रिसाली महापौर का दारोमदार ताम्रध्वज पर
भिलाई। भिलाई, रिसाली व चरोदा नगर निगमों के महापौर कौन होगा, इसे लेकर कयासों का दौर आज भी जारी रहा। माना जा रहा है कि महापौर के लिए विधायक देवेन्द्र यादव की अनुशंसा पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल अंतिम मुहर लगाएंगे। वहीं रिसाली क्षेत्र का पूरा दारोमदार गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू पर है। भिलाई-चरोदा के लिए महापौर के नाम की अनुशंसा विधायक व पीएचई मंत्री गुरू रूद्रकुमार करेंगे। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, स्थानीय विधायकों की अनुशंसाओं पर ही मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सहमति जाहिर करेंगे। ऐसे में विधायकों के करीबी पार्षदों के नामों को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है।

उल्लेखनीय है कि भिलाई के चुनाव संपन्न होने के बाद कांग्रेस पार्टी को यहां बहुमत मिला है। भिलाई निगम के 70 वार्डों में से 37 वार्डों में कांग्रेस के पार्षद चुनकर आए हैं। वही भारतीय जनता पार्टी को 24 वार्डों में जीत मिली है। निर्दलीय प्रत्याशी 9 वार्डों में जीत पाए हैं। भिलाई निगम में बड़ी जीत के साथ ही यहां महापौर व सभापति कौन होगा इसे लेकर उत्सुकता बढ़ गई है। हालांकि कुछ ऐसे चेहरे हैं जो महापौर की रेस में सबसे आगे हैं। इनमें से उस चेहरे की तलाश की जा रही है, जो विधायक देवेन्द्र यादव का का सबसे करीबी व विश्वस्त है। बताया जा रहा है कि भिलाई निगम सहित चारों निगमों में महापौर कैंडिडेट मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की पसंद का होगा। इसके लिए स्थानीय विधायकों की अनुशंसा जरूर अनिवार्य होगी। अब सवाल यह है कि नगर निगम भिलाई में आखिर सीएम बघेल किस नाम पर सहमति जताते हैं।
एक ओर जहां महापौर व सभापति के नामों को लेकर लोग अपनी-अपनी राय जाहिर कर रहे हैं, वहीं यह भी कहा जा रहा है कि स्थानीय सरकार का मंत्रिमंडल यानी एमआईसी तय करने में भी विधायक देवेन्द्र यादव की अहम् भूमिका होगी। चुनाव अभियान की पूरी कमान स्वयं विधायक देवेंद्र यादव ने संभाली थी। नतीजों को उनके परिश्रम से जोड़कर देखा जा रहा है। जाहिर है कि भिलाई निगम में बहुमत आने से उनका राजनैतिक कद बढ़ेगा। वैसे भी देवेंद्र यादव मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के सबसे करीबी विधायकों में शुमार हैं। भिलाई निगम के महापौर की चर्चा के बीच कुछ नए चेहरों पर भी फोकस हो सकता है। दुर्ग नगर निगम में चुनाव होने के बाद महापौर को लेकर इसी तरह की पॉलिसी अपनाई गई थी। कई दिग्गज पार्षदों के बीच दुर्ग निगम में धीरज बाकलीवाल को महापौर बनाया गया। दुर्ग निगम चुनाव के बाद महापौर के शुरुआती दावेदारों में धीरज बाकलीवाल का नाम ही नहीं था, लेकिन जब इनके नाम पर मुहर लगी तो सभी कांग्रेस पार्षदों ने इनका समर्थन किया। दुर्ग का फॉर्मूला अपनाया गया तो संभवत: सीएम की पसंद किसी नए चेहरे पर ठहर सकती है।
रिजार्ट में पार्षद, मनोरंजन और दावत का भी इंतजाम
फिलहाल नवनिर्वाचित पार्षदों को अंडरग्राउंड कर दिया गया है। पता चला है कि रायपुर, दुर्ग और राजनांदगांव के करीब 300 पार्षदों को रायपुर, महासमुंद से लगे टूरिस्ट रिजॉर्ट और होटलों में रखा गया है। ऐसा इस वजह से कि कहीं सियासी जोड़-तोड़ का हथकंडा काम न कर जाए और हाथ आई जीत कांग्रेस से फिसल न जाए। पार्षद ही मेयर चुनेंगे इसलिए पार्टियां ज्यादा से ज्यादा इन्हें अपने पाले में रखने की कोशिश में जुटी हैं। पार्षद कांग्रेस के प्रति वफादार रहें, इसलिए सभी को पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की निगरानी में अलग-अलग जगहों पर भेजा गया है, कुछ को भेजा जा रहा है। भिलाई से एक बस की तस्वीर सामने आई है जिसमें पार्षदों को लेकर रायपुर के होटल में भेजा गया है। जिन पार्षदों को खुफिया ठिकानों पर रखा गया है उनमें रायपुर के बीरगांव, दुर्ग जिले के चरौदा, रिसाली और खैरागढ़ के पार्षद शामिल हैं। खबर है कि इन पार्षदों को रायपुर से लगे फॉरेस्ट टूरिस्ट रिजॉर्ट में रखा गया है। इनके मनोरंजन और दावत का भी बंदोबस्त किया जा रहा है। कांग्रेस पार्टी के नेता हर जगह जीत कर आए निर्दलीय उम्मीदवारों को भी अपना ही समर्थन करने के लिहाज से संपर्क बनाए हुए हैं। पार्टी सूत्रों ने बताया कि भिलाई के साथ ही खैरागढ़ व बीरगांव की निगमों में हार चखने वाली भाजपा और जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ भी इस जुगाड़ में हैं कि वो कांग्रेस का पलड़ा कुछ हल्का कर सकें। हालांकि ज्यादातर जगहों पर बहुमत या तो कांग्रेस के पास है या निर्दलीय के समर्थन से हासिल किया जा सकता है। ऐसे में भाजपा और जनता कांग्रेस दोनों इस कोशिश में हैं कि उनका दम भी बरकरार रहे।




