भिलाई। हाईकोर्ट बिलासपुर में नगर पालिक निगम भिलाई, चरोदा और रिसाली निगम वार्ड व महापौर आरक्षण के खिलाफ मंगलवार को भी कोई निर्णय नहीं निकला। हालांकि आज कोर्ट में काफी देर तक इस पर चर्चा हुई लेकिन समय के आभाव में मुख्य न्यायाधीश ने बुधवार तक के लिए सुनवाई टाल दी।
उल्लेखनीय है कि उच्च न्यायालय बिलासपुर में मुख्य न्यायमूर्ति अनूप कुमार गोस्वामी और न्यायमूर्ति गौतम भादुड़ी की पीठ द्वारा मंगलवार को दोपहर बाद सुनवाई शुरू हुई। मामले में याचिका कर्ताओं द्वारा प्रस्तुत दलीलों पर शासन पक्ष ने जवाब प्रस्तुत किया। बताया जा रहा है शासन पक्ष की ओर से प्रस्तुत जवाबों से कोर्ट संतुष्ट नजर नहीं आया।
याचिकाकर्ता अली हुसैन सिद्धिकी ने बताया कि शासन पक्ष की ओर से प्रस्तुत जवाब में काफी खामियां रही। हमारे द्वारा विधिवत विवरण प्रस्तुत किया गया था जिसका शासन की ओर से संतुष्ठिजनक जवाब नहीं आया। अली हुसैन सिद्धिकी ने बताया कि शासन ने नियम विरुद्ध वार्ड आरक्षण व महापौर आरक्षण किया है।
बता दें कि सामाजिक कार्यकर्ता अली हुसैन सिद्दीकी ने हाईकोर्ट में भिलाई निगम के वार्डों के आरक्षण और रिसाली निगम के महापौर पद के आरक्षण के मामले में अलग-अलग याचिकाएं दायर कर चुनौती दी है। याचिका में उन्होंने नगर पालिक निगम रिसाली के महापौर पद को ओबीसी महिला के लिए किए गए आरक्षण को, नियम 1994 का उल्लंघन बताया है। 2011 की जनसंख्या के अनुसार अनुसूचित जाति की जनसंख्या प्रतिशत भिलाई चरोदा निगम से रिसाली नगर निगम में अधिक होना बताया है। जनसंख्या अधिक होने के बाद भी अन्य वर्ग के लिए किए गए आरक्षण को नियम विरूद्ध बताया है।




