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जब युवाओं पर छा गया था राज- सिमरन का खुमार, क्या आज के दौर में बन पाती DDLJ आइकॉनिक फिल्म ?

By @dmin
Published: October 20, 2020
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हिंदी फिल्म इंडस्ट्री की सबसे रोमांटिक फिल्म मानी जाने वाली ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ यानी कि डीडीएलजे को रिलीज हुए 25 साल हो गए हैं। इस फिल्म को देखने वाली जवां पीढ़ी आज अधेड़ हो चुकी है और इस फिल्म के बाद आई पीढ़ी जवान हो चुकी है, लेकिन इस फिल्म का जादू आज भी बना हुआ है। इस फिल्म की कहानी यूं थी- राज (शाहरुख खान) और सिमरन (काजोल) लंदन में रह रहे भारतीय मूल के परिवार से हैं। परंपरागत सोच वाले सिमरन के पिता बलदेव सिंह का किरदार अमरीश पुरी ने निभाया था, जिन्हें अपने देश की मिट्टी से बेहद प्यार होता है। वहीं राज के पिता (अनुपम खेर) खुले विचारों वाले हैं।

Contents
  • लेकिन ऐसा क्या था इस फिल्म में जो दर्शकों को छू गया?
  • शाहरुख खान बतौर रोमांटिक हीरो
  • सुपरहिट होने की बड़ी वजह फिल्म का संगीत भी था

सिमरन सच्चे प्रेम के सपने देखती है, पर मां (फरीदा जलाल) उसे आगाह करती है कि सपनों के पूरा होने की उम्मीद न रखें। बलदेव को बचपन के दोस्त अजीत (सतीश शाह) की चिट्ठी आती है जिसमें 20 साल पहले दिए वचन को पूरा करने का जिक्र होता है जिसमें सिमरन की शादी उनके बेटे कुलजीत (परमीत सेठी) के साथ करने का जिक्र किया जाता है। सिमरन शादी से पहले अपने दोस्तों के साथ यूरोप घूमने जाना चाहती है, इसके लिए वो पिता से इजाजत मांगती है। यूरोप ट्रिप में सिमरन की मुलाकात राज से होती है।

ट्रेन छूट जाने की वजह से दोनों साथ वक्त गुजारते हैं और ट्रिप के आखिर तक दोनों को एक-दूसरे से प्यार हो जाता है, पर इजहार नहीं कर पाते। सिमरन कुलजीत के साथ शादी के लिए परिवार के साथ पंजाब आ जाती है। राज भी सिमरन को ढूंढते-ढूंढते पंजाब आ जाता है और सिमरन से प्यार का इजहार कर देता है। सिमरन की मां दोनों को भाग कर शादी करने को कह देती है, पर राज सिमरन के पिता की इजाजत के बिना शादी करने के लिए राजी नहीं होता। राज बलदेव और पूरे परिवार को प्रभावित करने की कोशिश करता है और अंत में बलदेव सिंह कहते हैं, ‘जा सिमरन जा, जी ले अपनी जिंदगी।’

20 अक्तूबर 1995 को रिलीज हुई “डीडीएलजे” को दर्शकों से भरपूर प्यार मिला। फिल्म न सिर्फ हिंदुस्तान में बल्कि विदेश में रह रहे भारतीयों को भी खूब पसंद आई। इस फिल्म से हिंदी सिनेमा को शाहरुख खान और काजोल के रूप में नई रोमांटिक जोड़ी मिल गई, जिसका जादू आज तक बना हुआ है। बहरहाल फिल्म ने सारे रिकॉर्ड तोड़ डाले। मुंबई के मराठा मंदिर में यह फिल्म 1,000 हफ्ते तक चली। 10 फिल्मफेयर अवॉर्ड जीतने वाली डीडीएलजे सिर्फ चार करोड़ रुपये में बनी थी। 1995 में फिल्म ने कुल 102.50 करोड़ रुपये का बिजनेस किया, जिसमें 89 करोड़ रुपये की कमाई भारत से और 13.50 करोड़ रुपये की कमाई विदेश से हुई।

लेकिन ऐसा क्या था इस फिल्म में जो दर्शकों को छू गया?

फिल्म इतिहासकार एसएमएम असजा कहते हैं, “डीडीएलजे से आम लोगों, खासकर उस दौर के नौजवान को एक पहचान मिली। उन नौजवानों ने शाहरुख में अपने आप को देखा, जो 80 और 90 के शुरुआती दशक की रोमांटिक हिंदी फिल्मों से अलग था। अब तक रोमांटिक हिंदी फिल्मों का हीरो सुपर हीरो हुआ करता था जिसे डीडीएलजे ने तोड़ा। इसने नौजवानों के दिलों में जगह बनाई। जैसे-जैसे फिल्म की कहानी आगे बढ़ती है आप देख सकते हैं कि दर्शक प्रार्थना कर रहे होते हैं कि राज-सिमरन पकड़े ना जाएं और राज को सिमरन मिल जाए। इस कहानी से आम लोग खुद को जोड़ सके।”

सिमरन के किरदार की विवेचना करते हुए एसएमएम असजा कहते हैं, “सिमरन का किरदार सामाजिक स्वीकार्यता के हद तक मॉर्डन था। काजोल का किरदार विदेश में पढ़ाई करता है और पश्चिमी कपड़े पहनता है पर जब सिमरन का किरदार भारत आता है तो बतौर दुल्हन भारतीय संस्कृति में ढल जाता है। सिमरन के किरदार ने मॉर्डन और परंपरा का अच्छा तालमेल रखा जिसे भारत के मध्यम वर्गीय परिवार अपने आप से जोड़ पाए। दर्शकों की फिल्म के साथ जुड़ने की ये बहुत बड़ी वजह रही।”

वरिष्ठ फिल्म पत्रकार अजय ब्रम्हात्मज कहते हैं, “फिल्म भारतीय मूल के लोगों को पसंद आई। लोगों को अपील कर गई कि हीरो जो हीरोइन के साथ भाग सकता था, जिसके लिए हीरोइन की मां भी तैयार थी लेकिन हीरो पिताजी की इजाजत के बिना शादी नहीं करेगा। ये बात आदर्श के तौर पर दिखाई गई थी जो लोगों को बहुत पसंद आई।”

शाहरुख खान बतौर रोमांटिक हीरो

अजय ब्रम्हात्मज का कहना है कि ‘दीवाना’, ‘डर’, ‘बाजीगर’ जैसी फिल्मों से शाहरुख खान दर्शकों के बीच पॉपुलर बन चुके थे। सलमान खान, आमिर खान और शाहरुख खान तीनों उस दौरान रोमांटिक फिल्में कर रहे थे। हालांकि जिस ऊर्जा के साथ शाहरुख आए थे उस ऊर्जा ने उन्हें नौजवानों से कनेक्ट कर दिया। वहीं फिल्म इतिहासकार एसएमएम असजा बताते हैं कि डीडीएलजे ने शाहरुख खान को बतौर रोमांटिक हीरो की उपाधि दे दी।

सुपरहिट होने की बड़ी वजह फिल्म का संगीत भी था

डीडीएलजे के एलबम में सात गाने थे और सारे गाने सुपरहिट रहे। जतिन-ललित का संगीत और आनंद बक्शी के लिरिक्स ने अपार सफलता पाई। इन गानों को लता मंगेशकर, आशा भोंसले, उदित नारायण, कुमार सानू और अमिताभ भट्टाचार्य ने गाया था। इतिहासकार एसएमएम असजा कहते हैं, “फिल्म के सुपरहिट होने की बहुत बड़ी वजह रही फिल्म का संगीत। ये गाने देखने में भी बहुत खूबसूरत थे। जिससे फिल्म को रिलीज से पहले ही बहुत प्रचार मिल गया था।”

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