जयपुर (एजेंसी)। राजस्थान में कांग्रेस की सरकार को बने दो साल पूरे हो गए हैं। हालांकि, ये दो साल अशोक गहलोत की सरकार के लिए किसी चुनौती से कम नहीं रहे हैं। सत्ता में आने के महज 4 महीने बाद ही हुए लोकसभा चुनावों में पार्टी को राज्य की 25 की 25 सीटों पर हार का मुंह देखना पड़ा तो वहीं कार्यकाल के दूसरे वर्ष में अपनी ही पार्टी के भीतर उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट की बगावत और कोरोनावायरस महामारी की वजह से राज्य की कांग्रेस सरकार की राह आसान नहीं रही।

जब अपनों ने ही कर दी बगावत
कोरोना महामारी के कहर के बीच, राज्य में अशोक गहलोत और सचिन पायलट एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप के साथ खुलकर सामने आए। हालत यहां तक पहुंच गई कि सीएम गहलोत ने आरोप लगाया कि बीजेपी उनकी सरकार भी ठीक वैसे ही गिराने की कोशिश कर रही है जैसे मध्य प्रदेश में कमलनाथ की सरकार को गिराया गया था।
एक महीने से ज्यादा वक्त तक चले इस संकट का अंत हालांकि खुशनुमा रहा जब सचिन पायलट और उनके समर्थकों ने विश्वास मत के दौरान अशोक गहलोत के पक्ष में वोट दिया। लेकिन जब तक यह तनाव जारी रहा कई अनिश्चितताओं को भी समेटे रहा। इस पूरे मामले में आयकर विभाग और ईडी जैसी केंद्रीय एजेंसियां तक शामिल हो गई थीं। सचिन पायलट के बगावती तेवर को देखते हुए उन्हें न सिर्फ उपमुख्यमंत्री के पद से हटा दिया गया बल्कि पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष पद से भी उनकी छुट्टी की गई। पायलट के दो करीबी विश्वेंद्र सिंह और रमेश मीणा को भी कैबिनेट मंत्री के दर्जे से हाथ धोना पड़ा। हालांकि, बाद में शीर्ष नेतृत्व ने मामला अपने हाथ में लिया और सरकार पर मंडराता संकट दूर हुआ।
भीलवाड़ा मॉडल की तारीफ पर बाकी इलाकों ने दी टेंशन
इस साल की शुरुआत ही गहलोत सरकार के लिए चुनौतियों से भरी हुई थी जब मार्च में एक इतालवी नागरिक कोरोनावायरस संक्रमित पाया गया था। राजस्थान कोरानावायरस को फैलने से रोकने के लिए लॉकडाउन लगाने वाला देश का पहला राज्य था। कोरोना महामारी के शुरुआती दिनों में ही इसकी रोकथाम के लिए अपनाए गए राजस्थान के ‘भीलवाड़ा मॉडलÓ की पूरे देश में वाहवाही भी हुई। हालांकि, राजस्थान के बाकी इलाकों में कोरोनावायरस का फैलाव गहलोत सरकार के लिए चिंता का कारण बना रहा।
झेलनी पड़ रही है सहयोगियों की नाराजगी
इस दौरान राज्य की राजनीति में भी कई उतार-चढ़ाव देखने को मिले हैं। खासतौर पर कुछ समय पहले हुए पंचायत, जिला प्रमुख और स्थानीय निकाय चुनावों में। इन चुनावों के नतीजे काफी चौकाने वाले रहे, जिसमें कई कांग्रेस उम्मीदवारों की ग्रामीण इलाकों में हार हुई, तो शहरी इलाकों में उन्हें समर्थन भी मिला।
इस बीच कांग्रेस को राजनीतिक संकट और राज्यसभा चुनाव में मदद करने वाली भारतीय ट्राइबल पार्टी (बीटीपी) भी अब उससे संबंध तोडऩा चाहती है। बीटीपी का आरोप है कि कांग्रेस ने जिला प्रमुख चुनाव में बीजेपी का समर्थन किया ताकि वह कुछ अहम इलाकों में अपने स्थानीय सहयोगी को दूर रख सके।
कृषि कानूनों के जवाब में लाए बिल राज्यपाल के पास अटके
केंद्र द्वारा बनाए गए कृषि कानूनों को लेकर राज्य में किसानों का प्रदर्शन भी जारी है। नए कृषि कानूनों के जवाब में राजस्थान सरकार ने नवंबर में विधानसभा में तीन बिल पास किए। इन बिलों को अभी तक राज्यपाल से मंजूरी नहीं मिली है।
फिलहाल सरकार अपने घोषणापत्र में किए वादों पर काम क रही है। राज्य सरकार ने अभी तक कृषि के लिए छोटी अवधि वाले 7 हजार 692 करोड़ रुपये के कर्ज को माफ कर दिया है, जिससे 20.50 लाख किसानों को फायदा पहुंचा है। राज्य सरकार किसानों को वृद्धा पेंशन भी दे रही है जिससे 2.79 किसानों को फायदा हुआ है।




