भिलाई। श्री भजन सिंह निरंकारी को लोग एक शांत, सौम्य, सज्जन नेता के रूप में ही याद करेंगे। 60 साल की लंबी राजनीतिक पारी खेलने के बावजूद वे बेदाग ही रहे। एक तरफ राजनीति थी, जनसेवा का उनका प्रण था तो दूसरी तरफ वे सेवाभाव के साथ संत निरंकारी मिशन से भी जुड़े रहे। इस सबका प्रभाव उनके व्यक्तिगत जीवन पर कुछ ऐसा पड़ा कि जाते जाते भी वे दो दृष्टिबाधितों का भला करते गए। उन्होंने नवदृष्टि फाउंडेशन में पहले ही अपनी वसीयत कर रखी थी। निधन के बाद परिवारजनों ने उनके नेत्र फाउंडेशन को दान कर उनकी ये अंतिम इच्छा भी पूरी कर दी।

78 वर्षीय श्री निरंकारी का विद्यार्थी जीवन बिलासपुर में बीता। यहीं से छात्र राजनीति से जुड़े। युवक कांग्रेस, कांग्रेस सेवा दल तथा कांग्रेस के अनेक आनुषांगिक संगठनों से जुड़े रहे। श्री निरंकारी ने सार्वजनिक जीवन की एक लंबी पारी खेली है। वे दिग्गज कांग्रेस नेता मोतीलालजी वोरा के बेहद करीबी रहे। लगभग छह दशकों के राजनीतिक जीवन की शुरुआत 1960 में तब हुई जब वे जिला कांग्रेस कमेटी दुर्ग के महामंत्री बने। श्री निरंकारी को 1985 में विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण का अध्यक्ष बनाया गया। 1990 तक वे इस पद पर बने रहे तथा पटरी पार की भिलाई का कायाकल्प कर दिया। इस अवधि में सर्वाधिक व्यवस्थापन, आवंटन और विकास कार्य हुए। पटरी पार के क्षेत्र को एक नया स्वरूप मिला। सड़कें बनीं, पट्टे मिले, पेयजल-निकासी की व्यवस्था हुई। इसी दौरान रेलवे पटरी के किनारे खाली पड़ी भूमि का व्यवस्थापन भी हुआ।
1995 में वे नेहरू युवा केन्द्र संगठन के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स में शामिल हुए। 1996 में उन्हें मध्यप्रदेश ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड का अध्यक्ष नियुक्त किया गया। सोलर कुकर और सोलर पैनल से तत्कालीन अविभाजित मध्यप्रदेश का परिचय भी इनके कार्यकाल में ही हुआ। सन् 2000 में उन्हें छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी का प्रवक्ता बनाया गया। 2009 में वैशाली नगर का उपचुनाव जीतकर वे पहली बार विधायक बने। इसके अलावा भी वे दो दर्जन से अधिक संस्थाओं और समितियों के महत्वपूर्ण पदों पर रहे। पेशे से अधिवक्ता श्री निरंकारी जिला विधिक सहायता समिति के भी अध्यक्ष रहे।



