भिलाई (विप्र)। मेंटेनेंस का पैसा डकारने के बाद भी बिल्डर संधारण नहीं कर रहा। चौहान टाउन की एक इमारत में खराब लिफ्ट के कारण एक 62 वर्षीय महिला गंभीर रूप से घायल हो गई। इसकी तस्वीरें और वीडियो तक वायरल हो गए। तस्वीर खुद इस बात का सबूत दे रही है कि लिफ्ट खराब है पर सभी जिम्मेदार मिलकर बिल्डर का बचाव करते नजर आ रहे हैं।

12 जून की रात चौहान टाउन निवासी सौरभ रंजन अपनी मां सावित्री देवी, पत्नी और बेटी के साथ घर लौटे। ऊपरी मंजिल पर स्थित अपने घर जाने के लिए वे लिफ्ट में सवार होने लगे। पत्नी और बच्ची के साथ वो लिफ्ट में प्रवेश कर चुके थे जबकि मां लिफ्ट में प्रवेश कर रही थी। तभी लिफ्ट चल पड़ी। संतुलन बिगडऩे के कारण मां गिर पड़ी। हड़बड़ी में उन्होंने मां का हाथ पकड़ लिया और लिफ्ट रोकने की कोशिश करने लगे। पर लिफ्ट महज 7 सेकण्ड में टॉप फ्लोर पर पहुंच गई। मां के दोनों पैर लिफ्ट और लिफ्ट बॉक्स के बीच फंसे रहे और बुरी तरह कुचल गए।
पांचवे फ्लोर पर पहुंचने के बाद उन्होंने लिफ्ट मैन को फोन किया तो वह भी लगभग 40 मिनट बाद पहुंचा। काफी देर की मशक्कत के बाद मां का पैर निकाला जा सका। उन्हें तुरन्त हाइटेक सुपरस्पेशालिटी हॉस्पिटल ले जाया गया। महिला हाइपोवॉलेमिक शॉक में थी। अधिक मात्रा में रक्त बह जाने के कारण हृदय ठीक से पम्प नहीं कर पा रहा था। महिला की बीपी काफी कम थी। दोनों पैर की हड्डियां कई जगह से टूटी हुई थीं। मांस उखड़ गया था। मरीज की डॉपलर, एक्सरे आदि जांच की गई। दो यूनिट रक्त चढ़ाना पड़ा। महिला की स्थिति थोड़ी ठीक होने के बाद सर्जरी की गई। मरीज के दोनों पैर बचा लिए गए।
वायरल तस्वीरें खुद दे रहीं गवाही
घटना की तस्वीरें घटना के तुरंत बाद वायरल हो गईं। इसमें साफ दिख रहा है कि महिला गेट के पास बैठी है और उसके दोनों पैर लिफ्ट में फंसे हुए हैं। दोनों गेट खुले हैं। लिफ्ट का सेफ्टी फीचर गेट थोड़ा भी खुला रहने पर लिफ्ट को चलने नहीं देता। यह काम सेंसर करता है। जाहिर है कि सेफ्टी सेंसर को बाइपास कर दिया गया था। ऐसा कोई अनाड़ी लिफ्ट मैकेनिक ही कर सकता है। बेकार की बहस चल रही है कि लिफ्ट में घुसने के बाद किसी ने बटन दबाया था या नहीं। बटन दबाने पर भी लिफ्ट को तब तक नहीं चलना चाहिए था जब तक गेट खुला हो।
जिसपर बीती वही जानता है
मां के पैर लिफ्ट में बुरी तरह फंसे हुए थे और मैं कुछ नहीं कर पा रहा था। लिफ्ट एक झटके के साथ पांचवी मंजिल पर पहुंच गई थी। लिफ्ट में चारों तरफ खून ही खून था। एक क्षण को लगा कि पैर कटकर नीचे गिर चुके हैं। साथ में नन्ही सी बेटी भी थी। यदि वह फंसी होती तो…? तब भी क्या लोग मुझसे यही पूछते कि लिफ्ट में चढ़कर किसी ने बटन दबाया था या नहीं। बटन तो किसी दूसरे फ्लोर से भी दबाई जा सकती है जिसे कुछ नहीं पता होता कि लिफ्ट कहां है। तो क्या लिफ्ट चल पड़ती? पुलिस एफआईआर से आनाकानी कर रही है। बिल्डर का लिफ्ट मैन हमें ही कसूरवार ठहरा रहा है। मेरा सिर्फ एक सवाल है कि गेट खुला था तो लिफ्ट चली कैसे? सीसीटीवी फुटेज, फोटोग्राफ्स सबकुछ मौजूद हैं। फिर देर किस बात की?
सिस्टम फेल होने के संभावित कारण
लिफ्ट का डोर खुला होने पर वह चलता नहीं है। बहुत संभव है कि लिफ्ट डोर के सेंसर खराब हो गए हों। सेंसर बदलने की बजाय उसे बायपास कर दिया गया हो। ऐसा दोनों गेटों के लिए किया गया हो सकता है। यही वजह है कि दरवाजा खुला रहने के बावजूद लिफ्ट शुरू हो गया। इस मामले में लिफ्ट की शिकायत लंबे समय से पेंडिंग बताई गई है। ऐसी समस्याओं का एकमात्र हल एएमसी होता है। उनके पास उसी कंपनी के स्पेयर्स होते हैं तथा उन्हें पूरी तकनीकी जानकारी होती है। सुरक्षा के मामले में लापरवाही उचित नहीं है।
-सुखबीर सिंह तोमर, शिव शक्ति एलीवेटर्स
कोई नहीं लेता एनओसी
किसी भी इमारत को रहवास योग्य साबित करने के लिए फायर एनओसी लगती है। लिफ्ट भी इसका हिस्सा है। 2017 में सभी नगर निगमों के फायर टेंडर होमगार्ड्स और उसके अधीन काम कर रही एसडीआरएफ को सौंप दी गई। मेरी जानकारी के अनुसार रायपुर के 100-50 मामलों को छोड़ दिया जाए तो किसी भी बिल्डर ने आज तक हमसे एनओसी नहीं ली। लिफ्ट की देखरेख लगाने वाली कंपनी को ही करना चाहिए जो उसका फिटनेस सर्टिफिकेट देगी और उसके आधार पर हम एनओसी देंगे। पर अस्पतालों को छोड़कर कहीं भी इस नियम का पालन नहीं होता।
-नागेन्द्र सिंह, जिला कमांडेंट, होम गार्ड्स




