गई है। वे देख-सुन भी नहीं सकते, जिसका फायदा सेवादार उठा रहे हैं। रानी गीता ने एसपी पारूल माथुर को एक पत्र लिखा है, जिसमें कहा है कि राजा जिसे बेटा बता रहे हैं, वह हमारा बेटा नहीं है। उन्होंने कहा कि महल के सेवक धनेश्वर सिंह सिदार के पुत्र धीरेंद्र खुद को राजकुमार बता रहा है, जबकि वह हमारा वारिस नहीं है।
रानी ने दर्ज कराया घरेलू हिंसा का मामला
रानी गीता राणा सिंह के मुताबिक उन्होंने प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट सक्ती में घरेलू हिंसा के तहत मामला दर्ज किया था। कोर्ट ने फिलहाल घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम 2005 के तहत उन्हें महल में रखने के लिए 4 जून को आदेश पारित किया है।
धर्मेंद्र का दावा: मैं राजा का दत्तक पुत्र
धर्मेंद्र सिंह सिदार का कहना है, मैं राजा सुरेंद्र बहादुर सिंह का दत्तक पुत्र हूं। उनकी राजनीतिक विरासत संभाल रहा हूं। रानी 30 साल बाद आई हैं। वे विवाद क्यों कर रहीं हैं, मुझे नहीं पता। मेरी प्राइमरी स्कूल की अंकसूची से लेकर दस्तावेजों में पिता का नाम राजा सुरेंद्र बहादुर सिंह ही दर्ज है। दस्तावेज भी हमारे पास हैं।




