अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंह देव ने कोयला खदान परियोजनाओं का विरोध कर रहे स्थानीय ग्रामीणों के समर्थन में सोमवार को सरगुजा जिले के हसदेव अरण्य क्षेत्र के गांवों का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि यदि विरोध करने वालों पर लाठी या गोली चली तो इसे झेलने वाले वह पहले व्यक्ति होंगे।
मंत्री ने यह भी कहा कि वह दिल्ली जाएंगे और पार्टी नेता राहुल गांधी को प्रदर्शनकारियों के दर्द और उनकी मांगों से अवगत कराएंगे। सिंह देव की यह टिप्पणी मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा यह कहने के एक दिन बाद आई है कि जो लोग हसदेव अरण्य क्षेत्र में कोयला खनन का विरोध कर रहे हैं, उन्हें पहले अपने घरों की बिजली बंद करनी चाहिए।
मंत्री के कार्यालय से जारी बयान में कहा गया है कि सिंह देव ने सोमवार को जिले के उदयपुर विकासखंड के घाटबर्रा, हरिहरपुर, साल्ही और बासन गांव का दौरा किया। उन्होंने आंदोलनकारियों को आश्वासन दिया कि वह उनकी लड़ाई में उनके साथ खड़े हैं। ये गांव परसा खदान और परसा पूर्व कांता बसन (पीईकेबी) के दूसरे चरण के कोयला परियोजनाओं से प्रभावित होंगे, जिसके लिए राज्य सरकार ने हाल ही में अंतिम मंजूरी दी थी। दो खदानें कांग्रेस शासित राजस्थान के राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (आरआरवीयूएनएल) को आवंटित की गई थीं।
हरिहरपुर में ग्रामीणों को संबोधित करते हुए सिंहदेव ने कहा, अगर कोयले की जरूरत है तब वन भूमि के बजाय मैदानी क्षेत्र को लिया जाना चाहिए। जब हमारे पास 80 साल का कोयला भंडार है और हमने 2030 तक बिजली पैदा करने के लिए कोयले पर निर्भरता पूरी तरह से छोड़ देने का फैसला किया है, तब हम घने जंगलों और जैव विविधता से भरपूर हसदेव को क्यों नष्ट करें। मुझे लगता है कि इस (खनन) पर पुनर्विचार करने की जरूरत है। अगर हम बिजली की जरूरत के लिए हसदेव के जंगल को नष्ट कर देते हैं, तो इसका हमारे पर्यावरण पर बहुत प्रभाव पड़ेगा।
मंत्री ने कहा, मैं यहां देर से (विरोध में) इसलिए आया हूं क्योंकि जब तक आप एकजुट नहीं होंगे, मेरे लिए कुछ भी कहना ठीक नहीं होगा। मैं आपकी लड़ाई में हमेशा आपके साथ हूं, लेकिन आपको भी एक होना है। फिर चाहे गोली चलाई जाए या लाठीचार्ज की जाए, मैं सबसे पहले सामने होउंगा। अगर आप बंटे हुए हैं तब हमारे लिए आपके साथ खड़ा होना मुश्किल हो जाता है इसलिए आपको एकजुट रहना चाहिए।
सिंह देव ने कहा कि जैसा कि ग्रामीण दावा कर रहे हैं कि ग्राम सभा (एक ग्राम सभा जिसे क्षेत्र में किसी भी परियोजना को मंजूरी देने के लिए बनाई गई) नकली थी, इसलिए इसकी जांच होनी चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि जब जिला पंचायत, जनपद पंचायत और ग्राम पंचायत नई ग्राम सभा चाहते हैं तो इनकी मांग को मान लिया जाना चाहिए।




