-दीपक रंजन दास
छत्तीसगढ़ के लिए नया साल हंगामाखेज होने वाला है. राज्य के लिए यह चुनावी वर्ष जो है. साथ ही साथ हम एक लगातार बढ़ती जा रही समस्या का हल भी ढूंढते रहेंगे. पिछले कुछ सालों से सड़कों के सुन्दर चौक-चौराहों को उखाड़ा जा रहा है. ट्रैफिक आइलैंड गायब हो रहे हैं. बिलासपुर के कई चौराहों से गोला को गायब कर दिया गया है. अब लोग एक खूंटे के इर्द-गिर्द चक्कर काट रहे हैं. दृश्य कुछ-कुछ खो-खो जैसा है. रेफरी कोई है नहीं, इसलिए खिलाड़ी उठने के बाद किसी भी दिशा में दौड़ पड़ते हैं. वैसे यह सिकुड़न सिर्फ चौक चौराहों या सड़क विभाजक तक ही सीमित नहीं है. लोग भी सिकुड़ रहे हैं. साइज कम करने और वजन घटाने के लिए लोग कड़ी मेहनत कर रहे हैं. खाना पीना छोड़कर शेक पीकर जी रहे हैं. पर इस पूरी कवायद का शहरी यातायात को कोई लाभ नहीं मिल रहा है. 50-55 किलो का आदमी भी अब बड़ी, ऊंची, चौड़ी गाड़ियों की सवारी कर रहा है. गाड़ी कितनी भी बड़ी क्यों न हो जाए, दिमाग से अभी भी लोग ऑटो रिक्शा ड्राइवर ही हैं. संकरी सी सड़क पर भी वे बाजू से होकर निकल जाना चाहते हैं. जब सड़कों से टेम्पो हटे तो लोगों ने राहत की सांस ली थी. टेम्पो की गंदी आदत थी कि जहां भी थोड़ी सी जगह दिखाई देती, अपना थूथना घुसा देती. बाजू से निकले हुए पिछले चक्के दो-चार को साथ में घसीट लेते. अब टेम्पो की जगह एसयूवी और एक्सयूवी ने ले ली है. चोला बदलने से इंसान नहीं बदल जाता. फितरत वही रहती है. इन सिकुड़े लोगों की फैली हुई गाड़ियों को जगह देने के लिए ही सड़कों को चौड़ा करने की जरूरत पड़ रही है. पहले दुकानों को पीछे हटाया और डिवाइडरों को पतला कर रहे हैं. हालांकि इसका यातायात को कोई बहुत ज्यादा लाभ होने की संभावना नहीं है. बस सड़क किनारे के दुकानदारों की बात रह जाएगी. रायपुर की कुछ सड़कों से तो काफी पहले ही डिवाइडर हटा दिये गये थे. डिवाइडरों के स्थान पर दुकानदारों की अपनी गाड़ियां खड़ी होती थीं. दरअसल, गाड़ियों का आकार प्रकार भले ही बढ़ रहा हो पर इसके सवारों की क्वालिटी दिन-ब-दिन खराब हो रही है. लोग गाड़ियों का उपयोग व्हीलचेयर की तरह करने लगे हैं. भिलाई के नेहरू नगर में सड़क पर सप्ताह में दो बार सब्जी मंडी लगती है. लोग अपनी 20 लाख की गाड़ी को व्हीलचेयर बनाए, बाजार में घूमते हैं और सब्जियां खरीदते हैं. स्थानीय सरकारें शहर की एक-एक इंच जगह बेच चुकी है. पार्किंग के लिए कोई जगह ही नहीं रही. वैसे भी इतनी बड़ी-घनी आबादी वाले देश में यदि सबके पास गाड़ी हो जाए तो पार्किंग की समस्या तो आएगी ही. रिहायशी गलियों से लेकर मॉल-शापिंग आर्केड तक का पार्किंग स्पेस कम पड़ रहा है. झगड़े हो रहे हैं. आने वाले समय में पार्किंग में ही सबसे ज्यादा इनोवेशन करना पड़ेगा.





