नई दिल्ली (एजेंसी)। भारत-फ्रांस के बीच चार साल पहले हुए समझौते के तहत पांच राफेल लड़ाकू विमानों को जुलाई में अंबाला एयरबेस पर तैनात कर दिया गया। हालांकि अभी तक इन्हें औपचारिक तौर पर भारतीय वायुसेना में शामिल नहीं किया गया था। लेकिन अब गुरुवार को एक समारोह के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, उनकी फ्रांसीसी समकक्ष फ्लोरेंस पार्ली और भारत के शीर्ष सैन्य अधिकारियों की मौजूदगी में इसे वायुसेना को सौंपा जाएगा। अधिकारियों के मुताबिक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए फ्रांसीसी रक्षा मंत्री गुरुवार सुबह तक अंबाला पहुंचेंगी। इसके बाद वे और राजनाथ सिंह दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय रक्षा संबंधों और सुरक्षा सहयोग को और मजबूती देने के लिए अंबाला में ही चर्चा करेंगे। इस चर्चा के बाद पार्ली शाम में यहां से रवाना हो जाएंगी।
बता दें कि नरेंद्र मोदी की सरकार के पहले कार्यकाल के दौरान भारत और फ्रांस के बीच 36 लड़ाकू विमानों की खरीद के लिए 59,000 करोड़ रुपये की डील हुई थी. इस अंतर सरकारी समझौते के करीब चार साल बाद 29 जुलाई को पांच राफेल लड़ाकू विमानों का पहला जत्था भारत पहुंचा था। समझौते के तहत भारत को अब तक 10 राफेल विमानों की आपूर्ति की जा चुकी है जिनमें से पांच अभी फ्रांस में ही हैं। इनपर भारतीय वायुसेना के पायलट प्रशिक्षण ले रहे हैं। सभी 36 लड़ाकू विमानों की आपूर्ति 2021 के अंत तक पूरी होने की उम्मीद है। 36 राफेल विमानों में से 30 लड़ाकू विमान होंगे और छह ट्रेनर होंगे। ट्रेनर विमान ट्विन-सीटर होंगे और उनमें फाइटर जेट्स की लगभग सभी विशेषताएं होंगी। राफेल जेट का पहला स्क्वाड्रन अंबाला हवाई अड्डे पर तैनात किया जाएगा, जबकि दूसरा पश्चिम बंगाल में हासिमारा बेस पर तैनात होगा।




