रायपुर। ऐतिहासिक दूधाधारी मठ से कुछ दूरी पर और भाठागांव स्थित श्रीदूधाधारी अंतरराज्यीय बस अड्डा के सामने स्थित श्री नीलकंठेश्वर महादेव की 15 फीट ऊंची प्रतिमा श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है। मात्र 10-12 बरस में ही मंदिर की प्रसिद्धि दूर-दूर तक फैल चुकी है। भव्य प्रतिमा का दर्शन करने और प्रतिमा के नीचे नर्मदेश्वर शिवलिंग पर जलाभिषेक करने पूरे सावन महीने में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। खासकर सावन सोमवार, महाशिवरात्रि पर विशेष श्रृंगार दर्शन, भजन-कीर्तन का आयोजन होता है।

मंदिर का इतिहास- 15 साल पहले तक मठपारा को पिछड़ा इलाका कहा जाता था। जिस जगह पर भव्य प्रतिमा स्थापित है, यहां से शाम होने के बाद सुनसान हो जाने से कोई नहीं गुजरता था। थोड़ी दूर पर स्थित बस्ती के लोगों का डर दूर करने के लिए छोटा सा मंदिर बनवाया गया। दर्शन करने श्रद्धालु आने लगे। इसे देखते हुए इलाके के युवाओं ने भव्य प्रतिमा का निर्माण करवाया। वृंदावन के पंडितों ने नर्मदेश्वर महादेव की प्राणप्रतिष्ठा करवाई और शिवजी की नीले रंग की भव्य प्रतिमा बनने के बाद इसे नीलकंठेश्वर नाम दिया गया।
मंदिर की विशेषता- मठपारा बस्ती में गणेश प्रतिमा विराजित करने वाले युवाओं ने रेत, सीमेंट, कांक्रीट, लोहे की छड़ का उपयोग करके भोलेनाथ की प्रतिमा बनवाई। वाटरप्रूफ प्रतिमा पहले खुले आकाश तले विराजित की गई थी। बाद में इसके उपर टीन का शेड लगाया गया ताकि प्रतिमा सुरक्षित रहे। मंदिर के चारों तरफ श्रद्धालुओं के बैठने के लिए गार्डन विकसित किया गया। अब श्रद्धालु दर्शन करने के साथ मंदिर के गार्डन में सुकून के पल तलाशने आते हैं।




