नई दिल्ली (एजेंसी)। कारगिल युद्ध के बारे में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का मानना था कि पाकिस्तान के सेना प्रमुख ने इसे लेकर नवाज शरीफ को धोखे में रखा था। भारत-पाकिस्तान के बीच 1999 में उपजे इस तनाव को खत्म करने के मकसद से युद्ध के दौरान ही वाजपेयी ने शरीफ से फोन पर चार-पांच बार बात की थी। इस बात का खुलासा वाजपेयी के करीब साढ़े तीन साल तक निजी सचिव रहे शक्ति सिन्हा की नई पुस्तक वाजपेयी: द ईयर्स दैट चेंज्ड इंडिया में किया गया है।
शक्ति सिन्हा ने तत्कालीन प्रधानमंत्री वाजपेयी के साथ कई वर्षों तक पीएमओ सहित निजी सचिव के तौर पर काम किया था। उनकी यह पुस्तक वाजपेयी की 96 वीं वर्षगांठ के मौके पर 25 दिसंबर को रिलीज होगी। सिन्हा अभी एमएस विश्वविद्यालय वडोदरा में अटल बिहारी वाजपेयी इंस्टीट्यूट ऑफ पॉलिसी रिसर्च एंड इंटरनेशनल स्टडीज के मानद निदेशक हैं।
उन्होंने बताया कि आज वाजपेयी को शिद्दत से याद किया जाता है लेकिन लोगों को पता नहीं कि 1998 में सरकार बनाने के लिए उन्हें कितनी मशक्कत करनी पड़ी थी। इसके बावजूद उन्होंने परमाणु परीक्षण करने और पाकिस्तान से दोस्ती का हाथ बढ़ाने के मुश्किल फैसले किए। इन मुद्दों पर उन्होंने भारत का डटकर बचाव किया लेकिन तभी कारगिल युद्ध छिड़ गया। अपनी सरकार में ही उन्हें जबर्दस्त विरोध का सामना करना पड़ा।
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी पर किताब में खुलासा: कारगिल युद्ध के दौरान नवाज शरीफ से 5 बार की थी बात




