हमेशा तन-मन-धन से की कांग्रेस की सेवा, पार्टी के हर मानदंड पर उतरते हैं खरे
भिलाई। टिकट वितरण के लिए कांग्रेस की चल रही कवायद के बीच जिले की सबसे अहम् सीट वैशाली नगर से युवा नेता इरफान खान ने दावेदारी ठोक दी है। पार्टी और संगठन की सेवा के लिए सदैव अवेलेबल रहने वाले इरफान को क्षेत्र से सशक्त उम्मीदवार माना जा सकता है। जब पार्टी के प्रति सेवा और समर्पण की बात आती है तो इरफान को नगरीय निकाय से लेकर विधानसभा और लोकसभा चुनाव तक में एक महत्वपूर्ण किरदार के रूप में देखा जाता रहा है। पार्टी ने उनकी निष्ठा और कार्यक्षमता को देखते हुए ही उन्हें अरूणाचल प्रदेश में भी चुनाव का दायित्व सौंपा था। एक जिम्मेदार जमीनी कार्यकर्ता से लेकर सफल व्यवसायी, व्यवहार में सरलता व सहजता से लेकर स्वच्छ और व्यक्तिगत छवि आदि जैसे गुणों से लबरेज इरफान खान वैशाली नगर क्षेत्र के लिए पार्टी की प्रत्येक अपेक्षाओं पर खरे उतरते हैं। वर्तमान में वे प्रदेश कांग्रेस के सचिव की जिम्मेदारी पूरी ईमानदारी से निभा रहे हैं।

बहुत कम लोग जानते हैं कि कांग्रेस नेता इरफान खान का परिवार तीन पीढिय़ों से नेहरू-गांधी विचारधारा से जुड़ा रहा है। उनके दादा स्व. मोहम्मद युनूस खान गांधीवादी नेता रहे हैं। 1939 के त्रिपुरा अधिवेशन से लेकर कांग्रेस के तत्कालीन आंदोलनों में उन्होंने सक्रिय रूप से भागीदारी की थी। जबकि इरफान खान की दादी स्व. बेगम बाई क्षेत्र की एक सफल उद्यमी व समाजसेविका के रूप में प्रतिष्ठित रहीं। वहीं उनके पिता मोहम्मद अकरम खान (बाबा) एक उन्नत कृषक के साथ ही लम्बे समय तक ट्रक मालिक संघ के अध्यक्ष व संरक्षक रहे। इस तरह राजनीतिक व सामाजिक दृष्टिकोण से इरफान खान का परिवार सदैव अग्रणी रहा है। स्वयं इरफान रोटरी क्लब ऑफ भिलाई सिटी के अध्यक्ष रह चुके हैं। इसके अलावा वे दुर्ग-भिलाई टेलीकॉम एसोसिएशन के भी अध्यक्ष रहे। इरफान पारिवारिक रूप से पेशे से किसान तो है हीं, व्यवसायी के रूप में भी उन्होंने प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर कई अवार्ड प्राप्त किए हैं। बी कॉम, एमबीए व एमए (पॉलिटिकल साइंस) की शैक्षणिक योग्यता वाले इरफान खान वरिष्ठ नेता रहे स्व. मोतीलाल वोरा से लेकर वर्तमान में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू तक से गहरे तक जुड़े रहे हैं।
वोरा बने प्रेरक, शुरू किया राजनीतिक सफर
वह 2008 का वर्ष था, जब इरफान खान ने अपने राजनीतिक सफर की शुरूआत की। प्रेरणा बने कांग्रेस के दिग्गज नेता स्व. मोतीलाल वोरा। कांग्रेस से जुडऩे के बाद इरफान ने स्वयं को पार्टी की सेवा के लिए समर्पित कर दिया। इसका प्रतिसाद भी उन्हें जल्द ही मिला। 2014 आते-आते उन्हें शहर जिला कांग्रेस कमेटी का महासचिव बनाया गया। 2017 में इरफान पहली बार प्रदेश कांग्रेस में प्रतिनिधि बने। 2018 में तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष व वर्तमान मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व वाले संगठन में उन्हें प्रदेश सचिव का महती दायित्व सौंपा गया। 2008 में कांग्रेस पार्टी की सदस्यता लेने के बाद 2013 के विधानसभा चुनाव में इरफान ने खूब डटकर पार्टी के लिए काम किया। 2014 व 2019 के दुर्ग नगर निगम के चुनाव हो या 2015 और 2021 में भिलाई नगर निगम के चुनाव, इरफान ने हर बार पार्टी की जीत के लिए तन-मन-धन और समर्पण से काम किया। पार्टी के प्रत्येक अभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सेदारी की।
2018 में की थी दावेदारी
विगत विधानसभा चुनाव के वक्त इरफान ने कांग्रेस के जमीनी सिपाही के रूप में वैशाली नगर से टिकट की मांग की थी। बताते हैं कि जिले से एक सीट अल्पसंख्यक समुदाय को देने की कांग्रेस की परंपरा रही है। ऐसे में इरफान खान का दावा पुख्ता था, लेकिन अंतिम समय में यह टिकट पूर्व मंत्री बीडी कुरैशी को दे दी गई। बावजूद इसके इरफान खान ने वैशालीनगर क्षेत्र में पार्टी की जीत के लिए हर मुमकीन काम किया। वैशाली नगर में काम करते हुए ही वे दुर्ग ग्रामीण सीट से प्रत्याशी ताम्रध्वज साहू के निर्वाचन अभिकत्र्ता का भी दायित्व पूरी जिम्मेदारी से निभाते रहे। पार्टी के जानकारों का मानना है कि इरफान खान उन चुनिंदा लोगों में शामिल थे, जिनके हाथों में तत्कालीन कांग्रेस प्रत्याशी ताम्रध्वज साहू की पूरी चुनावी कमान थी। प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनी और ताम्रध्वज साहू को गृह, पीडब्ल्यूडी, पर्यटन जैसे अहम् विभाग मिले, लेकिन इरफान खान किसी भी तरह के सत्ता सुख से वंचित रहे। बावजूद इसके वे अब भी पार्टी की निरंतर और सक्रिय रूप से सेवा में रत् हैं। माना जा रहा है कि इस बार ताम्रध्वज साहू उनके लिए फिल्डिंग कर सकते हैं। विगत वर्ष 2022 में पार्टी ने उन्हें दूसरी बार प्रदेश कांग्रेस कमेटी का प्रतिनिधि चुना था।
…जब डीआरओ बन अरूणाचल गए
इरफान खान वैसे तो स्थानीय से लेकर प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर हुए पार्टी के कार्यक्रमों, आंदोलनों, रैली, धरना-प्रदर्शनों में सदैव बढ़-चढ़कर भागीदारी करते रहे हैं। स्थानीय निकायों के चुनाव में ऑब्जर्वर और प्रभारी के रूप में भी उन्होंने पार्टी द्वारा दी गई जवाबदारियों को निभाया है। लेकिन एक वक्त ऐसा भी आया था जब पार्टी ने उन्हें अरूणाचल प्रदेश जैसे सीमांत राज्य में डीआरओ के रूप में काम करने को भेजा। पार्टी के आदेश पर इरफान अरूणाचल प्रदेश के ईस्ट सियान जिले में बतौर डीआरओ काम करने पहुंचे। उन्होंने अरूणाचल के इस जिले में काफी वक्त बिताया और अपने दायित्वों का बखूबी निर्वहन भी किया। बात जब कांग्रेस पार्टी के लिए काम करने की आती है तो इरफान खान को सदैव उपस्थित पाया जाता है। प्रदेश में सरकार बनने के बाद जब बहुत सारे लोग सत्ता सुख भोगने में लग गए थे, तब भी इरफान खान पार्टी और संगठन के लिए काम करते रहे।
बदल गई है वैशाली नगर की आबोहवा
2008 में अस्तित्व में आई वैशाली नगर की सीट को प्रारम्भ से ही भाजपा माइंड वाली सीट माना जाता रहा है। चुनाव के नतीजे इसके गवाही भी देते हैं, लेकिन 2018 में प्रदेश में भूपेश बघेल की अगुवाई में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद पार्टी ने इस क्षेत्र में अपना झंडा गाडऩे के लिए काफी काम किए हैं। क्षेत्र में अल्पसंख्यक समुदाय काफी संख्या में है। इसके अलावा कांग्रेस के परंपरागत वोट भी यहां मौजूद हैं। विगत करीब साढ़े 4 वर्षों में कांग्रेस संगठन ने जमीनी स्तर पर काफी प्रयास किए हैं। इन सबके चलते ऐसा कहा जा सकता है कि इस बार वैशाली नगर में भाजपा और आरएसएस की हवा मंद पड़ी है। इरफान खान क्योंकि अल्पसंख्यक समुदाय से आते हैं, इसलिए उन्हें इस समुदाय के साथ ही कांग्रेस के परंपरागत वोटों का भी लाभ मिलेगा। इसके अलावा सबसे महत्वपूर्ण यह भी है कि वे स्वयं इस क्षेत्र के निवासी हैं। अपने क्षेत्र में वे प्रभाव तो रखते ही हैं। नया चेहरा भी हैं। इन हालातों को देखें तो लगातार दो बार चुनावी पराजय देख चुकी वैशाली नगर की सीट पर इरफान खान नतीजों को प्रभावित करने और जीत का परचम लहरने का दम-खम रखते हैं।




