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मत्स्य संपदा योजना से पुरुषोत्तम के एक्वा हब ने बदली केकराखोली की सूरत

By Poonam Patel Published May 14, 2026
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80 डिसमिल जमीन पर खड़ा किया मुनाफे का आधुनिक साम्राज्य, खुद बने आत्मनिर्भर, 10 ग्रामीणों को भी दिया रोजगार
80 डिसमिल जमीन पर खड़ा किया मुनाफे का आधुनिक साम्राज्य, खुद बने आत्मनिर्भर, 10 ग्रामीणों को भी दिया रोजगार
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रायपुर। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना भारत सरकार द्वारा मत्स्य पालन क्षेत्र के सतत विकास के लिए शुरू की गई एक प्रमुख योजना है। मछली उत्पादन बढ़ाना, मछुआरों की आय दोगुनी करना, आधुनिक तकनीक अपनाना और कटाई के बाद के नुकसान को कम करना है। बायोफ्लॉक, केज कल्चर और आरएएस जैसी आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा देकर मछुआरों और मत्स्य किसानों की आय बढ़ाना और रोजगार के अवसर पैदा करना।

छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचलों में अब युवा पारंपरिक खेती की सीमाओं को लांघकर आधुनिक तकनीकों के दम पर स्वरोजगार की नई इबादत लिख रहे हैं। धमतरी जिले के ग्राम केकराखोली निवासी पुरुषोत्तम राम मरकाम राज्य के हजारों युवाओं के लिए आत्मनिर्भरता का एक जीवंत उदाहरण बनकर उभरे हैं। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के सहयोग और वैज्ञानिक प्रशिक्षण के बल पर पुरुषोत्तम ने मछलीपालन को एक बेहद सफल और मुनाफे वाले बिजनेस में तब्दील कर दिया है।

’वैज्ञानिक प्रशिक्षण से मिली सफलता की चाबी’

शुरुआत में पुरुषोत्तम पारंपरिक तरीके से मछलीपालन कर रहे थे, लेकिन अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा था। उन्होंने हार मानने के बजाय बड़ौदा आरसेटी से वैज्ञानिक प्रशिक्षण प्राप्त किया। यहाँ उन्होंने जल प्रबंधन, बायो-फ्लॉक और उन्नत प्रजातियों के पालन की बारीकियाँ सीखीं। प्रशिक्षण के बाद उन्होंने वैज्ञानिक पद्धति से पंगेसियस और रूपचंदा जैसी प्रजातियों का पालन शुरू किया, जिससे उनके उत्पादन में अभूतपूर्व वृद्धि हुई।

17 लाख की सरकारी मदद ने बदला भाग्य

शासन की मत्स्य संपदा योजना पुरुषोत्तम के लिए गेम-चेंजर साबित हुई। योजना के तहत उन्हें 17 लाख रुपये की सहायता और आवश्यक सामग्री प्राप्त हुई। उन्होंने अपनी 80 डिसमिल निजी भूमि पर लगभग 8 लाख रुपये के निवेश से अत्याधुनिक फिश टैंकों का निर्माण कराया। वर्तमान में उनके टैंकों में करीब 10 टन मछली तैयार है। हाल ही में मात्र 2 क्विंटल मछली बेचकर उन्होंने 40 हजार रुपये की आय अर्जित की है। वह न केवल स्वयं आर्थिक रूप से सुदृढ़ हुए हैं, बल्कि गाँव के 8 से 10 लोगों को नियमित रोजगार भी प्रदान कर रहे हैं।

’प्रशासन ने की नवाचार की सराहना’

हाल ही में धमतरी कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने केकराखोली का भ्रमण कर पुरुषोत्तम के एक्वा हब का अवलोकन किया। उन्होंने पुरुषोत्तम के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि सीमित संसाधनों के बावजूद इस तरह के नवाचार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रहे हैं। जिला प्रशासन ऐसे कर्मठ युवाओं को तकनीकी मार्गदर्शन और सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

’भविष्य का लक्ष्य खुद की फीड यूनिट’

पुरुषोत्तम अब केवल मछली उत्पादन तक सीमित नहीं रहना चाहते। उनका अगला लक्ष्य स्थानीय स्तर पर मछली दाना (फीड) निर्माण इकाई स्थापित करना है। उनका मानना है कि क्षेत्र में फीड उपलब्ध होने से अन्य मत्स्य पालकों की लागत कम होगी और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर खुलेंगे। पुरुषोत्तम राम मरकाम ने कहा कि मेरी सफलता का श्रेय मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की जनहितैषी योजनाओं और मेरे परिवार के अटूट सहयोग को जाता है। यदि सही हुनर और सरकारी प्रोत्साहन मिले, तो गांव की माटी से भी सोना उपजाया जा सकता है।

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Poonam Patel May 14, 2026
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