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जम्मू-कश्मीर में मुठभेड़ की सूचना ‘लीक’: अभी दर्जनों ‘मुस्तफा’ बाकी हैं, नहीं टूट सका ‘विभीषणों’ का नेटवर्क

By @dmin Published October 25, 2021
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पुलवामा में सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में दो आतंकी ढेर, एक जवान शहीद
पुलवामा में सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में दो आतंकी ढेर, एक जवान शहीद
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जम्मू (एजेंसी)। जम्मू-कश्मीर में आतंकियों के साथ हो रही मुठभेड़ में सुरक्षा बलों को सूचना लीक होने जैसी स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। 11 अक्तूबर से लेकर अभी तक पुंछ एवं दूसरे इलाकों में जो मुठभेड़ हुई हैं या जारी हैं, उनमें यह बात सामने आई है। ताजा मामला, जम्मू की कोट भलवाल जेल में रहे आतंकी जिया मुस्तफा का है। वह रविवार को सुरक्षा बलों और आतंकियों के बीच हुई एक मुठभेड़ में मारा गया है। इससे पता चला है कि पाकिस्तान में बैठे आतंकी समूहों और जम्मू-कश्मीर की जेल में बंद आतंकियों के बीच सीधी बातचीत होती रही है।

जेल से चल रहा नेटवर्क
कोट भलवाल जेल, जहां कई बड़े आतंकी बंद हैं, वहां मोबाइल फोन मिलने के चार मामले सामने आ चुके हैं। विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक, खुफिया एजेंसी ने इस बाबत जम्मू-कश्मीर प्रशासन को अलर्ट किया था। जेल में बंद आतंकियों के पास फोन मिलने की घटनाओं पर पूरी तरह नियंत्रण लगाने की बात कही गई। उसके बावजूद जेल में बैठकर आतंकी अपना नेटवर्क चलाते रहे। जम्मू-कश्मीर पुलिस और जेल प्रशासन, आतंकियों के नेटवर्क को नहीं तोड़ सका। जेलों में अभी दर्जनों बेखोफ ‘मुस्तफाÓ बंद हैं। जब इन जेलों के ‘विभीषणÓ पकड़ में नहीं सके, तो जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने खूंखार आतंकियों को ही उत्तर प्रदेश की जेलों में शिफ्ट करना शुरू कर दिया।

आतंकियों को ऑपरेशन की जानकारी थी  
बता दें कि पुंछ इलाके में आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन शुरू हुए दो सप्ताह से अधिक समय हो गया है। इस दौरान दस जवान शहीद हो चुके हैं। जम्मू-कश्मीर पुलिस ने दर्जनभर से अधिक आतंकियों के मारे जाने का दावा किया है। रविवार को सुरक्षा बल, लश्कर के आतंकी जिया मुस्तफा को रिमांड पर लेकर एक ठिकाने की पहचान कराने के लिए भाटादूडिय़ां ले जा रहे थे। तलाशी के दौरान आतंकियों ने पुलिस और सेना के जवानों पर गोलियां चला दीं। इसमें दो पुलिसकर्मी और सेना का एक जवान घायल हो गया। भारी फायरिंग के बीच जिया मुस्तफा मारा गया। सूत्रों के मुताबिक, सुरक्षा बलों की टीम मुस्तफा को लेकर जिस जगह गई थी, वहां हमले की आशंका नहीं जताई गई थी। सूत्रों का कहना है, आतंकियों ने जिस तरह से सुरक्षा बलों पर ताबड़तोड़ फायरिंग की, उससे सूचना लीक होने का पता चलता है। सुरक्षा बलों की टीम में कितने लोग हैं, इसका अंदाजा आतंकियों को था। मुस्तफा के पास जेल में मोबाइल फोन था और सीमा पार के आतंकी संगठनों से उसकी बातचीत होती रही है।

जेल में फोन और सिम पहुंचाना बहुत आसान
जम्मू की कोट भलवाल जेल में बंद आतंकियों तक मोबाइल फोन पहुंचाना कोई मुश्किल कार्य नहीं था। जेल में पुलिस के साथ तलाशी अभियान में शामिल केंद्रीय सुरक्षा बल के एक अधिकारी का दावा है कि जेल में बाहर से सामान लेकर आने वाली गाडिय़ों की स्क्रीनिंग के लिए कोई सिस्टम नहीं है। जेल में किसी भी अवैध वस्तु का पहुंचना आसान है। पहरेदारों की नजर केवल हथियारों पर रहती हैं। ड्रग्स, सिम और मोबाइल फोन को लेकर कोई सतर्कता नहीं बरती जाती। जिया मुस्तफा की पीओके में बैठे आतंकी सैफुल्लाह से बातचीत होना, साबित करता है कि जेल में ये सब मुश्किल काम नहीं था। आईबी ने पहले भी जम्मू-कश्मीर जेल प्रशासन एवं पुलिस को अलर्ट किया था कि जेल में सिम कार्ड और मोबाइल फोन पर सख्ती से रोक लगाई जाए। इस पर कोई अमल नहीं किया गया। जेल में ‘विभीषणÓ की तलाश नहीं हो सकी। नतीजा, कई अहम जानकारियां आतंकियों के पास पहुंचती रहीं। सूत्रों के मुताबिक, जेल में कुछ ऐसे लोग भी बताए जाते हैं, जो पुलिस के सीधे संपर्क में रहते हैं। उन लोगों के जेल में बंद खूंखार आतंकियों के साथ भी कथित संबंध होने की बात कही गई है।

जेलों में बंद करीब 100 आतंकियों की सूची तैयार
जम्मू-कश्मीर की जेलों में ‘विभीषणों’ का नेटवर्क इतना शक्तिशाली है कि उसे चाह कर भी खत्म नहीं किया जा सका। नतीजा, जेल में बंद खूंखार कैदियों को यूपी की जेलों में शिफ्ट करना शुरू कर दिया गया है। साल 2020 में कोट भलवाल जेल में जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी अब्दुल रहमान मुगल के पास मोबाइल फोन मिला था। पाकिस्तानी हैंडलरों के साथ उसकी बातचीत होने की पुष्टि हुई थी। मई में कोट भलवाल जेल में जब पुलिस और सीआरपीएफ टीम ने छापा मारा तो दर्जनभर मोबाइल सिम बरामद हुए थे। इसी साल अप्रैल में जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी मुजफ्फर बेग से मोबाइल फोन जब्त किया गया था। श्रीनगर की सेंट्रल जेल में एनआईए ने 2018 में पुलिस व सीआरपीएफ के साथ मिलकर छापा मारा था। उस वक्त 25 मोबाइल फोन, सिम कार्ड और पाकिस्तानी झंडे बरामद किए थे। जुलाई 2021 में जम्मू पुलिस ने कोट भलवाल जेल में छापा मारकर नौ मोबाइल फोन, सिम कार्ड व पैन ड्राइव बरामद की थी। इन घटनाओं पर रोक न लगने के कारण अब जम्मू-कश्मीर की विभिन्न जेलों में बंद 26 खूंखार आतंकियों को आगरा सेंट्रल जेल में शिफ्ट किया गया है। खुफिया एजेंसी ने जम्मू-कश्मीर की जेलों में बंद करीब 100 आतंकियों की सूची तैयार की है। इसमें ए श्रेणी के 30 और बी श्रेणी के 70 आतंकी बताए गए हैं। ये जेल के भीतर रहते हुए आतंकी घटनाओं का प्लान तैयार कर देते हैं। आतंकी संगठनों का नेटवर्क तोडऩे के लिए जल्द ही दूसरे खूंखार कैदियों को भी अन्य जेलों में शिफ्ट किया जाएगा।

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