भिलाई। कोरोना के चलते और मुहूर्त न होने से रिश्ता तय होने के बाद भी जोड़े अग्नि के सात फेरे लेने से वंचित थे। अब 15 नवंबर को देवउठनी एकादशी पर्व से विवाह के मुहूर्त शुरू हो जाएंगे और कोरोना मामले कम होने से पहले जैसी सख्ती भी नहीं है। हालांकि कई जगह एकादशी 14 नवम्बर को मनाई जाएगी। पिछले साल नवंबर से मार्च तक जहां केवल पांच मुहूर्त थे, वहीं इस बार 14 मुहूर्त हैं। शादी को यादगार बनाने में कोई कसर न रहे, इसलिए लोगों ने अब दिल खोलकर खरीदारी शुरू कर दी है। इसमें और ज्यादा ते•ाी आने की संभावना है। इसे देखते हुए व्यापारियों के चेहरों पर भी खुशी है।

विवाह के लिए कई मुहूर्त होने से दीपावली के बाद भी लंबे समय तक बाजार की रंगत बरकरार रहेगी। इस बार देवउठनी एकादशी 15 नवंबर को है। इस दिन लोग अपने घरों में गन्ना का मंडप बनाकर तुलसी विवाह करेंगे। इसके बाद विवाह और मांगलिक कार्य शुरू हो जाएंगे। जुलाई माह में देवशयनी एकादशी पर्व के बाद से विवाह आदि मांगलिक कार्य बंद हो गए थे जो अब शुरू होंगे। देवउठनी एकादशी को बिना देखा मूहूर्त माना जाता है लेकिन इस वर्ष 15 नवंबर को देवउठनी एकादशी के दिन शादी के मूहूर्त नहीं हैं। हालांकि 15 नवंबर के बाद कई विवाह मुहूर्त पड़ रहे हैं। देवपंचांग के अनुसार नवंबर-2021 से लेकर मार्च-2022 तक 14 विवाह मुहूर्त पड़ रहे है। नवंबर माह में 20, 21, 28 व 30 को विवाह मुहूर्त है। दिसंबर में 1, 7, 11 व 13, जनवरी-2022 में 22 व 23 और फरवरी-2022 में 5, 6, 10 व 18 को विवाह मुहूर्त है। देव पंचांग के अनुसार मार्च में कोई विवाह मुहूर्त नहीं पड़ रहा है। गत सत्र 2020-21 में नवंबर से मार्च माह तक केवल 5 विवाह मूहूर्त पड़े थे।
जनवरी, फरवरी, मार्च माह में तो कोई विवाह मुहूर्त थे ही नहीं। गत सत्र में शुक्र व गुरु के अस्त होने व सूर्य का मीन राशि में प्रवेश करने से विवाह मुहूर्त कम थे। ज्योतिषियों के मुताबिक, इस वर्ष नवंबर 2021 से मार्च 2022 तक देव पंचांग के अनुसार 14 मूहूर्त हैं जबकि इसी अवधि में गत वर्ष मात्र 5 ही मूहूर्त थे। बीते अप्रैल से जुलाई माह तक विवाह के कई मुहूर्त थे। इसी अवधि में कोरोना की दूसरी लहर बहुत खतरनाक हो गई थी, जिसके चलते सभी ने वैवाहिक कार्यक्रम स्थगित कर दिए थे। कई परिवारों ने तो आमंत्रण पत्र बंटवाने के बाद भी कार्यक्रम स्थगित किए।




