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एचओजी तकनीक से एसईसीआर ने 7 माह में बचाया 25 लाख लीटर से ज्यादा डीजल, जानिए क्या है यह तकनीक

By Mohan Rao
Published: November 9, 2023
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एचओजी तकनीक
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दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के अंतर्गत एलएचबी आधारित 20 ट्रेनों में हेड ऑन जनरेशन (एचओजी) प्रणाली शुरू

भिलाई। छत्तीसगढ़ में रेलवे ने महत्वपूर्ण ट्रेनों में हेड ऑन जनरेशन (एचओजी) तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। ईंधन की बचत में यह तकनीक बेहद कारगर साबित हो रही है। इस तकनीक का इस्तेमाल कर रेलवे ने बीते सात माह में 25 लाख लीटर से भी ज्यादा डीजल की बचत की है। इससे रेलवे को 17 करोड़ से भी ज्यादा राशि की बचत हुई है।

Contents
  • दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के अंतर्गत एलएचबी आधारित 20 ट्रेनों में हेड ऑन जनरेशन (एचओजी) प्रणाली शुरू
  • ट्रेनों में HOG प्रणाली के यह हैं लाभ

बता दें वर्तमान में दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के तहत तीनों मंडलों से चलने वाल 20 ट्रेनों को अत्याधुनिक ‘हेड ऑन जेनरेशन (एचओजी) प्रणाली से लैस किया गया है। अत्याधुनिक ‘हेड ऑन जेनरेशन (एचओजी) प्रौद्योगिकी को अपनाने के साथ ही दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे की 20 ट्रेनें हरित यानी ‘ग्रीन’ ट्रेन हो गई है। अब ये ट्रेनें महंगे डीजल ईंधन को जलाने की बजाय ओवर हेड उपकरण (ओएचई) के माध्यम से सीधे ग्रिड से बिजली ले रही है। जिससे कि ट्रेनों के कोच में यात्रियों को सुरक्षित यात्रा का लाभ मिलता है।

इंजन से सीधे कोच को मिलता है पॉवर
हेड ऑन जेनरेशन (एचओजी) इंजन से सीधे इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन पावर केबल की शक्ति का उपयोग करके प्रकाश और एयर कंडीशनिंग के लिए कोचों को विद्युत आपूर्ति करने की एक प्रणाली है। एलएचबी आधारित ट्रेनों के कोचों के लिए विद्युत उत्पादन के सबसे आम तरीके को एंड ऑन जेनरेशन (ईओजी) कहा जाता है । प्रत्येक एलएचबी गाड़ियों पर कोचों को विद्युत आपूर्ति करने के लिए डीजल इंजन ले जाने वाली पावर कार के दो सेट होते थे जिसमें कोच में लाइट और एयर कंडीशनिंग के लिए बिजली की आपूर्ति ट्रेन के दोनों सिरों पर लगाए गए विद्युत कारों में उपलब्ध डीजल जेनरेटर सेट के माध्यम से की जाती है। अब इन सभी 20 ट्रेनों में इंजन के माध्यम से ओवर हेड उपकरण (ओएचई) से विद्युत की सप्लाई की जा रही है।

इन 20 ट्रेनों में लगी है ‘हेड ऑन जेनरेशन (एचओजी) प्रणाली
दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे से मिली जानकारी के अनुसार इस प्रणाली का उपयोग 20 ट्रेनों में किया जा रहा है। इनमें बिलासपुर-चेन्नई एक्सप्रेस, बिलासपुर-पुणे एक्सप्रेस, बिलासपुर-एर्नाकुलम एक्सप्रेस, बिलासपुर-पटना एक्सप्रेस, बिलासपुर-भगत की कोठी एक्सप्रेस, बिलासपुर-बीकानेर एक्सप्रेस, छत्तीसगढ़ सम्पर्क क्रांति एक्सप्रेस, दुर्ग-निज़ामुद्दीन हमसफ़र एक्सप्रेस, दुर्ग-जम्मूतवी एक्सप्रेस, दुर्ग-फिरोजपुर अंत्योदय एक्सप्रेस, कोरबा-रायपुर हसदेव एक्सप्रेस, दुर्ग नौतनवा एक्सप्रेस, दुर्ग-कानपुर बेतवा एक्सप्रेस, दुर्ग-अजमेर एक्सप्रेस, कोरबा-अमृतसर छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस, दुर्ग-जयपुर एक्सप्रेस, दुर्ग-उधमपुर एक्सप्रेस, दुर्ग-भोपाल अमरकंटक एक्सप्रेस व रायगढ़-गोंदिया जनशताब्दी एक्सप्रेस शामिल है ।

ट्रेनों में HOG प्रणाली के यह हैं लाभ

  • डीजल की नगण्य खपत के परिणाम स्वरूप करोड़ो रुपये से भी अधिक मूल्य की डीजल की वार्षिक बचत।
  • डीजल जलने से होने वाले वायु प्रदूषण को कम करने के लिए विद्युत परिवहन व्यवस्था की ओर अग्रसर।
  • ट्रेनों में उच्च क्षमता वाले डीजल जनरेटर से होने वाले ध्वनि प्रदूषण का उन्मूलन कर इस प्रकार यात्रियों की सुविधा में वृद्धि करता है।
  • रेलवे ने छोटे इंजन वाले नए प्रकार की पावर कारों का निर्माण शुरू कर दिया है इसमे जो स्थान पहले भारी इंजनों के लिए आरक्षित था वह सामान्य वर्ग के बैठने के लिए उपयोग, इस प्रकार ट्रेनों में यात्रियों के लिए बैठने की क्षमता में वृद्धि।
  • डीजल जनरेटर से तेल और जनरेटर के अन्य खतरनाक ज्वलनशील उपकरणों को पृथक करने के कारण आग के खतरों मे कमी।
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