भिलाई। कोयला के अवैध भंडारण मामले में दुर्ग पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने इस मामले आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने 15 टन से भी ज्यादा का कोयला बरामद किया जिसकी कीमत 3 लाख रुपए से भी ज्यादा बताई जा रही है। पुलिस को फर्जी जीएसटी बिल दिखाकर गुमराह करने की कोशिश भी की गई। पुलिस की सतर्कता व जीएसटी बिल सत्यापन में बड़ा खुलासा हुआ। फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले गिरोह तक पहुंची पुलिस, बिल बनाने वाले सहयोगी को भी गिरफ्तार किया है। आरोपियों के खिलाफ धारा 317 (4), 336(3), 340 (2) बीएनएस के तहत कार्रवाई की गई।
जिला दुर्ग पुलिस द्वारा संपत्ति संबंधी अपराधों एवं अवैध कारोबार के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के अंतर्गत थाना खुर्सीपार पुलिस एवं एसीसीयू दुर्ग को एक महत्वपूर्ण सफलता प्राप्त हुई है। मुखबिर से सूचना प्राप्त हुई थी कि खुर्सीपार गेट में विजय केसरवानी द्वारा भारी मात्रा में कोयला का अवैध रूप से भंडारण कर चोरी-छिपे बिक्री की जा रही है तथा उससे आर्थिक लाभ अर्जित किया जा रहा है।

सूचना को गंभीरता से लेते हुए एसीसीयू दुर्ग एवं थाना खुर्सीपार पुलिस की संयुक्त टीम द्वारा तत्काल कार्यवाही करते हुए मौके पर दबिश दी गई। जांच के दौरान मुख्य आरोपी विजय कुमार केसरवानी के कब्जे से लगभग 15.530 टन कोयला, व्यापार में प्रयुक्त कांटा तराजू तथा अन्य संबंधित अभिलेख बरामद किए गए। पूछताछ के दौरान आरोपी द्वारा उक्त सामग्री के वैथ स्वामित्व एवं स्रोत के संबंध में दस्तावेज प्रस्तुत कर स्वयं को वैध व्यापारी प्रदर्शित करने का प्रयास किया गया।
पुलिस ने मात्र दस्तावेजों पर विश्वास न करते हुए सूझबूझ, तकनीकी विश्लेषण एवं वैज्ञानिक जांच पद्धति का उपयोग करते हुए प्रस्तुत दस्तावेजों का गहन सत्यापन कराया। जांच के दौरान प्रस्तुत जीएसटी दस्तावेजों, परिवहन अभिलेखों एवं अन्य रिकार्ड का संबंधित विभाग से परीक्षण कराया गया, जिसमें दस्तावेज कूटरचित एवं फर्जी पाए गए। आरोपी द्वारा पुलिस को गुमराह कर वास्तविक तथ्यों को छिपाने का प्रयास किया गया था, किंतु पुलिस की सतर्कता, पेशेवर विवेचना एवं प्रभावी जांच के चलते पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा हो गया।
विवेचना के दौरान यह तथ्य भी प्रकाश में आया कि फर्जी दस्तावेज तैयार कराने एवं उपलब्ध कराने में अन्य व्यक्तियों की सक्रिय भूमिका रही है। जांच में वित्तीय लेनदेन, डिजिटल भुगतान माध्यमों, मोबाईल संचार एवं अन्य इलेक्ट्रानिक साक्ष्यों का विश्लेषण किया गया, जिससे फर्जी जीएसटी दस्तावेज तैयार करने वाले राजकुमार मिश्रा एवं उसके सहयोगी सुनील शर्मा की संलिप्तता सामने आई। आरोपियों के मध्य हुए लेनदेन एवं आपसी संपर्कों के पर्याप्त साक्ष्य प्राप्त होने पर पुलिस द्वारा त्वरित कार्रवाई करते हुए दोनों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। पूछताछ में प्राप्त तथ्यों एवं उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर इस प्रकरण में कुल तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
प्रकरण में बरामद कोक-कोयले के वास्तविक स्रोत, स्वामित्व, परिवहन व्यवस्था तथा संभावित चोरी अथवा अन्य आपराधिक गतिविधियों से संबंध की जांच अभी जारी है। इस संबंध में विभिन्न विभागों एवं संस्थानों से आवश्यक जानकारी प्राप्त की जा रही है। पुलिस द्वारा मामले के प्रत्येक पहलू की गंभीरता से जांच की जा रही है तथा इसमें संलिप्त अन्य व्यक्तियों की भूमिका की भी विस्तृत पड़ताल की जा रही है।




