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Health

चिड़चिड़े बच्चों को संभालने के लिए क्या करें

By @dmin Published August 9, 2020
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आजकल मां और बाप दोनों ही वर्किंग होते हैं और ऐसे में बच्चा अधिकतर समय दादा-दादी या डे-केयर में बिताता है। बच्चे की जो परवरिश मां-बाप कर सकते हैं, वो कोई और नहीं कर सकता है। वर्किंग पैरेंट्स को अपने बच्चों की परवरिश को लेकर कई तरह की समस्याएं आती हैं जिनमें से एक है बच्चे का चिड़चिड़ा व्यवहार।
जहां मां और बाप दोनों काम करते हों, वहां अक्सर पैरेंट्स बच्चों के लिए समय नहीं निकाल पाते हैं और इसका असर कुछ यूं निकलता है कि बच्चे जिद्दी और चिड़चिड़े हो जाते हैं।
अगर आपका बच्चा भी जिद्दी और चिड़चिड़ा हो गया है तो यहां बताए गए टिप्स की मदद से आप उसे ठीक तरह से हैंडल कर सकते हैं।

Contents
हर बात माननामारपीट या डांट से नहीं चलेगा कामदूसरे बच्चों से तुलना करनासमय दें और दोस्त बनें

हर बात मानना

यदि आप सच में चाहते हैं कि आपका बच्चा संस्कारी और आज्ञाकारी बने तो उसकी हर जिद पूरी करने की जरूरत नहीं है। हर बच्चा जिद करता है और अगर उसकी सारी मांगों को पूरा कर दिया जाए तो इससे बच्चे में अपनी बात मनवाने के लिए जिद करने और गुस्सा करने की प्रवृत्ति पैदा होने लगती है। दोनों पैरेंट्स मिलकर बच्चे को समझाएं कि क्या सही और गलत है। आप दोनों के एकसाथ बात करने से यकीनन उसे आपकी बात समझ आ जाएगी।

मारपीट या डांट से नहीं चलेगा काम

बच्चे तो होते ही शैतान हैं और उनके लिए अपनी बात मनवाने का एक ही रास्ता होता है गुस्सा करना, जिद करना या चिड़चिड़ा व्यवहार करना। अगर आपका बच्चा गुस्सा करता है या कोई गलत हरकत करता है तो उसे डांटे या मारे नहीं। इससे उसका व्यवहार और गलत होता चला जाएगा।
बच्चों के साथ संयम और धैर्य के साथ पेश आना चाहिए वरना उनका व्यवहार और खराब होता चला जाएगा।

दूसरे बच्चों से तुलना करना

अक्सर पैरेंट्स पढ़ाई, खेल या किसी भी अन्य चीज को लेकर दूसरे बच्चों से अपने बच्चों की तुलना करने लगते हैं। बच्चों के चिड़चिड़ा और जिद्दी बनने का एक कारण यह भी हो सकता है। अगर आपको लग रहा है कि आपका बच्चा इस वजह से चिड़चिड़ा व्यवहार करने लगा है तो ऐसा करना बंद कर दें।
जब भी आपका बच्चा कुछ अच्छा करता है तो उसकी तारीफ करें और उसे आगे बढऩे के लिए प्रेरित करें।

समय दें और दोस्त बनें

पैरेंट्स का ये फर्ज बनता है कि अपने बाकी कामों की तरह बच्चों के लिए भी समय जरूर निकालें। दिनभर बच्चा आपके बिना रहता है तो कम से कम रात को सोने से पहले उससे बात जरूर करें। बच्चे से उसके स्कूल और पढ़ाई के बारे में पूछें।
समय निकालकर बच्चों के साथ खेलें। जब आप उसके साथ उसके खेलों में शामिल होंगे तो उसे आप अपने दोस्त जैसे लगेंगे जिससे वो अपने दिल की हर बात कह सकता है। इस तरह आपका साथ और प्यार बच्चों को जिद्दी और चिड़चिड़ा होने से रोक सकता है।
पैरेंट्स ही हैं जो बच्चे को जिद्दी और चिड़चिड़ा होने से रोक सकते हैं। अब अगर आप अपने बच्चे के चिड़चिड़े व्यवहार से परेशान हैं तो ऊपर बताई गई बातों पर गौर जरूर करें।

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