भिलाई। क्या ऐसा भी कोई क्षेत्र हो सकता है, जहां कोई समस्या न हो? जी हाँ! छत्तीसगढ़ के एक नवोदित नगर निगम क्षेत्र के लिए ऐसा कहा जा सकता है। दरअसल, गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू इस दिशा में शिद्दत से प्रयास कर रहे हैं। यह नगर निगम है- रिसाली। वर्षांत तक यह नगर निगम निर्वाचित परिषद के हवाले होगा, लेकिन इससे पहले ही कोशिश है कि यहां के नागरिकों की प्रत्येक मूलभूत समस्या का अंत कर दिया जाए।
गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू ने विधानसभा चुनाव के वक्त रिसाली और दुर्ग ग्रामीण के कतिपय इलाकों को मिलाकर नया नगर निगम बनाने का वायदा किया था। उन्होंने अपना वायदा निभा तो दिया किन्तु नवोदित नगर निगम क्षेत्र में समस्याओं की भरमार थी। ऐसे में इस निगम के अस्तित्व को साबित करने के लिए जरूरी था कि स्थानीय नागरिकों को मूलभूत तकलीफों से निजात दिलाई जाए। किसी भी नए नगर निगम क्षेत्र में यह न इतना सहज होता है, न सरल। जरूरी था कि प्राथमिकताएं तय की जाएं। गृहमंत्री श्री साहू ने निगम अधिकारियों को इसके लिए आवश्यक हिदायतें दीं। क्षेत्र की समस्याओं की खोज-खबर की गई, प्रस्ताव तैयार किए गए और सारे प्रस्ताव गृहमंत्री की टेबिल पर पहुंचे। सभी प्रस्तावों को श्री साहू ने तत्काल स्वीकृति दी। जाहिर है कि इनमें बहुधा पानी, बिजली, साफ-सफाई, नाली निर्माण, निकासी आदि जैसी समस्याएं ही थी।
इस साल के आखीर में नगर निगम के चुनाव होने जा रहे हैं और गृहमंत्री श्री साहू की अगुवाई में कांग्रेस यहां कोई कसर छोडऩे के मूड़ में नहीं है। हाल में जब मनोनीत पार्षदों (एल्डरमैन) की नियुक्तियां की गई तो रिसाली निगम क्षेत्र के कुल 40 वार्डों के लिए 8 एल्डरमैन नियुक्त किए गए। क्योंकि क्षेत्र को विकास की दौड़ में आगे ले जाना था, इसलिए गृहमंत्री श्री साहू ने सभी 8 एल्डरमैनों को 5-5 वार्डों का प्रभारी बनाया और उन्हें प्रभार वाले क्षेत्रों में जमीनी स्तर पर काम करने को प्रोत्साहित किया। अब यही एल्डरमैन स्थानीय नागरिकों से मिलकर उनकी समस्याएं जानते हैं, उसके प्रस्ताव बनाते हैं और यह प्रस्ताव गृहमंत्री के पास तत्काल पहुंचाए जाते हैं। सभी आवश्यक प्रस्तावों को तत्काल मंजूरी भी मिलती है और अगले कुछ दिनों में प्रभावित क्षेत्र में काम भी शुरू हो जाते हैं। फिलहाल प्रयास यह किया जा रहा है कि निगम चुनाव से पहले ही मूलभूत नागरिक सुविधाएं उपलब्ध करा दी जाए।
आपदा को बनाया अवसर
पिछले दो वर्षों में न केवल छत्तीसगढ़, अपितु पूरे विश्व के हालात बदले। जाहिर है कि रिसाली क्षेत्र भी इससे अछूता नहीं रहा। बावजूद इसके श्री साहू ने अपने निर्वाचन क्षेत्र दुर्ग ग्रामीण अंतर्गत निर्मित रिसाली नगर निगम क्षेत्र के हाथ नहीं छोड़ा। इतनी बड़ी आपदा को भी उन्होंने अवसर के रूप में देखा और निगम आयुक्त व अन्य अफसरों को लगातार दिशा-निर्देश देते रहे। उन्होंने अफसरों को स्पष्ट हिदायत दी कि क्षेत्र का कोई भी गली-मोहल्ला विकास की दौड़ में पीछे न रहे। क्योंकि यह एक सतत् प्रक्रिया है, इसलिए अब भी जारी है।
ओबीसी महिला होगी महापौर
यह तो तय है कि रिसाली निगम की पहली महापौर ओबीसी महिला होगी। आरक्षण की प्रक्रिया के बाद ही यह तय हो गया था। रिसाली नगर निगम के लिए इसे एक अच्छी खबर माना जा सकता है, क्योंकि एक महिला स्थानीय समस्याओं को बेहतर तरीके से महसूस कर सकती है। इसे दुर्ग नगर निगम के उदाहरण से भी समझा जा सकता है। वहां पहली दफा महापौर कांग्रेस के आरएन वर्मा बने थे, किन्तु जनसमस्याएं यथावत् रहीं। वहीं सरोज पाण्डेय के रूप में अगली दफा महापौर निर्वाचित होने के बाद दुर्ग शहर के हालात पूरी तरह बदल गए।
हमारा प्रयास नागरिकों को मिले सुविधाएं
समस्याएं तो रोजाना पैदा होती रहती है। हमारा प्रयास है कि नागरिकों को मूलभूत सुविधाएं अनवरत् मिलती रहे। यह सच है कि अब तक रिसाली निगम क्षेत्र में करोड़ों रुपए के विकास कार्य करवाए गए हैं, लेकिन यह तो सिर्फ शुरूआत है। नई परिषद के गठन के बाद इसमें और तेजी आएगी।
ताम्रध्वज साहू, विधायक एवं गृहमंत्री छत्तीसगढ़ शासन




