श्रीकंचनपथ न्यूज डेस्क
भिलाई। केन्द्र व राज्य सरकारें अपना खजाना भरने के लिए आम आदमी के पेट पर लात मार रही हैं। पेट्रोल व डीजल की बेतहाशा बढ़ती कीमतों ने जहां आम आदमी की जेब हल्की कर दी है वहीं केन्द्र की भाजपा सरकार अपना खजाना भरने में लगी है। लगातार बढ़ रही कीमतों का असर रोजमर्रा की वस्तुओं पर पड़ रहा है वहीं सरकार की ओर से आम आदमी को किसी प्रकार की राहत नहीं दी जा रही है। बीते 6 माह में केन्द्र सरकार ने पेट्रोल डीजल से ही लगभग 43 हजार करोड़ से ज्यादा की कमाई कर ली है।
सरकारी तेल कंपनियों की ओर से आज पांचवें दिन भी पेट्रोल-डीजल के दामों में बढ़ोतरी हुई है। सोमवार को डीजल के दाम 34 से 39 पैसे तो वहीं पेट्रोल के दामों में 31 से 35 पैसे की बढ़ोतरी हुई है। कई राज्यों में इसके दाम 100 रुपये से ऊपर पहुंच चुके हैं। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर व दुर्ग भिलाई में सोमवार को पेट्रोल की कीमत 107.73 रुपए व डीजल की कीमत 106.72 रुपए तक पहुंच गई है। वहीं पावर पेट्रोल की कीमत 111 रुपए से ज्यादा हो गई है।
देश की राजधानी दिल्ली में पेट्रोल का दाम 109.69 रुपये जबकि डीजल का दाम 98.42 रुपये प्रति लीटर है। मुंबई में पेट्रोल की कीमत 115.50 रुपये व डीजल की कीमत 106.62 रुपये प्रति लीटर है। कोलकाता में पेट्रोल का दाम 110.15 रुपये जबकि डीजल का दाम 101.56 रुपये लीटर है। वहीं चेन्नई में भी पेट्रोल 106.35 रुपये लीटर है तो डीजल 102.59 रुपये लीटर है। छत्तीसगढ़ मध्यप्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, ओडिशा, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में पेट्रोल का भाव 100 रुपये पार हो चुका है।
पहली छमाही में 43,000 करोड़ रुपये ज्यादा कमाई
सरकार को पेट्रोलियम पदार्थों पर उत्पाद शुल्क के रूप में चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में 43,000 करोड़ रुपये ज्यादा कमाई हुई है। आलोच्य अवधि में उन उत्पादों पर कुल उत्पाद शुल्क संग्रह सालाना आधार पर 33 फीसदी बढ़कर 1.71 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। यह महामारी पूर्व स्तर (2019) के 95,930 करोड़ से 79 फीसदी ज्यादा है।
2020-21 के अप्रैल-सितंबर में कुल उत्पाद शुल्क संग्रह 1.28 लाख करोड़ रुपये रहा था। लेखा महानियंत्रक (सीजीए) के आंकड़ों के अनुसार, 2020-21 में पेट्रोलियम उत्पादों पर उत्पाद शुल्क के रूप में सरकार को कुल 3.89 लाख करोड़ की कमाई हुई थी। 2019-20 में यह आंकड़ा 2.39 लाख करोड़ और 2018-19 में 2.3 लाख करोड़ रुपये रहा था।
सीजीए के मुताबिक, 2020-21 की पहली छमाही में पेट्रोलियम उत्पादों पर बढ़ा हुआ उत्पाद शुल्क संग्रह 42,931 करोड़ रहा था। उद्योग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि अर्थव्यवस्था में तेज सुधार के साथ ईंधन की मांग में वृद्धि से 2021-22 में बढ़ा हुआ उत्पाद शुल्क संग्रह एक लाख करोड़ रुपये से अधिक रह सकता है। पिछले साल पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क को 19.98 रुपये से बढ़ाकर 32.9 रुपये प्रति लीटर किया गया था। डीजल पर इसे बढ़ाकर 31.80 रुपये प्रति लीटर किया गया था।
कमर्सियल एलपीजी सिलेंडरों की कीमतों में 266 की बढ़ोत्तरी
पेट्रोल के साथ ही लोगों की जेब को एक और झटका लगा है। व्यवसायिक कामों के लिए प्रयोग किए जाने वाले एलपीजी सिलेंडरों के दाम में सोमवार से 266 रुपये की बढ़ोतरी हो गई है। अब दिल्ली में 19 किलो के एलपीजी सिलेंडरों के दाम 1734 से बढ़कर 2000.50 रुपये हो गए हैं। हालांकि घरेलू कामों के लिए खरीदे जाने वाले सिलेंडरों की कीमत में वृद्धि नहीं हुई है।



