ShreeKanchanpathShreeKanchanpathShreeKanchanpath
  • होम
  • छत्तीसगढ़
    • रायपुर
    • दुर्ग-भिलाई
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • व्यापार
  • स्पोर्ट्स
  • मनोरंजन
  • हेल्थ
  • E-Paper
Reading: Gustakhi Maaf: जिन्दगी शव पर खत्म या शव से ही शुरू
Share
Notification Show More
Font ResizerAa
ShreeKanchanpathShreeKanchanpath
Font ResizerAa
  • होम
  • छत्तीसगढ़
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • व्यापार
  • स्पोर्ट्स
  • मनोरंजन
  • हेल्थ
  • E-Paper
Search
  • होम
  • छत्तीसगढ़
    • रायपुर
    • दुर्ग-भिलाई
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • व्यापार
  • स्पोर्ट्स
  • मनोरंजन
  • हेल्थ
  • E-Paper
Follow US
© Copyright ShreeKanchanpath 2022 | All Rights Reserved | Made in India by Anurag Tiwari
ChhattisgarhDurg-BhilaiFeatured

Gustakhi Maaf: जिन्दगी शव पर खत्म या शव से ही शुरू

By Om Prakash Verma
Published: January 11, 2023
Share
gustakhi Maaf: जब दुर्गवासी पी गए लाश वाला पानी
gustakhi Maaf: जब दुर्गवासी पी गए लाश वाला पानी
SHARE

-दीपक रंजन दास
‘शव’ शब्द को लेकर आध्यात्म में अनेक बातें कही गई हैं. कुछ मतों में शव को शिव का अपभ्रंश माना गया है. शिव का एक अर्थ शून्य भी है. शून्य का मतलब है – वो, जो नहीं है. इस तरह से जीवन शव पर आकर स्थिर हो जाता है. इसके बाद जीवन नहीं है. पर यही शव जीवन की राह भी बताता है. श्मशान में शव के पास बैठकर लोगों में अनासक्ति के भाव आ सकते हैं. श्मशान में बैठकर जीवन और शरीर की नश्वरता का बोध भी होता है. इसे श्मशान वैराग्य भी कहा गया है. शव, फिर चाहे वह कितने भी प्रिय व्यक्ति का क्यों न हो, उसे नष्ट करने का विधान है. प्राचीन काल में कुछ मुल्क ऐसे भी हुए हैं जहां शव को संरक्षित रखने के प्रयास किये गये. पर इस कोशिश की व्यर्थता सामने आने के बाद इसपर विराम भी लगा है. आधुनिक वैज्ञानिक समाज जानता है कि अंतिम संस्कार मृतक को स्वर्ग पहुंचाने के लिए नहीं बल्कि शव से मुक्ति पाने के लिए किया जाने वाला एक संस्कार है. इसे पूरे सम्मान के साथ करते हुए हम मृतक की स्मृतियों को संजो लेते हैं. शव को रखा नहीं जा सकता, इसका कोई अर्थ नहीं है. कोई शव अग्नि को समर्पित कर देता है तो कोई उसे धरती मां को लौटा देता है. ऐसे भी लोग हैं जो मृत शरीर को पशु-पक्षियों के भोजन के लिए छोड़ देते हैं. शवदाह के लिए कहीं लकड़ियों का प्रयोग किया जाता है तो कहीं गोबर के कंडों का. अब बिजली के शवदाह गृह इसकी जगह ले रहे हैं. पर यही शव जब विवाद में पड़ जाए, जब उसका अंतिम संस्कार करना मुश्किल हो जाए, तो क्या हो? बस्तर में अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पर बवाल हो रहा है. यहां ईसाई समुदाय के लोगों को शव दफ्नाने के लिए गांव में जगह नहीं मिल रही. कहा जा रहा है कि इससे आदिवासियों के देवी-देवताओं की शक्ति क्षीण हो रही है. यह किसके दिमाग की उपज है, कहना मुश्किल है पर फिलहाल यह मुद्दा बड़ा बना हुआ है. आदिवासी बस्तर में जब शवों पर बवाल शुरू हुआ तो ईसाई मत को अपना चुके कुछ लोगों में श्मशान वैराग्य के भाव जाग उठे. उन्होंने इसे खत्म करने का रास्ता भी शवों से ही निकाला. अब वे आदिवासी रीति-रिवाजों के अनुसार ही शवों का अंतिम संस्कार करेंगे. समाज उन्हें आदिवासी समाज में स्वीकार करने को तैयार है. इसकी एक पूरी प्रक्रिया होगी. आस्था वैसे भी अंतर्मन का विषय है. उसका दिखावा जरूरी नहीं है. लोग अंदर से कुछ और, बाहर से कुछ और हो सकते हैं. पर लोक पम्पराओं का पालन यदि शांति के लिए जरूरी है, तो यही सही. ऐसी पहल करने वाले को साधुवाद. धर्मगुरुओं और समाज प्रमुखों के पास अपना-अपना स्वार्थ और अपनी-अपनी प्राथमिकताएं होंगी पर समाज में शांति और सुरक्षा गृहस्थों की प्राथमिकता होनी चाहिए.

युवा शक्ति ही राष्ट्र की रीढ़ है: दक्ष वैद्य साहू ने दिया देश भक्ति का संदेश
70 टन वजनी मशीन, 74 पहियों वाला ट्रक: एक साल में पूरा हुआ 1700 किमी का सफर
दुर्ग एसएसपी की बड़ी कार्रवाई : आरक्षक अरविंद मेन्डे सस्पेंड… नाबालिग आरोपी की मां के आरोप के बाद कार्रवाई
सेल्फ सपोर्टेड रूफिंग सिस्टम से बनेंगे स्टेट वेयर हाउसिंग कार्पोरेशन के नए गोदाम
भिलाई नगर विधायक देवेन्द्र यादव ने बीएसपी प्रबंधन पर लगाया पक्षपात पूर्ण कार्रवाई का आरोप
Share This Article
Facebook Whatsapp Whatsapp Copy Link
Share
Previous Article Traffic Awareness Week: ट्रैफिक रूल नहीं मानने से होती है जानलेवा दुर्घटनाएं, पेरेन्ट्स से अनुरोध नाबालिकों को गाड़ी चलाने न दें-दुर्ग पुलिस Traffic Awareness Week: ट्रैफिक रूल नहीं मानने से होती है जानलेवा दुर्घटनाएं, पेरेन्ट्स से अनुरोध नाबालिकों को गाड़ी चलाने न दें-दुर्ग पुलिस
Next Article छत्तीसगढ़ में हर वर्ग के लोगों में आयी खुशहाली: मुख्यमंत्री बघेल

Ro.No.-13672/51

× Popup Image

[youtube-feed feed=1]


Advertisement

Advertisement


Logo

छत्तीसगढ़ प्रदेश का एक विश्वसनीय न्यूज पोर्टल है, जिसकी स्थापना देश एवं प्रदेश के प्रमुख विषयों और खबरों को सही तथ्यों के साथ आमजनों तक पहुंचाने के उद्देश्य से की गई है। इसके साथ ही हम महत्वपूर्ण खबरों को अपने पाठकों तक सबसे पहले पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

क्विक लिंक्स

  • होम
  • E-Paper
  • Crime
  • Durg-Bhilai
  • Education

Follow Us

हमारे बारे में

एडिटर : राजेश अग्रवाल
पता : शॉप नं.-12, आकाशगंगा, सुपेला, भिलाई, दुर्ग, छत्तीसगढ़ – 490023
मोबाइल : 9303289950
ई-मेल : shreekanchanpath2010@gmail.com

© Copyright ShreeKanchanpath 2022 | All Rights Reserved | Made in India by Anurag Tiwari
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?