ShreeKanchanpathShreeKanchanpath
  • होम
  • छत्तीसगढ़
    • रायपुर
    • दुर्ग-भिलाई
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • व्यापार
  • स्पोर्ट्स
  • मनोरंजन
  • हेल्थ
  • E-Paper
Reading: मुहावरों के असल मायने ? काला अक्षर इंसान बराबर…..
Share
Notification Show More
Latest News
राज्योत्सव 2026 : प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों में मुख्य अतिथि निर्धारित, राज्य शासन ने जारी किया आदेश
October 27, 2026
विजेताओं को गोल्ड, सिल्वर और ब्रांज़ मेडल से किया गया सम्मानित
पं. जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज में वार्षिक खेल समारोह ‘एनिग्मा 9.0’ के अंतर्गत पुरस्कार वितरण समारोह आयोजित
October 27, 2026
प्राकृतिक एवं जैविक खेती के साथ संतुलित उर्वरक उपयोग और मृदा संरक्षण पर दिया गया जोर
मिट्टी की सेहत से संवरेगा खेती का भविष्य, ‘खेत बचाओ अभियान’ के तहत किसानों को किया गया जागरूक
October 27, 2026
भारतीय रेलवे देशभर में 1265 स्टेशन मास्टर्स की भर्ती करेगा, ग्रेजुएट कर सकते हैं आवेदन
October 27, 2026
छत्तीसगढ़ में 15 नवंबर से होगी धान खरीदी, साय कैबिनेट में लिया गया निर्णय… इन मुद्दों पर भी बनी सहमति
October 27, 2026
Aa
ShreeKanchanpathShreeKanchanpath
Aa
  • होम
  • छत्तीसगढ़
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • व्यापार
  • स्पोर्ट्स
  • मनोरंजन
  • हेल्थ
  • E-Paper
Search
  • होम
  • छत्तीसगढ़
    • रायपुर
    • दुर्ग-भिलाई
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • व्यापार
  • स्पोर्ट्स
  • मनोरंजन
  • हेल्थ
  • E-Paper
Follow US
© Copyright ShreeKanchanpath 2022 | All Rights Reserved | Made in India by Anurag Tiwari
FeaturedNationalNews

मुहावरों के असल मायने ? काला अक्षर इंसान बराबर…..

By Om Prakash Verma Published January 17, 2023
Share
मुहावरों के असल मायने ? काला अक्षर इंसान बराबर…..
मुहावरों के असल मायने ? काला अक्षर इंसान बराबर…..
SHARE

अतुल मलिकराम ( समाजसेवी)
कल शाम खुद के साथ समय बीता रहा था, तो मन में ख्याल मुहावरों के आने लगे, जिनका उपयोग हम इंसान अक्सर अपनी बात का वजन बढ़ाने के लिए किया करते हैं। एकाएक ही मन अलग दिशा में चला गया कि इंसान अपनी बात को मजबूत करने के लिए बेज़ुबान तक को भी नहीं छोड़ता है। ऐसे हजारों मुहावरे भरे पड़े हैं, जिन्हें बोलते समय इन निर्दोषों को हम क्या कुछ नहीं कह जाते हैं। और आज से नहीं, कई वर्षों से ही कहते चले आ रहे हैं। फिर मन में एक टीस उठी कि जिन जानवरों की आँखों में से कई दफा आँसू छलक पड़ते हैं, तो उन्हें ठेस भी तो पहुँचती ही होगी न, बोल नहीं सकते हैं तो क्या, भावना तो उनमें भी हैं न…..

एक जानवर, जिस पर हम दिन भर में एक बार तो टिप्पणी कर ही डालते हैं, वह है भैंस। जिसकी लाठी, उसकी भैंस; अक्ल बड़ी या भैंस; गई भैंस पानी में; भैंस के आगे बीन बजाना; काला अक्षर भैंस बराबर और भी न जाने क्या-क्या। ताकत से अपना काम बना लेने वाले की तुलना भैंस से, शारीरिक शक्ति की अपेक्षा बुद्धि की अधिकता की तुलना भैंस से, बना बनाया काम बिगडऩे की तुलना भैंस से, निरर्थक काम की तुलना भैंस से, अनपढ़ की तुलना भैंस से, मुझे आज तक समझ नहीं आया कि भैंस ने इंसान का बिगाड़ा क्या है। दैनिक जीवन में गाय से अधिक मात्रा में भैंस के दूध का सेवन करता है, यह देखते हुए मुझे यह कहने में जऱा भी संकोच नहीं है कि जिस थाली में खाता है, उसी में छेद करता है इंसान।

जऱा सोचिए, हम और आपकी तरह यदि ये बेज़ुबान भी बोल पाते और बदले में इंसान को कुछ यूँ उपाधि दे जाते कि काला अक्षर इंसान बराबर, तो कैसा जान पड़ता। एक पढ़े-लिखे व्यक्ति को कोई अनपढ़ कहेगा, जो जऱा सोचकर देखिए कि कैसा लगेगा। नज़दीक से मदमस्त गुजरती भैंस यदि आपको बेवजह कहती हुई निकल जाती कि भाई! जऱा बताना, अक्ल बड़ी या इंसान। मुझे तो लगता है कि हमारे क्रोध का तो ज्वालामुखी ही फूट पड़ता।

बन्दर क्या जाने अदरक का स्वाद; अब आया ऊँट पहाड़ के नीचे; हाथी के दाँत खाने के और, दिखाने के और; ऊँट के मुँह में जीरा; घोड़ा घास से दोस्ती करेगा, तो खाएगा क्या; अपना उल्लू सीधा करना; घोड़े बेचकर सोना; अपने मुँह मियाँ मिट्ठू; अक्ल के घोड़े दौड़ाना; नाक पर मक्खी न बैठने देना; धोबी का कुत्ता न घर का न घाट का; कुत्ते की दूम, टेढ़ी की टेढ़ी; मगरमच्छ के ऑंसू बहाना; अपनी गली में कुत्ता भी शेर होता है; कुत्ते को घी हजम नहीं होता और भी न जाने कितने ही मुहावरे हैं, जो बेज़ुबानों को इंसान से नीचे दिखाने का काम करते हैं।

इंसान हमेशा अपने से कमजोर पर ही आज़माइश करता है। मैं ऐसा मानता हूँ कि इंसान के अलावा दिखावा करने का अवगुण किसी में नहीं होता है, फिर भी हाथी को बदनाम कर रखा है यह कहकर कि उसके खाने के दाँत और है व दिखाने के और। मेरे मायने में तो मगरमच्छ के आँसू मुहावरे में भी फेरबदल करने की जरुरत है, क्योंकि इंसान से अधिक दिखावटी आँसू मुझे नहीं लगता कि कोई अन्य प्राणी बहाता होगा।

जाने-अनजाने में एक इंसान के मुँह से किसी दूसरे इंसान के लिए अपशब्द निकल जाते हैं, तो वह रौब झाड़ते हुए यह तो कह ही देता है कि तू जानता है मैं कौन हूँ। लड़ाई-झगड़ा कर या कॉलर पकड़कर उसे इस बात का एहसास तो दिला ही देता है कि उस शख्स ने गलत किया है। खुद को सबसे ऊपर समझने वाले इंसान को देखते हुए मैं तो कहता हूँ कि अच्छा ही हुआ जो प्रभु ने इन जानवरों को जुबां नहीं दी, नहीं तो उनके लिए हमारे द्वारा अपशब्दों का प्रयोग किए जाने पर जब वे अपनी ताकत की आज़माइश हम पर करते न, तो तमाम मुहावरे उनके चार पैरों के नीचे कुचल जाते। यकीन मानिए उनके पास जुबां नहीं है, लेकिन वे समझते सब हैं। तो कोशिश करें कि अपनी बात को वजनदार बनाने के लिए अन्य प्राणी को नीचे न गिराएँ।

You Might Also Like

राज्योत्सव 2026 : प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों में मुख्य अतिथि निर्धारित, राज्य शासन ने जारी किया आदेश

पं. जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज में वार्षिक खेल समारोह ‘एनिग्मा 9.0’ के अंतर्गत पुरस्कार वितरण समारोह आयोजित

मिट्टी की सेहत से संवरेगा खेती का भविष्य, ‘खेत बचाओ अभियान’ के तहत किसानों को किया गया जागरूक

भारतीय रेलवे देशभर में 1265 स्टेशन मास्टर्स की भर्ती करेगा, ग्रेजुएट कर सकते हैं आवेदन

छत्तीसगढ़ में 15 नवंबर से होगी धान खरीदी, साय कैबिनेट में लिया गया निर्णय… इन मुद्दों पर भी बनी सहमति

Om Prakash Verma January 17, 2023
Share this Article
Facebook Twitter Whatsapp Whatsapp Copy Link
Share
Previous Article रतालू के सेवन से होने वाले 5 प्रमुख फायदे, आज से ही डाइट में करें शामिल
Next Article Durg Crime News: गांजा तस्करी में दो जीआरपी आरक्षक सहित तीन गिरफ्तार, 2.40 लाख का मादक पदार्थ जब्त Durg Crime News: गांजा तस्करी में दो जीआरपी आरक्षक सहित तीन गिरफ्तार, 2.40 लाख का मादक पदार्थ जब्त

Ro.No.-14097/18

× Popup Image

Ro. No.-14093/1

[youtube-feed feed=1]


Advertisement

Advertisement


Logo

छत्तीसगढ़ प्रदेश का एक विश्वसनीय न्यूज पोर्टल है, जिसकी स्थापना देश एवं प्रदेश के प्रमुख विषयों और खबरों को सही तथ्यों के साथ आमजनों तक पहुंचाने के उद्देश्य से की गई है। इसके साथ ही हम महत्वपूर्ण खबरों को अपने पाठकों तक सबसे पहले पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

क्विक लिंक्स

  • होम
  • E-Paper
  • Crime
  • Durg-Bhilai
  • Education

Follow Us

हमारे बारे में

एडिटर : राजेश अग्रवाल
पता : शॉप नं.-12, आकाशगंगा, सुपेला, भिलाई, दुर्ग, छत्तीसगढ़ – 490023
मोबाइल : 9303289950
ई-मेल : shreekanchanpath2010@gmail.com

© Copyright ShreeKanchanpath 2022 | All Rights Reserved | Made in India by Anurag Tiwari

Removed from reading list

Undo
Welcome Back!

Sign in to your account

Lost your password?